Mahadev Bhajan

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले(Shiv Tandav Stotram Lyrics in Hindi)

565 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

शिव ताण्डव स्तोत्र: शिव की महिमा का गान

शिव ताण्डव स्तोत्र गाने से शांति, शक्ति और भक्ति की भावना जागृत होती है।

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थलेगलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयंचकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावकेकिशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदिकवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरेमनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकःश्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरंमहा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरःकलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदंगजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकंगजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोःसमं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकःशिवेति मंत्रमुच्चरन्‌कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥13॥निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशंपरिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणीमहाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिःशिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवंपठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिंविमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतंयः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तांलक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥॥ इति शिव ताण्डव स्तोत्रं संपूर्णम्‌॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

शिव ताण्डव स्तोत्र का मुख्य आधार महादेव की शक्ति और दिव्यता का वर्णन है। इस स्तोत्र में शिव के अद्भुत रूपों का चित्रण किया गया है, जैसे कि 'जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले' से यह प्रतीत होता है कि शिव की जटा में जल का प्रवाह है, जो उनके दिव्य स्वरूप को और बढ़ाता है। इस प्रकार की पंक्तियाँ शिव की शक्तियों का आदान-प्रदान करती हैं, जिसमें शक्ति, सृष्टि और संहार का समावेश होता है। स्तोत्र में अनेक स्थानों पर झलकती भक्ति, प्रेम और आस्था हमें मार्गदर्शन देती है कि हम शिव की कृपा की प्राप्ति के लिए किस प्रकार बोध कर सकते हैं। यहाँ 'धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके' जैसी पंक्तियाँ शिव के तेज और अग्निवंता स्वरूप को दर्शाती हैं, जो भक्तों के मन में श्रद्धा और भय उत्पन्न करती हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, शिव ताण्डव स्तोत्र एक शक्तिशाली भक्ति गीत है जो भक्ति और ध्यान के माध्यम से शिव की कृपा और शक्ति को प्राप्त करने का मार्गदर्शन करता है। 'सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं' से यह स्पष्ट है कि शिव का चेहरा अत्यंत दिव्य और आनंददायक है। इस स्तोत्र में उन भक्तों का चिंतन किया गया है जो शिव के भक्ति मार्ग पर चलते हैं। स्वाभाविक रूप से, भक्त जब इन पंक्तियों का उच्चारण करते हैं, तो उनका मन श्रद्धा से भर जाता है। भावुकता और भक्ति की इस लहर में भक्त आनंद की अनुभूति करता है और वास्तविकता की ओर अग्रसर होता है। यह भावार्थ हमें प्रेरित करता है कि हम अपनी समस्याओं को शिव के चरणों में समर्पित करें।

शिव ताण्डव स्तोत्र में भक्ति मार्ग का सार दर्शाया गया है। यह भक्ति की स्थायी भावना को प्रकट करता है, जो भक्त को शिव के प्रति आत्मीयता और अनुकरण में लाने में मदद करता है। महादेव की भक्ति के माध्यम से, भक्त अपने अहंकार को खो देता है और विराटता की ओर अग्रसर होता है। 'जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर' से स्पष्ट होता है कि शिव की स्तुति में स्थितियों की पारलौकिकता है और वो सभी दुखों के निवारण का साधन देने वाले हैं। यहां 'वत्सलता', 'करुणा' और 'कृपा' की भावना स्पृहणीय है, जो यह दर्शाती है कि भक्ति में केवल भक्ति नहीं, बल्कि श्रद्धा और समर्पण भी होना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव ताण्डव स्तोत्र का पूजन संसार की विभिन्न पौराणिक रचनाओं में दृढ़ता से स्थापित किया गया है। यह स्तोत्र शिव के तांडव नृत्य को संदर्भित करता है, जो सृष्टि, पालन और संहार का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में इसे एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, जहां इसका पाठ श्रावण मास, नवरात्रि और शिवरात्रि जैसे त्योहारों पर विशेष महत्व रखता है। इसे माना जाता है कि जब भक्त इस स्तोत्र का अचूक अनुसरण करते हैं, तो उन्हें विभूतियाँ प्राप्त होती हैं। महाभारत और पुराणों में शिव के चरित्र और उनके तांडव का कई बार उल्लेख किया गया है, जो भक्तों को शिव की अनंत शक्तियों का अनुभव कराता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ देता है। यह भक्ति कवायद भक्त के मन को स्थिरती प्रदान करता है और मानसिक शांति लाने में सहायक है। नियमित पाठ करने से आंतरिक अध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है, साथ ही भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। भक्तों का विश्वास बढ़ता है और उन्हें जीवन में कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्तोत्र का पाठ सामान्यतः सुबह या शिवरात्रि को किया जाता है। पाठ के समय भक्त को एकांत में बैठकर शिव का ध्यान करना चाहिए। एक दीया जलाएं और पुष्प अर्पित करें। ध्यान और श्रद्धा के साथ बातचीत करनी चाहिए। पाठ करने के लिए सही आसन, जैसे सुखासन या पद्मासन, का उपयोग करें और मन को एकाग्र करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ किस समय करना चाहिए?

शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ सुबह या प्रदोष काल (सोमवार) में करना शुभ माना जाता है।

क्या शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ सभी कर सकते हैं?

हाँ, शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ सभी व्यक्ति कर सकते हैं, जो भगवान शिव के प्रति श्रद्धा रखते हैं।

शिव ताण्डव स्तोत्र का पाठ कैसे किया जाए?

इसका पाठ एक शांत स्थान पर, ध्यानपूर्वक और भक्तिपूर्वक किया जाना चाहिए, preferably एकांत में।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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