Matarani Bhajan

मेरी आस तू विश्वास तू है माँ (Meri Aas Tu Vishwas Tu Hai) - Matarani Bhajan - Bhaktilok

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मेरी आस तू विश्वास तू है माँ (Meri Aas Tu Vishwas Tu Hai) - Matarani Bhajan

माता रानी का यह अत्यंत पावन और भावपूर्ण भजन "मेरी आस तू विश्वास तू है माँ (Meri Aas Tu Vishwas Tu Hai)" सनातन धर्म के साधकों और माँ जगदम्बे के भक्तों के बीच अपार श्रद्धा का केंद्र है। देवी भगवती दुर्गा, आदिशक्ति, महालक्ष्मी, महासरकाती और महाकाली का यह संयुक्त स्वरूप संपूर्ण ब्रह्मांड की पालनहार और भक्तों के दुखों का नाश करने वाला माना जाता है। इस भजन का मुख्य भाव शरणागति (Surrender) और अनन्य भक्ति (Unwavering Devotion) का है, जहाँ साधक अपनी माता के चरणों में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देता है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि, मंगलवार, शुक्रवार तथा दैनिक संध्या वंदन के दौरान इस भजन का संकीर्तन अंतःकरण को पवित्र करता है और मन में अगाध शांति व सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इस लेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन अध्ययन करेंगे ताकि भक्तजन इसे सही उच्चारण और पूर्ण भक्ति भाव के साथ स्मरण कर सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मेरी आस तू विश्वास तू है माँ,
मेरी सांस तू आधार तू है माँ।
तेरे चरणों में मेरा ठिकाना रहे,
तू ही मेरी भक्ति का पैमाना रहे॥

जब-जब संकट मुझ पर आया, माँ,
तूने ही आकर मुझे बचाया, माँ।
दुनिया की ठोकरों से जो घबरा गया,
तेरी चौखट पे आकर वो तर गया॥

मेरी आस तू विश्वास तू है माँ,
मेरी सांस तू आधार तू है माँ।

रूप तेरा ममता की मूरत है माँ,
तेरे दर्शन से मिलती राहत है माँ।
जो भी सच्चे मन से तेरा नाम ध्याए,
उसकी हर मुराद तू पल में पूरा कर जाए॥

मेरी आस तू विश्वास तू है माँ,
मेरी सांस तू आधार तू है माँ।
अंधेरों में तूने ही दीप जलाया,
भटके हुए को रास्ता दिखाया।
मैं बालक नादान तेरी शरण में हूँ आया,
तूने ही मुझे अपना बेटा बनाया॥

मेरी आस तू विश्वास तू है माँ,
मेरी सांस तू आधार तू है माँ।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और जगत जननी माँ के बीच के उस पवित्र और अटूट रिश्ते को परिभाषित करता है जहाँ सांसारिक दुखों से विचलित मनुष्य अपनी माता के चरणों में आकर शरण लेता है। भजन की शुरुआती पंक्तियाँ "मेरी आस तू विश्वास तू है माँ, मेरी सांस तू आधार तू है माँ" यह दर्शाती हैं कि भक्त के जीवन का प्रत्येक श्वास और उसका संपूर्ण अस्तित्व केवल और केवल माँ की कृपा पर निर्भर है। इस संसार में मनुष्य कई प्रकार की चिंताओं, असफलताओं और संकटों से घिरा रहता है, परंतु जब वह माता के चरणों में अपना सिर झुकाता है, तो उसका अज्ञान और भय स्वतः समाप्त हो जाता है।

भजन के अगले चरण में साधक माँ के ममतामयी स्वरूप का वर्णन करते हुए कहता है कि माँ का हृदय करुणा और वात्सल्य का सागर है। दुनिया की ठोकरें खाने के बाद जब कोई थका-हारा भक्त माता की चौखट पर पहुँचता है, तो उसे परम शांति और अभय दान की प्राप्ति होती है। यह भजन हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन की हर परिस्थिति में अपनी माता (आदिशक्ति) पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि वही हमारे जीवन की सच्ची मार्गदर्शिका और रक्षक हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की रचना विशुद्ध रूप से भक्ति रस और समर्पण की भावना से ओत-प्रोत है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शरणागति का संदेश: यह भजन साधक को ईश्वर के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • मानसिक शांति: इसके नियमित श्रवण और गायन से मन का तनाव, भय और अवसाद दूर होता है।
  • दुर्गा सप्तशती पाठ और नवरात्रि अनुष्ठानों के दौरान इस प्रकार के भजनों का विशेष महत्व माना जाता है।
  • यह सभी आयु वर्ग के भक्तों के लिए आसानी से गाने योग्य और हृदयस्पर्शी है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन गायन के लिए कोई कठोर नियम नहीं होते, परंतु यदि इसे विधि-विधान और पवित्रता के साथ किया जाए तो इसका आध्यात्मिक फल कई गुना बढ़ जाता है:

  • उचित समय: प्रातःकाल ब्रह्म बेला में स्नान के पश्चात अथवा संध्या बेला में दीप प्रज्वलित करने के बाद इस भजन का गान अत्यंत फलदायी होता है।
  • स्थान: पूजा घर (मंदिर) में माता की ज्योति या तस्वीर के समक्ष बैठकर इसे गाना चाहिए।
  • साधन: इसे हारमोनियम, ढोलक, मंजीरे के साथ या एकांत में मानसिक रूप से भी गुनगुनाया जा सकता है।
  • नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से माता के जागरण, चौकी और संध्या आरती के समय इस भजन का संकीर्तन अनिवार्य माना जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी माता दुर्गा (आदिशक्ति भवानी) हैं। सनातन परंपरा में आदि शक्ति को त्रिगुणात्मिका (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का सम्मिलित रूप) कहा गया है। संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति, पालन और संहार उन्हीं के अधीन है। जिस प्रकार एक लौकिक माता अपने बालक की हर गलती को क्षमा कर उसकी रक्षा करती है, उसी प्रकार जगत जननी भवानी भी अपने शरणागत भक्तों के सभी संकटों का हरण करती हैं। इस भजन को पारंपरिक लोक गायकों और संतों द्वारा माँ भगवती की महिमा का गुणगान करने के लिए निरंतर गाया जाता रहा है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सहज और प्रवाहमयी हिंदी/खड़ी बोली में रचित है, जिससे यह आम जनमानस के हृदय को तुरंत स्पर्श कर लेता है। इसकी काव्य शैली गेय (Melodious) है, जिसमें अनुप्रास और तुकांत शब्दों का सुंदर प्रयोग किया गया है। शब्दों की यह सरलता ही इस भजन की सबसे बड़ी शक्ति है, क्योंकि इसके अर्थ को समझने के लिए किसी कठिन ग्रंथ या संस्कृत व्याकरण की आवश्यकता नहीं होती; यह सीधे भक्त के दिल से निकलकर माँ के दरबार तक पहुँचता है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन सीख देता है:

  1. अटूट विश्वास: जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ क्यों न आएँ, ईश्वर और माता की शक्ति पर से कभी विश्वास नहीं उठना चाहिए।
  2. अहंकार का त्याग: "मैं सब कुछ कर सकता हूँ" का अहंकार छोड़कर "सब कुछ माँ की कृपा से हो रहा है" का भाव अपनाना चाहिए।
  3. निसंकोच पुकार: संकट के समय घबराने के बजाय सच्चे मन से अपनी माँ (ईश्वर) को पुकारना चाहिए, सहायता अवश्य मिलती है।
  4. संसार के सभी रिश्ते-नाते स्वार्थ पर आधारित हो सकते हैं, परंतु माता का प्रेम निस्वार्थ और शाश्वत होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
आस आशा, उम्मीद भक्त की ईश्वर से प्राप्ति की अपेक्षा
विश्वास दृढ़ भरोसा, श्रद्धा माता की शक्ति और प्रेम पर अटूट यकीन
आधार सहारा, नींव जीवन को चलाने वाली परम शक्ति
चौखट देहरी, द्वार माता का पवित्र मंदिर या दरबार
नादान अबोध, अनजान अपनी भूलों को स्वीकार करने वाला भक्त

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मेरी आस तू विश्वास तू है माँ, मेरी सांस तू आधार तू है माँ।"
इस पंक्ति का अर्थ है कि हे माँ! इस संसार में मेरी समस्त आशाएँ और मेरा संपूर्ण विश्वास केवल आप पर ही टिका है। मेरे शरीर में चलने वाली प्रत्येक श्वास और मेरे जीवन का एकमात्र आधार आप ही हैं।

"तेरे चरणों में मेरा ठिकाना रहे, तू ही मेरी भक्ति का पैमाना रहे।"
भक्त प्रार्थना करता है कि हे माँ! मेरा मन हमेशा आपके चरणों में ही लीन रहे और मेरी भक्ति का पैमाना केवल आपकी प्रीति ही हो, संसार की मोह-माया नहीं।

"दुनिया की ठोकरों से जो घबरा गया, तेरी चौखट पे आकर वो तर गया।"
जो मनुष्य सांसारिक दुखों और प्रताड़नाओं से थककर निराश हो जाता है, वह जब आपके दरबार में आता है, तो उसका जीवन धन्य हो जाता है और उसे मुक्ति मिलती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता रानी की आराधना के दौरान निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण इस भजन के प्रभाव को और अधिक बढ़ा देता है:

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"

यह श्लोक दुर्गा सप्तशती से लिया गया है, जिसका अर्थ है कि जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं, मैं उन्हें बार-बार नमस्कार करता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मेरी आस तू विश्वास तू है माँ (Meri Aas Tu Vishwas Tu Hai)
आराध्य देवी माता दुर्गा / आदिशक्ति भवानी
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-खड़ी बोली
मुख्य थीम भक्ति, शरणागति, वात्सल्य और विश्वास
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी, संध्या आरती
भजन का भाव अनन्य प्रेम और पूर्ण आत्मसमर्पण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन जगत जननी आदिशक्ति माता दुर्गा और भवानी के विभिन्न रूपों को समर्पित है।

इस भजन को नवरात्रि, माता के जागरण, संध्या पूजा, चौकी और किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

भक्ति संगीत और संकीर्तन मन के विकारों, तनाव और चिंताओं को दूर करके अंतःकरण में सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वरीय आनंद का संचार करता है।

हाँ, आप इसे अपने घर के मंदिर में अकेले या परिवार के साथ दैनिक पूजा के समय आसानी से गा सकते हैं।

पूजा के दौरान शारीरिक और मानसिक पवित्रता, स्वच्छता, और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही सच्चे मन से माँ का स्मरण करना चाहिए।

हाँ, हारमोनियम, ढोलक, मंजीरा और झालर के साथ इस भजन को गाने से इसका आनंद और प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।

शरणागति का अर्थ है अपने अहंकार का पूर्ण त्याग करके खुद को पूरी तरह से भगवान या माता की इच्छा पर छोड़ देना और उनके चरणों में अटूट विश्वास रखना।

यह सामग्री सनातन परंपराओं, लोक भजनों और भक्ति साहित्यों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार की गई है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तलोक (Bhaktilok.in) पर प्रकाशित यह आलेख सनातन संस्कृति, देवी उपासना पद्धतियों और पारंपरिक लोक भजनों के गहन अध्ययन पर आधारित है। इसे पाठकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत करने और शुद्ध भक्ति रस प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह सामग्री पूरी तरह से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जो प्रामाणिक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन लोक भजन एवं संकीर्तन परंपरा
  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण (आदिशक्ति महिमा)
  • पारंपरिक दुर्गा स्तुति एवं भजन संग्रह
  • वैदिक एवं पौराणिक पंचांग व सांस्कृतिक संदर्भ

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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