"श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में" यह अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय भजन भगवान श्री राम और माता जानकी के प्रति भक्त की अनन्य निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है। यह भजन विशेष रूप से हनुमान जी के उस भाव को व्यक्त करता है, जहाँ वे अपने हृदय में अपने आराध्य प्रभु श्री राम और माता सीता का निरंतर ध्यान करते हैं। भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक यह भजन न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि सच्चा आनंद सांसारिक वैभव में नहीं, बल्कि प्रभु के नाम के रस और उनके निरंतर चिंतन में निहित है। सत्संग, कीर्तन और व्यक्तिगत साधना के समय इस भजन का गायन भक्तों को प्रभु की भक्ति में सराबोर कर देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में,
देख लो मेरे मन के नगीने में।
मुझ को कीर्ति न वैभव न यश चाहिए,
राम के नाम का मुझ को रस चाहिए।
सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥
अनमोल कोई भी चीज मेरे काम की नहीं,
दिखती अगर उसमें छवि सिया राम की नहीं।
राम रसिया हूँ मैं राम सुमिरन करूँ,
सिया राम का सदा ही मैं चिंतन करूँ।
सच्चा आनंद है ऐसे जीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥
फाड़ सीना है सब को यह दिखला दिया,
भक्ति में है मस्ती बेधड़क दिखला दिया।
कोई मस्ती ना सागर मीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल भाव 'हनुमद् भक्ति' है। भक्त कहता है कि मेरे हृदय रूपी मंदिर में प्रभु श्री राम और माता जानकी सदा विराजमान हैं। जिस प्रकार हनुमान जी ने अपना सीना चीरकर प्रभु राम के प्रति अपनी अटूट निष्ठा का प्रमाण दिया था, उसी भाव को यहाँ दोहराया गया है। भक्त सांसारिक कीर्ति, यश और वैभव को तुच्छ मानता है क्योंकि उसके लिए राम नाम का रस ही सबसे बड़ा अमृत है। यह भजन हमें सिखाता है कि यदि हमारे मन में प्रभु की छवि नहीं है, तो संसार की कोई भी वस्तु हमारे लिए मूल्यवान नहीं है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन 'दास्य भक्ति' का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें भक्त अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना व्यक्त करता है। इसका महत्व इस बात में है कि यह अहंकार को नष्ट कर प्रभु के प्रति प्रेम को जागृत करता है। यह भजन विशेष रूप से हनुमान जयंती, राम नवमी और साप्ताहिक सत्संगों में गाया जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, किंतु ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में इसका गायन विशेष फलदायी होता है। इसे गाते समय मन में प्रभु की छवि का ध्यान करना चाहिए। यदि आप इसे सामूहिक कीर्तन में गा रहे हैं, तो ढोलक और मंजीरे के साथ इसका आनंद और भी बढ़ जाता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कीर्ति | यश या प्रसिद्धि |
| वैभव | सांसारिक सुख-सुविधाएं |
| राम रसिया | राम के नाम के रस में डूबा हुआ |
| चिंतन | निरंतर ध्यान या स्मरण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
यह भजन किस देवता को समर्पित है?
यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री राम और माता सीता को समर्पित है, जिसे हनुमान जी के भाव से गाया जाता है।
क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?
हाँ, इस भजन को घर पर पूजा के समय या कीर्तन में कभी भी गाया जा सकता है।
राम नाम का रस क्या है?
राम नाम का रस प्रभु के प्रति प्रेम और उनके नाम के निरंतर जप से मिलने वाली आंतरिक शांति और आनंद है।
क्या यह भजन हनुमान जी से संबंधित है?
हाँ, 'फाड़ सीना' वाली पंक्ति हनुमान जी के उस प्रसंग की ओर संकेत करती है जहाँ उन्होंने प्रभु राम के प्रति अपनी भक्ति सिद्ध की थी।
इस भजन को गाने से क्या लाभ होता है?
इसे गाने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और प्रभु के प्रति प्रेम भाव जागृत होता है।
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संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
यह सामग्री पारंपरिक भक्ति साहित्य और राम-भक्ति परंपरा के लोक भजनों पर आधारित है।
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