Parvati Stotram

किसने सजाया तुमको मैया (Kisne Sajaya Tumko Maiya) - Riya soni Jagran - Bhaktilok

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कंट्रास्ट:
भजन / भक्ति गीत

किसने सजाया तुमको मैया (Kisne Sajaya Tumko Maiya) - Riya Soni Jagran - Bhaktilok

सनातन धर्म की पावन और समृद्ध परंपरा में माता रानी (जगदंबा, आदिशक्ति माँ दुर्गा) के जागरण, चौकी और संकीर्तन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। रात्री के समय माँ के दरबार में जब भक्त सुमधुर भजनों के माध्यम से अपनी हाजिरी लगाते हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो जाता है। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय, कर्णप्रिय और भावपूर्ण भजन है "किसने सजाया तुमको मैया (Kisne Sajaya Tumko Maiya)" जिसे प्रसिद्ध गायिका रिया सोनी (Riya Soni) ने अपने अनूठे और मधुर स्वर से सजाया है। इस भजन का मुख्य भाव माँ भगवती के अलौकिक सौंदर्य, दिव्य श्रृंगार और उनके प्रति एक भक्त के अनन्य प्रेम, विस्मय और समर्पण को प्रकट करता है। जब भक्त माता के भव्य स्वरूप को देखता है, तो उसके मन में स्वतः यह प्रश्न उठता है कि इस त्रिभुवन की स्वामिनी को इतनी सुंदरता से किसने सजाया है। यह भजन साधक की अंतरात्मा की वह पुकार है जो दृश्यमान रूप से परे जाकर अदृश्य परम शक्ति के चरणों में विलीन हो जाना चाहती है।

श्रेणियां: Krishna Stotram, Most Common Aarti, Parvati Stotram • प्रकाशन: सितंबर 2022

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूलाधार एवं मुखड़ा:

किसने सजाया तुमको मैया, ओ मेरी शेरोंवाली,
रुप तुम्हारा देख के मैया, दुनिया गई है हारा।
लाल चुनरिया सोने का गोटा, बिंदिया चमके न्यारी,
चरणों में तेरे झुकती दुनिया, हे महतारी॥

अंतरा 1:

माता के दरबार में जबत प्रकाश है फैला,
भक्तों का है लगा यहाँ पर प्यारा सा मेला।
कोई लाए नारियल कोई लाए चुनर प्यारी,
दर्शन पाकर धन्य हुई ये जीवन की फुलवारी॥
किसने सजाया तुमको मैया...ओ मेरी शेरोंवाली...

अंतरा 2:

सिंह सवारी करके मैया भवन पधारो,
दीन दुखियों के संकट सारे पल में हरो।
रिया सोनी गाये भजन महिमा गाए तेरी,
चरणों की धूल से मैया संवारो तकदीर मेरी॥
किसने सजाया तुमको मैया...ओ मेरी शेरोंवाली...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"किसने सजाया तुमको मैया" भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक भक्त की जिज्ञासा और माँ के प्रति उसकी अगाध भक्ति का जीवंत दस्तावेज है। जब कोई साधक या गायिका रिया सोनी जैसी कलाकार इसे जागरण के पावन मंच पर गाती हैं, तो श्रोता सुधि-बुधि खोकर माँ के रूप में तल्लीन हो जाते हैं।

भजन की पहली पंक्ति "किसने सजाया तुमको मैया, ओ मेरी शेरोंवाली" में एक सहज विस्मय है। भक्त यह सोचकर चकित है कि जिसकी आभा से सूर्य और चंद्रमा प्रकाशमान हैं, उस जगदंबिका को किसने इतने सुंदर वस्त्रों, आभूषणों और लाल चुनरी से श्रृंगारित किया है। वास्तव में, यह श्रृंगार किसी मनुष्य का किया हुआ नहीं, बल्कि प्रकृति और भक्तों के प्रेम का समवेत प्रतिरूप है।

आगे की पंक्तियों में जागरण की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई है जहाँ ढोलक की थाप, कीबोर्ड की धुनों (राजेंद्र रंजन द्वारा वादित) और आर.यू.एस. बैंड के संगीत के बीच पूरा पंडाल माँ के जयकारों से गूंज उठता है। भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार नारियल, चुनरी और पुष्प लेकर आते हैं और माँ के चरणों में समर्पित होकर अपने जीवन को धन्य मानते हैं। अंत में गायिका अपने नाम का स्मरण करते हुए माँ से प्रार्थना करती है कि हे जगदंबे! मेरी टूटी-फूटी वाणी और सेवा को स्वीकार करो और मेरे जीवन की नैया को पार लगाओ।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • देवी स्वरूप का बखान: यह भजन आदिशक्ति माँ दुर्गा के सिंहवाहिनी स्वरूप और उनके भव्य श्रृंगार का अत्यंत मनमोहक वर्णन करता है।
  • जागरण संस्कृति: माता के जागरण और चौकी की पारंपरिक संस्कृति को यह जीवंत रूप प्रदान करता है, जिससे नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है।
  • संगीत संयोजन: आर.यू.एस. बैंड की धुन, राजीव रंजन का कीबोर्ड वादन और श्रवण कुमार की ढोलक की थाप इस भजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।
  • भक्ति का भाव: यह भजन अहंकार को त्यागकर माँ के चरणों में पूर्ण शरणागति (Surrender) का संदेश देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

माता के भजनों को सुनने और गाने के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं होती, किंतु कुछ विशेष अवसरों पर इनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

  • नवरात्र पर्व: शारदीय और चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में सुबह और संध्या कालीन आरती के समय इस भजन का श्रवण अत्यंत फलदायी होता है।
  • माता का जागरण / चौकी: रात्रि कालीन जागरण में जब माहौल पूरी तरह भक्तिमय होता है, तब इस भजन को गाने से वातावरण में ऊर्जा का संचार होता है।
  • घरेलू पूजा: शुक्रवार के दिन माता वैभव लक्ष्मी या माँ दुर्गा के पूजन के उपरांत इसे शांत मन से गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस पावन भजन की आराध्य देवी माँ दुर्गा (शेरोंवाली जगदंबा) हैं। सनातन परंपरा में इन्हें आदि शक्ति, महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का संयुक्त स्वरूप माना गया है। जगत के पालन और दुष्टों के संहार के लिए वे समय-समय पर विभिन्न रूपों में प्रकट होती हैं। इस भजन के माध्यम से गायिका रिया सोनी ने उन्हीं करुणामयी माँ के स्वरूप का संकीर्तन किया है। सनातन धर्म में संकीर्तन को कलियुग में ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल और सुगम मार्ग बताया गया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"किसने सजाया तुमको मैया" भजन आधुनिक भक्ति संगीत परंपरा की एक बेहतरीन प्रस्तुति है, जिसे सारेगामा म्यूजिक सेंटर (Saregama Music Center) के बैनर तले प्रस्तुत किया गया है। इस भजन को स्वरबद्ध किया है लोकप्रिय गायिका रिया सोनी ने। इसके संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी R.U.S. Band ने संभाली, जबकि कीबोर्ड पर राजीव रंजन और ढोलक पर श्रवण कुमार ने अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया। मंच संचालन (Anchoring) रूपेश चंचल द्वारा किया गया, जिसने पूरे जागरण के दौरान दर्शकों और भक्तों को माँ की भक्ति से जोड़े रखा।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सहज और आम जनमानस की समझ में आने वाली हिंदी भाषा (खड़ी बोली मिश्रित ब्रज-अवधि प्रभाव) में रचित है। इसमें रूपक अलंकार और उपमा का सुंदर प्रयोग किया गया है। शब्दों की मिठास और संगीतात्मकता ऐसी है कि बच्चा-बच्चा और वृद्धजन इसे आसानी से गुनगुना सकते हैं। काव्य शैली में विस्मय (Wonder) और भक्ति (Bhakti Rasa) का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  1. बाह्य श्रृंगार से आंतरिक पवित्रता: जिस प्रकार माँ को सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है, उसी प्रकार मनुष्य को अपने भीतर सद्गुणों और सत्कर्मों का आभूषण धारण करना चाहिए।
  2. शरणागति का भाव: जीवन की कठिनाइयों के बीच अपनी रक्षा के लिए पूर्ण रूप से परम शक्ति पर भरोसा रखना ही सच्ची भक्ति है।
  3. सामूहिक संकीर्तन की शक्ति: मिलकर भगवान का यश गाने से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता की भावना जागृत होती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
मैया माता / जगदंबा आदि शक्ति माँ दुर्गा के लिए प्रेमसूचक संबोधन
शेरोंवाली सिंह पर सवारी करने वाली माँ दुर्गा का प्रसिद्ध पौराणिक स्वरूप
लाल चुनरिया लाल रंग का वस्त्र / ओढ़नी देवी को अर्पित किया जाने वाला पवित्र वस्त्र
महतारी माता / जननी वात्सल्य और करुणा की प्रतीक
संकट कष्ट / बाधा भक्तों के जीवन के दुख

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"किसने सजाया तुमको मैया, ओ मेरी शेरोंवाली" — इस पंक्ति में भक्त अपनी आराध्य माँ के दिव्य सौंदर्य को देखकर अभिभूत है। वह पूछता है कि हे सिंहवाहिनी! तुम्हारे इस अलौकिक रूप को किसने संवारा है?

"लाल चुनरिया सोने का गोटा, बिंदिया चमके न्यारी" — माँ के श्रृंगार का सजीव चित्रण करते हुए कहा गया है कि उनके मस्तक पर चमकती हुई बिंदिया और ओढ़ी हुई लाल सुनहरी चुनरी उनके स्वरूप को अत्यंत प्रदीप्त कर रही है।

"चरणों में तेरे झुकती दुनिया, हे महतारी" — संसार के बड़े-बड़े राजा-महाराज और ज्ञानीजन भी जब माँ के चरणों में नतमस्तक होते हैं, तो उनका अहंकार स्वतः समाप्त हो जाता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: जो देवी समस्त जीवों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं, उनको बार-बार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम किसने सजाया तुमको मैया (Kisne Sajaya Tumko Maiya)
गायिका रिया सोनी (Riya Soni)
संगीत संयोजन R.U.S. Band
कीबोर्ड वादक राजीव रंजन (Rajeev Ranjan)
ढोलक वादक श्रवण कुमार (Shrawan Kumar)
मंच संचालन रूपेश चंचल (Rupesh Chanchal)
प्रस्तुतकर्ता सारेगामा म्यूजिक सेंटर (Saregama Music Center)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
मुख्य विषय माँ दुर्गा भक्ति और श्रृंगार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन की मुख्य गायिका रिया सोनी (Riya Soni) हैं, जिन्होंने इसे अपनी मधुर आवाज से जागरण के मंच पर जीवंत किया है।

यह भजन माता के जागरण, चौकी, नवरात्र उत्सव और संकीर्तन कार्यक्रमों में मुख्य रूप से गाया और सुना जाता है।

इस भजन में R.U.S. Band ने संगीत दिया है, जिसमें कीबोर्ड वादक राजीव रंजन और ढोलक वादक श्रवण कुमार हैं।

इस भजन का केंद्रीय भाव माँ दुर्गा के अलौकिक श्रृंगार के प्रति विस्मय और उनके चरणों में अनन्य भक्ति एवं समर्पण है।

हाँ, इस भजन को दैनिक पूजा के समय या मन की शांति के लिए व्यक्तिगत रूप से भी श्रद्धापूर्वक गाया जा सकता है।

संकीर्तन से मन की चंचलता शांत होती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और ईश्वर के प्रति प्रेम एवं विश्वास दृढ़ होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तियों और लोक परंपराओं से जुड़ी यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य सनातन संस्कृति, माता के जागरण की लोक-गायन परंपरा और भक्ति साहित्य को पाठकों तक प्रामाणिक रूप से पहुँचाना है। सभी विवरण पारंपरिक मंच प्रस्तुतियों और उपलब्ध श्रव्य-दृश्य संदर्भों पर आधारित हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन भक्ति साहित्य एवं लोकगीत परंपरा संग्रह
  • सारेगामा म्यूजिक सेंटर जागरण प्रस्तुति अभिलेखागार
  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण (माँ दुर्गा स्तुति संदर्भ)

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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