Parvati Stotram

मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की (Mai Toh Layi Chunariya Tere Naam Ki) - Mata Rani Bhajan - Bhaktilok

121 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की" (Mai Toh Layi Chunariya Tere Naam Ki) एक अत्यंत ही पावन, भक्ति रस से परिपूर्ण और लोकप्रिय माता रानी का भजन है। यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा, माँ पार्वती और माता रानी की महिमा का गुणगान करता है। इस भजन में भक्त अपनी माता के चरणों में एक चुनरी (वस्त्र) अर्पित करने की बात करता है, जो प्रतीकात्मक रूप से भक्त की पूर्ण शरणागति, अनन्य प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। "तेरे नाम की" चुनरिया लाने का अर्थ है कि भक्त अपने जीवन के समस्त कर्म, भाव और वस्त्र माता के नाम पर समर्पित कर रहा है। यह भजन नवरात्रि, दुर्गा पूजा, और माता के विशेष पर्वों पर विशेष रूप से गाया जाता है। इसकी धुन अत्यंत मधुर और मन को शांति प्रदान करने वाली होती है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की

मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की,
मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की।
ओ माता रानी, ओ माता रानी,
मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की।।

चुनरी की कीमत क्या बताऊँ मैं,
चुनरी की कीमत क्या बताऊँ मैं,
यह तो प्रेम से बनी है,
मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की।।

तेरे दर पे जो भी आया है,
तेरे दर पे जो भी आया है,
वो कभी नहीं लौटा खाली,
मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की।।

भक्तों के संकट तू हरती,
भक्तों के संकट तू हरती,
तू है सबकी रखवाली,
मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की।।

जय जय जय माता रानी,
जय जय जय माता रानी,
तेरी महिमा सबसे न्यारी,
मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की।।

मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की,
मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की।
ओ माता रानी, ओ माता रानी,
मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव यह है कि भक्त अपनी माता के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को व्यक्त कर रहा है। "मैं तो लायी चुनरिया तेरे नाम की" का अर्थ है कि भक्त माता के लिए एक चुनरी लाया है, जो पूरी तरह से उनके नाम की है। यह चुनरी केवल एक वस्त्र नहीं है, बल्कि भक्त के प्रेम, विश्वास और शरणागति का प्रतीक है। भक्त कह रहा है कि यह चुनरी प्रेम से बनी है, इसकी कोई भौतिक कीमत नहीं है। यह भाव दर्शाता है कि ईश्वर के प्रति समर्पण भावना से बढ़कर कुछ नहीं है।

भजन में भक्त माता की महिमा का गुणगान करता है और कहता है कि जो भी भक्त माता के दर पर आया है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटा। माता अपने भक्तों के सभी संकटों को हरती हैं और उनकी रखवाली करती हैं। यह भजन भक्त और भगवान के बीच के अटूट प्रेम और विश्वास को दर्शाता है। भक्त माता को "माता रानी" कहकर संबोधित करता है, जो उनके प्रति स्नेह और आदर को दर्शाता है। इस भजन को गाते समय भक्त का मन पूर्ण रूप से माता के चरणों में लीन हो जाता है। यह भजन सिखाता है कि ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम ही मोक्ष का मार्ग है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा, माँ पार्वती और माता रानी को समर्पित है। इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और मधुरता है। इसके बोल इतने सरल हैं कि कोई भी भक्त इसे आसानी से गा सकता है। यह भजन भक्ति भावना को जागृत करने में अत्यंत प्रभावी है।

  • देवी का स्वरूप: यह भजन माता रानी के उस स्वरूप की स्तुति करता है जो भक्तों की रक्षा करने वाला और संकट हरने वाला है।
  • भक्ति का भाव: भजन में भक्त का माता के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का भाव है।
  • आध्यात्मिक लाभ: इस भजन को सुनने और गाने से मन को शांति मिलती है, भय दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह भजन भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता आ रहा है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी शुभ समय पर गाया और सुना जा सकता है, लेकिन कुछ विशेष अवसरों पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है:

  • नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों में माता की पूजा के दौरान इस भजन का विशेष महत्व है।
  • दुर्गा पूजा: बंगाल और अन्य क्षेत्रों में दुर्गा पूजा के दौरान यह भजन गाया जाता है।
  • मंगलवार और शुक्रवार: माता रानी की पूजा के लिए समर्पित दिनों में इस भजन को गाना शुभ माना जाता है।
  • दैनिक पूजा: प्रातःकाल और सायंकाल की आरती के समय इस भजन को गाया जा सकता है।

भजन गाने की विधि: सर्वप्रथम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माता की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। फिर हाथ जोड़कर भक्ति भाव से इस भजन को गाएं। भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा, माँ पार्वती और माता रानी को समर्पित है। इसमें भक्त माता रानी के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण व्यक्त करता है।

इस भजन को किसी भी शुभ समय पर गाया जा सकता है। विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा, मंगलवार और शुक्रवार को इसका गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है। प्रातःकाल और सायंकाल की आरती के समय भी इसे गाया जा सकता है।

"चुनरिया" यहाँ केवल एक वस्त्र नहीं है, बल्कि भक्त के प्रेम, विश्वास और पूर्ण शरणागति का प्रतीक है। "तेरे नाम की" चुनरिया लाने का अर्थ है कि भक्त अपना सर्वस्व माता के चरणों में समर्पित कर रहा है।

हाँ, इस भजन को श्रद्धा और विश्वास के साथ गाने और सुनने से मन को शांति मिलती है, भय दूर होता है, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भक्त को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है।

यह एक पारंपरिक लोक भजन है जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता आ रहा है। इसका कोई एक निश्चित रचयिता नहीं है, बल्कि यह जनसमुदाय की भक्ति भावना का परिणाम है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति परंपरा और लोक संस्कृति के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। इस भजन के बोल पारंपरिक रूप से प्रचलित हैं और इनका उद्देश्य भक्तों में माता रानी के प्रति श्रद्धा और भक्ति भावना जागृत करना है। हमने इस भजन के अर्थ और महत्व को सरल हिंदी में समझाने का प्रयास किया है।

संदर्भ: लोक परंपरा, भक्ति साहित्य एवं श्रीमद्भगवद्गीता के सिद्धांत।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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