"कृपा करो हम पर श्याम सुंदर" (Kripa Karo Hum Pe Shyam Sundar) एक अत्यंत ही मधुर, भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी श्याम भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध भजन गायक मिश्रा बंधु (Mishra Bandhu) ने अपने दिव्य स्वर से सजाया है। इस भजन के संगीतकार कैलाश श्रीवास्तव हैं और इसके बोल पारंपरिक भक्ति रस से ओतप्रोत हैं। सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण के 'श्याम सुंदर' रूप और कलयुग के प्रत्यक्ष देव 'श्री खाटू श्याम जी' की आराधना का विशेष महत्व है। यह भजन जीवात्मा की परमात्मा के प्रति अनन्य शरणागति, करुण पुकार और अगाध श्रद्धा को प्रदर्शित करता है। जब भक्त सांसारिक कष्टों से थककर प्रभु के चरणों में शरण लेता है, तब उसके हृदय से यही पुकार निकलती है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं का गहन विश्लेषण करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ कृपा करो हम पर श्याम सुंदर ॥
कृपा करो हम पर श्याम सुंदर,
हम तो तुम्हारे ही सहारे हैं।
तुम बिन हमारा कोई नहीं है,
हम तो तुम्हारे ही द्वारे हैं॥
भवसागर में नैया डोले,
तुम ही खिवैया पार लगाओ।
आकर हमारी बांह पकड़ लो,
हम तो तुम्हारे ही सहारे हैं॥
कृपा करो हम पर श्याम सुंदर...
दीन दयाल दया के सागर,
करुणा की एक बूंद बहा दो।
शरण पड़े की लाज बचाओ,
हम तो तुम्हारे ही द्वारे हैं॥
कृपा करो हम पर श्याम सुंदर...
मिश्र बंधु गाएं महिमा तुम्हारी,
गंगा तट पर ध्यान लगाएं।
श्याम सुंदर अब दर्शन दे दो,
हम तो तुम्हारे ही सहारे हैं॥
कृपा करो हम पर श्याम सुंदर...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन 'दैन्य भाव' और 'शरणागति रस' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें भक्त अपने आराध्य देव श्याम सुंदर (श्रीकृष्ण) से प्रार्थना कर रहा है कि हे प्रभु! इस असार संसार में आपके अतिरिक्त मेरा कोई रक्षक नहीं है। मैं सांसारिक मोह-माया और कष्टों से व्याकुल होकर आपके द्वार पर आया हूँ। मेरी इस जीवन-रूपी नैया को इस भवसागर से पार लगाने वाले केवल आप ही हैं।
भजन का मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण रूप से ईश्वर के चरणों में समर्पित हो जाता है, तब भगवान उसकी बांह पकड़ लेते हैं। 'श्याम सुंदर' का अर्थ है वह जो सांवला होते हुए भी अत्यंत सुंदर और आकर्षक है, जो अपने भक्तों के दुखों को हरने वाला है। इस भजन को गाते समय भक्त के मन में यह अटूट विश्वास जाग्रत होता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, प्रभु की कृपा से सब कुछ संभव है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से विशिष्ट बनाती हैं:
- शरणागति की पराकाष्ठा: भजन की प्रत्येक पंक्ति में भक्त का समर्पण झलकता है। वह स्वीकार करता है कि प्रभु के बिना उसका कोई अस्तित्व नहीं है।
- मिश्रा बंधुओं का दिव्य स्वर: पंडित विष्णु देव मिश्रा (गंगा भक्त) और उनके सहयोगी मिश्रा बंधुओं ने इस भजन को शास्त्रीय और सुगम संगीत के सुंदर मिश्रण के साथ गाया है, जो सीधे हृदय को छूता है।
- कल्याणकारी ध्वनि: इस भजन के श्रवण और कीर्तन से मन को असीम शांति मिलती है और मानसिक तनाव दूर होता है।
- भक्ति आंदोलन का प्रभाव: यह भजन मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के संतों की परंपरा को जीवंत करता है, जहां ईश्वर से सीधा और आत्मीय संबंध स्थापित किया जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए हर समय शुभ है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:
- संध्या काल (Evening Prayer): संध्या आरती के समय इस भजन को गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat): श्री खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन इस भजन का कीर्तन करने से प्रभु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- सत्संग और संकीर्तन: सामूहिक रूप से ताली बजाकर और भावविभोर होकर गाने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
- ध्यान की अवस्था: शांत चित्त होकर, आंखें बंद करके प्रभु श्याम सुंदर की छवि का ध्यान करते हुए इसे सुनना मानसिक शांति प्रदान करता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के 'श्याम सुंदर' स्वरूप और कलयुग के अवतारी देव 'श्री खाटू श्याम जी' को समर्पित है। खाटू श्याम जी को महाभारत काल के वीर बर्बरीक का अवतार माना जाता है, जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण ने वरदान दिया था कि वे कलयुग में उनके नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे।
इसके साथ ही, इस भजन के गायक पंडित विष्णु देव मिश्रा जी एक परम गंगा भक्त हैं। उनके भजनों में मां गंगा की पवित्रता और श्याम सुंदर की भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यह भजन वैष्णव संप्रदाय की मधुर उपासना पद्धति को दर्शाता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन की रचना पारंपरिक लोक-भक्ति शैली में की गई है। इसके बोल सदियों से चले आ रहे पारंपरिक गीतों से प्रेरित हैं, जिन्हें आधुनिक समय में मिश्रा बंधुओं ने पुनर्जीवित किया है। कैलाश श्रीवास्तव के संगीत निर्देशन ने इसमें एक शास्त्रीय गरिमा और सुगमता का समावेश किया है। यह भजन 'अम्बे' (Ambey) लेबल और 'वियानेट मीडिया' (Vianet Media) के बैनर तले जारी किया गया है, जो धार्मिक संगीत के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट है। इसकी काव्य शैली 'प्रार्थना गीत' या 'विनय के पद' जैसी है। इसमें निम्नलिखित अलंकारों और प्रतीकों का सुंदर प्रयोग किया गया है:
- भवसागर (Metaphor): संसार को एक विशाल और कठिन महासागर के रूप में दर्शाया गया है।
- नैया (Symbol): मानव जीवन को एक नाव के रूप में कल्पित किया गया है जो कर्मों के थपेड़ों से डोल रही है।
- खिवैया (Protector): भगवान को उस मल्लाह या नाविक के रूप में दर्शाया गया है जो डूबती नैया को पार लगाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि इसमें जीवन के गूढ़ रहस्य और व्यावहारिक सीख छिपी हुई है:
- अहंकार का त्याग: जब भक्त कहता है "हम तो तुम्हारे ही सहारे हैं", तो वह अपने कर्तापन के अहंकार को त्याग देता है।
- धैर्य और विश्वास: जीवन के संकटों (भवसागर की डोलती नैया) में घबराने के बजाय ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने की प्रेरणा मिलती है।
- करुणा का महत्व: ईश्वर को 'दया का सागर' कहकर यह संदेश दिया गया है कि हमें भी अपने जीवन में दूसरों के प्रति दयालु और करुणामयी होना चाहिए।
- निस्वार्थ समर्पण: बिना किसी सांसारिक लालसा के केवल प्रभु के दर्शन और कृपा की कामना करना ही सच्ची भक्ति है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| श्याम सुंदर | सांवले और अत्यंत सुंदर श्रीकृष्ण | परम ब्रह्म का सगुण और मनमोहक रूप |
| भवसागर | संसार रूपी सागर | जन्म और मृत्यु का चक्र, सांसारिक कष्ट |
| खिवैया | नाव चलाने वाला (नाविक) | जीवन को सही दिशा देने वाले भगवान |
| दीन दयाल | गरीबों और असहायों पर दया करने वाले | ईश्वर का वह रूप जो दीन-दुखियों की पुकार सुनता है |
| लाज बचाओ | सम्मान की रक्षा करना | भक्त की श्रद्धा और विश्वास की रक्षा करना |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
पंक्ति: "कृपा करो हम पर श्याम सुंदर, हम तो तुम्हारे ही सहारे हैं।"
भावार्थ: हे मनमोहक श्याम सुंदर! हम पर अपनी अहैतुकी कृपा दृष्टि बनाए रखिए। इस संसार में हमारा अपना कोई बल या सामर्थ्य नहीं है, हम पूर्ण रूप से आपके ही सहारे जी रहे हैं।
पंक्ति: "तुम बिन हमारा कोई नहीं है, हम तो तुम्हारे ही द्वारे हैं॥"
भावार्थ: आपके अतिरिक्त इस चराचर जगत में हमारा कोई सच्चा हितैषी या रक्षक नहीं है। इसलिए हम सब कुछ छोड़कर आपके पावन द्वार पर आकर बैठ गए हैं।
पंक्ति: "भवसागर में नैया डोले, तुम ही खिवैया पार लगाओ।"
भावार्थ: इस संसार रूपी कठिन सागर में हमारी जीवन रूपी नैया डगमगा रही है, वासनाओं और दुखों की लहरें इसे डुबाना चाहती हैं। हे प्रभु! आप ही इसके कुशल नाविक बनकर इसे सुरक्षित किनारे पर ले जाइए।
पंक्ति: "आकर हमारी बांह पकड़ लो, हम तो तुम्हारे ही सहारे हैं॥"
भावार्थ: हे दयालु! अब विलंब न कीजिए, आगे बढ़कर हमारा हाथ थाम लीजिए ताकि हम इस मायावी जगत में भटकने से बच सकें।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के भाव को और अधिक प्रगाढ़ करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक अत्यंत प्रासंगिक है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को पूर्ण शरणागति का उपदेश देते हैं:
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुचः॥
(श्रीमद्भगवद्गीता - 18.66)
अर्थ: सभी धर्मों (कर्तव्यों और आश्रयों) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा, शोक मत करो। यही इस भजन का भी मूल संदेश है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण क्षेत्र | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | कृपा करो हम पर श्याम सुंदर (Kripa Karo Hum Pe Shyam Sundar) |
| मुख्य गायक | मिश्रा बंधु (Mishra Bandhu) - पंडित विष्णु देव मिश्रा |
| संगीतकार | कैलाश श्रीवास्तव (Kailash Shrivastav) |
| गीतकार | पारंपरिक (Traditional) |
| प्रकाशक / लेबल | Ambey / Vianet Media Private Limited |
| मुख्य आराध्य देव | भगवान श्रीकृष्ण / श्री खाटू श्याम जी |
| भक्ति का भाव | दैन्य भाव, शरणागति, माधुर्य भाव |
| उपयुक्त अवसर | एकादशी, श्याम संकीर्तन, संध्या आरती, दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "कृपा करो हम पर श्याम सुंदर (Kripa Karo Hum Pe Shyam Sundar) - Mishra Bandhu New Shyam Bhajan - Bhaktilok" के आध्यात्मिक, साहित्यिक और संगीतमय पहलुओं का एक विस्तृत और प्रामाणिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस भजन के माध्यम से कलयुग में नाम संकीर्तन की महिमा को दर्शाया गया है। हमारी संपादकीय टीम ने इस सामग्री को पारंपरिक स्रोतों, वैष्णव दर्शन और प्रामाणिक संगीत विवरणों के आधार पर तैयार किया है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री - संदर्भ एवं व्याख्या सहित सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 18, श्लोक 66 - शरणागति योग)
- श्री खाटू श्याम जी महात्म्य एवं पौराणिक कथाएं
- पारंपरिक वैष्णव भजन संग्रह एवं संकीर्तन पद्धति
- अम्बे / वियानेट मीडिया आधिकारिक संगीत विवरण
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