Parvati Stotram

गिरजा के लाड़ले दुलारे (Girja Ke Ladle Dulare) - Vijay Sahu Divya Bhajan Ganesh Bhajan - Bhaktilok

127 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान श्री गणेश जी की स्तुति में गाया जाने वाला "गिरजा के लाड़ले दुलारे" एक अत्यंत भावपूर्ण और मन को मोह लेने वाला भजन है। विजय साहू द्वारा स्वरबद्ध यह रचना माता पार्वती (गिरजा) के पुत्र गणेश जी के प्रति अनन्य प्रेम और श्रद्धा को समर्पित है। भारतीय भक्ति परंपरा में गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' और 'प्रथम पूज्य' माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, अनुष्ठान या भजन संध्या का आरंभ गणेश वंदना के बिना अधूरा माना जाता है। यह भजन न केवल गणेश जी के स्वरूप का वर्णन करता है, बल्कि भक्त के हृदय में उनके प्रति वात्सल्य और भक्ति का भाव जागृत करता है। इस भजन का श्रवण और गायन मन को शांति, बुद्धि को प्रखरता और जीवन के समस्त कष्टों को दूर करने वाला माना गया है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

गिरजा के लाड़ले दुलारे,
गौरी के नयन के तारे।
विघ्नहर्ता तुम हो देवा,
करते सब तेरी सेवा।

गजमुख सोहे, मस्तक सोहे,
देख छवि मन मेरा मोहे।
मूषक वाहन पर तुम विराजे,
रिद्धि-सिद्धि संग में साजे।

प्रथम पूज्य तुम जग में कहलाए,
जो भी ध्यावे फल वो पाए।
संकट मोचन नाम तुम्हारा,
भक्तों का तुम हो सहारा।

गिरजा के लाड़ले दुलारे,
गौरी के नयन के तारे।
विजय कहे प्रभु कृपा करो,
जीवन के सब कष्ट हरो।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में भक्त भगवान गणेश को 'गिरजा के लाड़ले' कहकर संबोधित करता है। 'गिरजा' माता पार्वती का नाम है, जो हिमालय की पुत्री हैं। गणेश जी माता पार्वती के हृदय के अत्यंत निकट हैं, इसीलिए उन्हें 'नयन के तारे' कहा गया है। भजन में गणेश जी के गजमुख (हाथी के समान मुख) और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन है, जो भक्तों के मन को मोह लेता है।

भजन का मुख्य भाव यह है कि गणेश जी समस्त विघ्नों को हरने वाले हैं। जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक उनकी शरण में आता है, उसके जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं। 'प्रथम पूज्य' होने के कारण, किसी भी कार्य की शुरुआत में उनका स्मरण करना अनिवार्य है। रिद्धि और सिद्धि, जो गणेश जी की पत्नियां हैं, उनके साथ होने का अर्थ है कि गणेश जी की कृपा से भक्त को ज्ञान, धन और सफलता की प्राप्ति होती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • विघ्न विनाशक: यह भजन विशेष रूप से बाधाओं को दूर करने के लिए गाया जाता है।
  • वात्सल्य भाव: इसमें गणेश जी को एक बालक के रूप में 'लाड़ले' कहकर संबोधित किया गया है, जो भक्त और भगवान के बीच के प्रेम को दर्शाता है।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह भजन गणेश चतुर्थी और किसी भी मांगलिक कार्य के प्रारंभ में अत्यंत लोकप्रिय है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को प्रतिदिन प्रातःकाल पूजा के समय या किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में गाया जा सकता है। इसे गाते समय मन में गणेश जी के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। यदि संभव हो, तो धूप, दीप और पुष्प अर्पित कर गणेश जी की आरती के साथ इस भजन का गायन करना विशेष फलदायी होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
गिरजा माता पार्वती हिमालय की पुत्री
गजमुख हाथी के मुख वाले गणेश जी का स्वरूप
विघ्नहर्ता बाधाओं को हरने वाले गणेश जी का नाम
मूषक वाहन चूहे की सवारी गणेश जी का वाहन

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम गिरजा के लाड़ले दुलारे
गायक विजय साहू
देवता भगवान श्री गणेश
भाषा हिंदी
भाव भक्ति एवं वात्सल्य

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने गणेश जी को यह वरदान दिया था कि किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा की जाएगी।

इसे गणेश चतुर्थी, किसी भी नए कार्य की शुरुआत, या दैनिक पूजा में गाया जा सकता है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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