Parvati Stotram

धरती गगन में होती है तेरी जय जयकार (Dharti Gagan Mey Hoti h Teri Jay Jaykar Lyrics in Hindi) - Mata Bhajan - Bhaktilok

56 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

माँ का भक्ति गीत: जय जयकार का जाप

इस भजन के माध्यम से माँ की जय जयकार करते हुए अंतर में भक्ति का अनुभव करें।

धरती गगन में होती है तेरी जय जयकार। तेरे नाम का जप हर जगह बसी है प्यार।। हे माता, तेरी माया निराली। सब दुख हरता, है तेरा मोल का निराला।। कृष्ण की लीलाएँ, राम का नाम ले। तुझसे ही सब वसंतों का आना।। तेरे चरणों में जiya, तेरा ही हो ताज। धन्य मिट्टी, तेरे ही भजन का है राज।। जय जय माँ, जय जय माँ। तेरी कृपा से है सबका जीवन साकार।। धरती गगन में होती है तेरी जय जयकार। तेरे नाम का जप हर जगह बसी है प्यार।।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माता की महिमा का गहराई से वर्णन किया गया है। 'धरती गगन में होती है तेरी जय जयकार' इस पंक्ति में यह स्पष्ट किया गया है कि माँ की भक्तिभावना केवल एक जगह तक सीमित नहीं है; यह धरती से लेकर आसमान तक फैली हुई है। 'तेरे नाम का जप हर जगह बसी है प्यार' इस बात का संकेत देता है कि जब भक्त सच्चे मन से माँ का नाम लेते हैं, तो उनके जीवन में प्रेम और शांति का संचार होता है। भजन में यह भी कहा गया है कि माँ की माया अद्भुत है, जो सभी दुखों को हरती है। इस प्रकार, यह भजन हमें माँ की अनन्त कृपा और उसके प्रति लगाव को समझाने का प्रयास करता है।

इस भजन के भावार्थ में प्रेम और भक्ति का अद्भुत मेल है। 'तेरे चरणों में जिया, तेरा ही हो ताज' से निश्चित किया जाता है कि यह भक्ति की चरम अवस्था है, जहां भक्त अपनी आत्मा को माँ के चरणों में अर्पित कर देता है। यह एहसास कि माँ का नाम ही जीवन का आधार है, भक्त को मानसिक और भावनात्मक संतोष प्रदान करता है। भजन की मधुर्बाषा भक्त के हृदय में माँ के प्रति एक गहरी भावना को जागृत करती है और यह एहसास कराती है कि माँ की कृपा से ही सब कुछ संभव है।

थियोलॉजिकल दृष्टिकोण से, यह भजन 'भक्ति मार्ग' को दर्शाता है, जिसमें भक्त एकाग्रता और समर्पण के साथ माँ का ध्यान करता है। 'कृष्ण की लीलाएँ, राम का नाम ले' से यह स्पष्ट होता है कि माता की भक्ति सभी देवाओं के समकक्ष है। भारतीय धार्मिक ग्रंथों में, देवी की पूजा और उसकी भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। भजन में माँ की महिमा और उनकी कृपा का बखान करते हुए भक्त को इस मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया गया है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में माँ की उपासना के महत्व को दर्शाता है। पुराणों में माता की पूजा का अनंत महत्व बताया गया है, जहाँ भक्त अपनी सारी इच्छाओं और दुखों को माँ के चरणों में अर्पित करते हैं। यह भजन संतों और ऋषियों द्वारा गाई गई देवी की महिमा के संदर्भ को पुनः जीवंत करता है। रामायण और महाभारत में भी मातृत्व का सर्वोच्च स्थान है, जहां माँ का आशीर्वाद देवी-देवताओं के समान महत्वपूर्ण माना जाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। यह भक्त को आत्मनिर्भरता, साहस, और संतोष का अनुभव कराने में सहायक होता है। नियमित रूप से इस भजन का गान करने से मानसिक शक्तियों में वृद्धि होती है और भक्त मातृभावना को अपने जीवन में अधिक गहराई से समझ सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना उत्तम माना जाता है। भक्ति के समय एक दीया जलाना, फूलों या नैवेद्य का भोग लगाना और श्रद्धा पूर्वक ध्यान करना अनिवार्य है। इस दौरान भक्त को एक सुखद और शांत मुद्रा में बैठकर 'जय माता Di' कहकर भजन का उच्चारण करना चाहिए ताकि भक्ति की भावना प्रगाढ़ हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का महत्व क्या है?

यह भजन मातृशक्ति की महिमा का बखान करता है, जिसमें माँ के प्रति समर्पण और भक्ति का संदेश निहित है। यह भक्तों को जीवन में मार्गदर्शन और संतोष प्रदान करता है।

किस समय इस भजन का जाप करना चाहिए?

सुबह या शाम के समय इस भजन का जाप करना सर्वश्रेष्ठ रहता है। सही समय पर भजन के जाप से मन और मस्तिष्क को शांति मिलती है।

क्या उपासना के समय कुछ विशेष करना चाहिए?

उपासना के समय एक दीया जलाना और फूल या फल का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इससे भक्त का मन एकाग्र होता है और अध्यात्मिक अनुभूति बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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