Parvati Stotram

हो लाल मेरी पत रखियो बला - दमादम मस्त कलन्दर (O Lal Meri Pat Rakhiyo Bala Duma Dum Mast Kalandar Lyrics in Hindi)

349 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्री दमा दम मस्त कलन्दर: भक्ति का अद्भुत गीत

इस भक्ति गीत के माध्यम से हम अपने ईश्वर से सुरक्षा और आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।

हो लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालणओ लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालणसिंदड़ी दा सेवण दासखी शाह बाज़ कलन्दरदमादम मस्त कलन्दरअली दम दम दे अन्दरदमादम मस्त कलन्दरअली दा पैला नम्बर॥ हो लाल मेरी पत रखियो बला....॥चार चराग़ तेरे बरण हमेशा॥ चार चराग़ तेरे....॥पंजवा मैं बारण आई बला झूले लालणहो पंजवा मैंपंजवा मैं बारण आई बला झूले लालण॥ सिंदड़ी दा सेवण दा....॥॥ हो लाल मेरी पत रखियो बला....॥हिंद सिंद पीरा तेरी नौबत बाजे॥ हिंद सिंद पीरा तेरी....॥नाल बजे घड़ियाल बला झूले लालणहो नाल बजेनाल बजे घड़ियाल बला झूले लालण॥ सिंदड़ी दा सेवण दा....॥॥ हो लाल मेरी पत रखियो बला....॥ओ होहर दम पीरा तेरी ख़ैर होवे॥ हर दम पीरा तेरी....॥नाम-ए-अली बेड़ा पार लगा झूले लालणहो नाम-ए-अलीनाम-ए-अली बेड़ा पार लगा झूले लालण॥ सिंदड़ी दा सेवण दा....॥हो लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालणओ लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालणसिंदड़ी दा सेवण दासखी शाह बाज़ कलन्दरदमादम मस्त कलन्दरअली दम दम दे अन्दरदमादम मस्त कलन्दरअली दा पैला नम्बर
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय अपने प्रियतम के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति का भाव है। 'हो लाल मेरी पत रखियो बला' की पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि भक्त अपने प्रियतम (जो कि संभवतः एक आध्यात्मिक गुरु या अवतार हैं) से अपने जीवन की रक्षा की प्रार्थना कर रहा है। यहाँ 'लाल' का अर्थ है 'प्रिय,' जो एक गहरी भक्ति और प्रेम का प्रतीक है। भक्त यह प्रकट करता है कि उसके जीवन में आलंबन, सुख और सुरक्षा के लिए उसका प्रियतम बहुत आवश्यक है, इसीलिए वह उनके प्रति अपनी पूरी भक्ति अर्पित करता है। 'दमादम मस्त कलन्दर' इस भजन के माध्यम से अल्लाह और अपने गुरु की महिमा का गुणगान करता है और इस माध्यम से हमे यह सिखाया जाता है कि साधनाएँ स्वयं के भीतर की श्रेष्ठता को पहचानना हैं।

इस भजन का भावार्थ भक्त के आंतरिक मनोविज्ञान को उजागर करता है। भक्त अपने ईश्वर से सुरक्षा की प्रार्थना कर रहा है, जिसे 'झूले लालण' द्वारा व्यक्त किया गया है। यहाँ 'झूले' का प्रयोग भक्त की श्रद्धा को दर्शाता है, वहीं 'लालण' से तात्पर्य है कि भक्त अपने प्रियतम से एक बंधन बनाना चाहता है। यह गहरी भावना भक्त को त्रासदी से मुक्त करने का आश्वासन देती है और उन्हें प्रेरित करती है कि यह परमात्मा केवल उनकी रक्षा नहीं करेगी, बल्कि उन्हें अपने प्रेम का अनुभव भी कराएगी। इस भजन का प्रत्येक बोल भक्त की अंदरूनी इच्छाओं, आशाओं और भयों का प्रतिक है, जो की प्रेम और विश्वास के माध्यम से समाप्त होते हैं।

इस भजन की धार्मिक एवं दार्शनिक दृष्टि से यह स्पष्ट है कि यह भक्तिमार्ग का गहन अनुभव दर्शाता है। कविता में बार-बार 'अली' का उल्लेख करना और उनके नाम को श्रेय देना यह दर्शाता है कि भक्त अपने गुरु के प्रति कितने समर्पित हैं। यहाँ अली का नाम मन में एक शक्ति का संचार करता है और भक्त को ध्यान में लाने की प्रेरणा देता है। यह भजन संकीर्तनों का एक अद्वितीय माध्यम है, जिसमें भक्ति, सेवा, और प्रेम का संपूर्ण समावेश है। यह भक्त को उसके सर्वश्रेष्ठ स्वरुप की पहचान कराता है और उसकी आत्मा को ऊँचाई पर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संदर्भ सूफी परंपरा में गहराई से जुड़ा हुआ है, जहाँ भक्ति और प्रेम दोनों का प्रमुख स्थान है। 'दमादम मस्त कलन्दर' दरवेशों और सूफियों की जीवनशैली को अभिव्यक्त करता है, जहाँ खुदा का नाम विभिन्न रूपों में लिया जाता है। इस भजन में न केवल आस्था का उल्लेख है, बल्कि यह हमें सिखाता है कि आदर्श भक्ति के माध्यम से हम परमात्मा के नज़दीक पहुँच सकते हैं। इस कड़ी में सूफी संत शाह बाज कलन्दर का स्थान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिन्होंने अपनी शिक्षाओं के माध्यम से प्रेम, भक्ति, और आध्यात्मिकता के जूनून को संप्रेषित किया।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का गान मानसिक शांति और संतुलन लाने में सहायक है। धार्मिक प्रथा के माध्यम से भक्तों को भक्ति और प्रेम का अनुभव होता है, जो कि जीवन भर के लिए सुकून और संतोष देता है। नियमित रूप से इस भजन के गान से मन की चंचलता कम होती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में इजाफा होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गान सुबह या श्रावण मास के दौरान किया जाना अधिक लाभदायक होता है। भक्तों को चाहिए कि वे एक रोशनी का दीपक जलाएँ और अपने हृदय को शुद्ध रखें। अनुशासन और शांत मन के साथ गान करें, ताकि भक्ति की शक्ति का अनुभव हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का उद्देश्य भक्त की इच्छा और ईश्वर की सुरक्षा के प्रति समर्पण को व्यक्त करना है। यह भक्तिमार्ग को स्पष्ट करता है।

किस प्रकार इस भजन का प्रभाव जीवन पर पड़ता है?

इस भजन का प्रभाव भक्त के मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को बनाने में मदद करता है, जिससे जीवन में शांति और संतोष आता है।

क्या इस भजन को सुनने का कोई विशेष समय है?

इस भजन को सुबह या शांत परिवेश में गाना या सुनना अधिक उपयुक्त होता है, जिससे भक्त का मन शांति की ओर अग्रसर होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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