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श्री शिव आरती लिरिक्स हिंदी (Shri Shiv Aarti Lyrics in Hindi)

86 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

शिव की आरती: जागतिक शांति का स्रोत

श्री शिव की आरती गाकर भक्ति के मार्ग पर चलकर पुण्यता प्राप्त करें।

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा, ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, एकानन चतुरानन पंचानन राजे । हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे । त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी । त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥ ॐ जय… श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी । सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा । पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा । भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला । शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी । नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा, त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा,
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस आरती के माध्यम से भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया गया है। पहले पंक्ति 'जय शिव ओंकारा' से यह स्पष्ट होता है कि शिव को ओंकार की पहचान दी गई है, जो कि ब्रह्म सत्ता का प्रतीक है। इसके बाद, 'ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव' का उल्लेख होता है, यह दर्शाता है कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों मिलकर सृष्टि के चक्र का संचालन करते हैं। आरती में 'हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे' जैसे भाव भी सम्मिलित हैं, जो अलग-अलग जीवों और उनकी विशेषताओं को दर्शाते हैं। त्रिगुण रूप, 'दुभुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे' लाइन से स्पष्ट होता है कि शिव का स्वरूप भिन्न-भिन्न रूपों में प्रकट होता है। इन पंक्तियों से यह सिद्ध होता है कि शिव सदाबहार हैं और उनकी विविधता का कोई अंत नहीं है।

भावार्थ की दृष्टि से, इस आरती का भाव यह है कि शिव हमें आध्यात्मिक उन्नति हेतु प्रेरित करते हैं। 'श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे' से यह अभिप्राय है कि शिव की उपस्थिति कई रंगों में हमारे सामने आती है, जो भक्ति के विविध रंगों को दर्शाती है। 'सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी' यह दर्शाता है कि शिव अपने भक्तों के दुखों को हरते हैं और सुख प्रदान करते हैं। उनके द्वारा प्रकट इस करुणा और दया का ध्यान हमें अपने जीवन में उचित मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आरती में 'जटा में गंग बहत है' पंक्तियां गंगा और उसकी शुद्धता का संकेत देती है, जो कि शिव के आस-पास के पर्यावरण को भी शुद्ध बनाए रखती हैं।

तात्त्विक दृष्टि से, भगवान शिव को 'महादेव' के रूप में समझा जाता है, जो सृष्टि के पालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 'लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा' पंक्ति में पार्वती का उल्लेख उनकी अर्धांगिनी के रूप में किया गया है, जो दर्शाता है कि शिव और शक्ति का एकाकार होना आद्य शाक्ति का दरश करता है। 'त्रिगुणस्वामी जी की आरती' का अर्थ है कि शिव त्रिगुणों के नियंत्रक हैं, और उनके प्रति भक्ति से हम अपने जीवन में संतुलन बना सकते हैं। ये तात्त्विक तत्व हमें सच्चे ज्ञान, ध्यान और जागरूकता की ओर ले जाते हैं, जिससे हम अपने मन, बुद्धि और आत्मा का संगम कर सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव की आरती का संदर्भ भारतीय पौराणिक कथाओं में बहुत महत्वपूर्ण है। विभिन्न पुराणों, जैसे कि शिव पुराण, में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन मिलता है। इन कथाओं में शिव को आध्यात्मिक उन्नति का स्रोत माना गया है। रामायण और महाभारत में भी भगवान शिव का महत्व दर्शाया गया है, जहां वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। यह आरती मुख्य रूप से भक्तों को इसी भक्तिभाव और समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है, जिसके परिणामस्वरूप शिव की कृपा प्राप्त होती है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। भगवान शिव की आरती का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को हटाकर सकारात्मकता का संचार करता है, जिससे जीवन में उत्साह और ऊर्जा का अनुभव होता है। शिव की आरती का पाठ अग्नि तत्व से जुड़ा है, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव आरती का पाठ करने का सर्वोत्तम समय प्रातः काल या संध्याकाल है। पाठ के समय एक दीया जलाना आवश्यक है और भगवान को पुष्प अर्पित करना चाहिए। भक्तों को ध्यान मुद्रा में बैठकर पूर्ण श्रद्धा भावना और विश्राम की स्थिति में इस आरती का पाठ करना चाहिए। मन में सकारात्मकता और भक्ति भाव रखना अति आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री शिव आरती का महत्व क्या है?

श्री शिव आरती आस्था और भक्ति का प्रतीक है, जो भगवान शिव की अनुकंपा को पाने के लिए गाई जाती है।

कौन सी सामग्री का उपयोग शिव आरती में करना चाहिए?

शिव आरती के समय फूल, धूप, दीपक और नैवेद्य का उपयोग करना चाहिए, जो भक्ति का संकेत है।

क्या इस आरती का पाठ हर दिन करना चाहिए?

हाँ, शिव आरती का प्रतिदिन पाठ करने से समस्त विघ्न दूर होते हैं और आंतरिक शांति प्राप्त होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Sep 2026

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