Parvati Stotram

साथ छूटे ना जन्मो जन्म भोले (Sath Chhute Na Tera Janmo Janam Bhole) - Shiv Ji Bhajan - Bhaktilok

157 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

भोला की कृपा से समस्त कष्टों का नाश

जय भोलेनाथ! यह भजन जीवन में शिव की अनुकंपा की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

साथ छूटे ना जन्मो जन्म भोले, साथ छूटे ना जन्मो जन्म भोले। एक बार जो संग करे, संग करे, संग करे भोले। साथ छूटे ना जन्मो जन्म भोले। जय भोलेनाथ। साथ छूटे ना जन्मो जन्म भोले। काल का, काल का हर कष्ट भंजें, सुख का, सुख का हर पल जियें। साथ छूटे ना जन्मो जन्म भोले। हर हर महादेव। साथ छूटे ना जन्मो जन्म भोले। खैर, खैर से हर गाम पहुंचे, संग में जो हर पग चले। साथ छूटे ना जन्मो जन्म भोले। जय भोलेनाथ।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन "साथ छूटे ना जन्मो जन्म भोले" का मुख्य विषय भगवान शिव के साथ अनवरत संबंध को दर्शाता है। भजनों में, श्रद्धालु यह प्रार्थना करते हैं कि वे भगवान शिव के संग आने वाले हर जन्म में एक साथ रहते रहें। 'एक बार जो संग करे' से साफ़ है कि यदि सच्चे हृदय से भगवान शिव की आराधना की जाए, तो उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है। भजन में अनेकों बार 'साथ छूटे ना' का उल्लेख किया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि भक्त भगवान से अपने अटूट संबंध की कामना कर रहे हैं। यह सतत भक्ति का प्रतीक है, जिसमें भक्त अपनी हर अवस्था में शिव की ओर लौटते हैं, चाहे वे सुख हों या दुख।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन भक्त के हृदय में शिव के प्रति असीम श्रद्धा और विश्वास को प्रकट करता है। भक्त यह अनुभव करना चाहता है कि भगवान शिव न केवल उनके जीवन के साथ हैं, बल्कि उनके संकटों को भी दूर करते हैं। 'काल का हर कष्ट भंजें' का अर्थ है कि भगवान शिव अपने भक्तों के सभी दुःख-दर्द का नाश करने में समर्थ हैं। चिरस्थायी मित्रता का यह भाव भक्त के मन में विश्वास जगाता है कि शिव की कृपा से वह हर संकट का सामना कर सकता है। इसलिए, इस भजन में भावुकता और गहन आस्था दोनों का समावेश है।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, यह भजन शिव भक्ति के मार्ग को प्रतिपादित करता है। भगवान शिव को 'भोलेनाथ' कहा गया है, जो उनकी सरलता और करुणा का प्रतीक है। भक्ति मार्ग का यह अनूठा तत्व श्रद्धालु को यह सिखाता है कि सच्चे मन से भगवान की आराधना करने पर भक्त के सभी मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। भगवान शिव के प्रति पूर्ण प्रेम और भक्ति, मनुष्य को आत्मज्ञान की ओर ले जाती है। इसमें भाव भक्ति का महत्व बहुत बड़ा है, जो अंततः मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भगवान शिव के प्रति भक्ति एवं अनुग्रह का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं में भगवान शिव की निर्भीकता एवं उनके भक्तों से प्रेम का अनेकों बार वर्णन मिलता है। शिव पुराण व रामायण में शिव की महिमा का वर्णन मिलता है, जहां वे अपने भक्तों की हर दुःख-दर्द को दूर करते हैं। यह भजन भक्तों को याद दिलाता है कि शिव का साथ हमेशा अटूट है, और भक्त को उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है। भगवान शिव की उपासना करने से कष्ट और संकटों से मुक्ति मिलती है। यह गीत आत्मविश्वास को बढ़ाता है और भक्त को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम में किया जा सकता है। ध्यान रखें कि आप स्वच्छ एवं शांत स्थान पर हों। दीप जलाना, मिठाई या फल का भोग लगाना भी उचित रहता है। सच्चे मन से भगवान शिव का ध्यान करते हुए बैठें, जिससे आपको भगवान से गहन संबंध महसूस हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि भक्त हर जन्म में भगवान शिव का साथ चाहता है। शिव के साथ रहने का भाव भक्ति का प्रतीक है, जो भक्त के जीवन में कष्टों को दूर करता है।

भजन के अंतर्गत भगवान शिव की विशेषता क्या है?

भजन में भगवान शिव को 'भोलेनाथ' कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वे सरलता और करुणा के प्रतीक हैं, जो अपने भक्तों के प्रति सदैव कृपालु रहते हैं।

इस भजन का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना चाहिए। दीप जलाकर एवं सच्चे मन से शिव की आराधना करते हुए इसे गुनगुनाएं, जिससे भक्ति का भाव प्रगाढ़ हो सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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