Parvati Stotram

मुझे भोले शंकर की मस्ती चढ़ी है (Bhole Shankar Ki Masti in hindi) - Shiv Ji Ke Bhajan Bhakti lok

57 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

मुझे भोले शंकर की मस्ती चढ़ी है - भजन परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

देवादिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित यह पावन भजन "मुझे भोले शंकर की मस्ती चढ़ी है" साधक के भीतर प्रवाहित होने वाली उस अतीन्द्रिय और अलौकिक भक्ति-ऊर्जा का सजीव और काव्यात्मक चित्रण करता है, जो संसार के सभी बंधनों को काटकर साधक को परम चेतना से जोड़ देती है। शिव का अर्थ ही 'कल्याण' है और उनकी 'मस्ती' वस्तुतः वैराग्य, आनंद, और उस आत्मानुभूति का प्रतीक है जहाँ जीव अपने मूल स्वरूप को पहचानकर ब्रह्मांडीय स्पंदन के साथ एक हो जाता है। इस भजन के माध्यम से गायक चेतना और गीतकार अनिल शर्मा ने शिव के अघोरी, भस्मधारी, डमरू-धारी और कल्याणकारी रूप का अत्यंत सुंदर एवं मनमोहक वर्णन किया है। आधुनिक संगीत और पारंपरिक भक्ति भाव के इस अनूठे संगम में, श्रवण मात्र से मन की समस्त उलझनें शांत हो जाती हैं और हृदय में भोलेनाथ के प्रति अगाध प्रेम और समर्पण का भाव जागृत होता है। चाहे सावन का महीना हो, महाशिवरात्रि का महापर्व हो, अथवा सोमवार का पावन व्रत, यह भजन हर शिव भक्त की जुबान पर अपनी अदम्य ऊर्जा और लयबद्धता के कारण विशेष स्थान रखता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भजन के बोल (Lyrics in Devanagari)


मुझे भोले शंकर की मस्ती चढ़ी है,
मस्ती चढ़ी है, मुझे मस्ती चढ़ी है...
डमरू वाले की भक्ति में आँख मेरी लड़ी है,
मुझे भोले शंकर की मस्ती चढ़ी है।।

गले में जिनके नाग विराजे, शीश चंद्र का पहरा है,
कैलाश पर्वत पर जिनका डेरा, डमरू उनका गहरा है,
भस्म रमाने वाले बाबा ने, रंगत ऐसी डाली है,
दुनिया वाले पूछें मुझको, क्या तूने मदिरा प्याली है?
अरे मैंने पी है नाम की प्याली, दुनिया जली तो जली है,
मुझे भोले शंकर की मस्ती चढ़ी है।।

नंदी की असवारी करके, भोले जब जब आते हैं,
भूत प्रेत और पिशाच सारे, संग में नाच दिखाते हैं,
जटाजूट से बहती गंगा, मुक्ति का यह द्वार है,
भोले बाबा के चरणों में, मेरा तो संसार है!
तीनों लोकों में प्यारे शंकर, जिनकी महिमा बड़ी है,
मुझे भोले शंकर की मस्ती चढ़ी है।।

माया मोह के जाल से छूटे, जब शिव नाम पुकारा है,
डूब रही थी जीवन नैया, शिव ने दिया सहारा है,
अनिल शर्मा गुण गाए हरदम, चेतना करे पुकार,
महाकाल की शरण में आकर, मिल गया भव से पार!
भक्तों की इस टोली में अब, मस्ती तगड़ी पड़ी है,
मुझे भोले शंकर की मस्ती चढ़ी है।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, अपितु यह आध्यात्मिक उन्माद और परम आनंद की वह अवस्था है जिसे बड़े-बड़े ऋषि-मुनि समाधि में प्राप्त करते हैं। प्रथम पंक्ति "मुझे भोले शंकर की मस्ती चढ़ी है" इस बात का प्रतीक है कि जब मनुष्य के हृदय में भगवान शिव के प्रति सच्ची भक्ति प्रवेश कर जाती है, तब वह सांसारिक दुखों, चिंताओं और प्रलोभनों से मुक्त होकर एक अलौकिक आनंद में मग्न हो जाता है। यह मस्ती किसी भौतिक नशे की तरह चेतना को शून्य नहीं करती, बल्कि साधक की सोई हुई चेतना को जाग्रत कर देती है।

भजन के अंतरे में जब गायक वर्णन करता है कि "गले में जिनके नाग विराजे, शीश चंद्र का पहरा है", तो यह शिव के उस रूप को दर्शाता है जो भय और मृत्यु के आधिपत्य से परे है। विषैला नाग और अमृतमय चंद्रमा दोनों ही शिव के सान्निध्य में शांत और संतुलित रहते हैं, जो यह सिखाता है कि जो व्यक्ति शिव की शरण में जाता है, उसके जीवन के सारे विष अमृत में बदल जाते हैं। लोग जब साधक की इस परमानंद स्थिति को देखकर शंका करते हैं और पूछते हैं कि क्या उसने कोई नशा किया है, तब भक्त गर्व से कहता है कि उसने सांसारिक मदिरा नहीं, बल्कि भगवान के पावन 'नाम की प्याली' पी है।

अंतिम चरणों में "माया मोह के जाल से छूटे, जब शिव नाम पुकारा है" यह संदेश देता है कि संसार के जटिल बंधनों से मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय महाकाल का स्मरण है। जो शिव की शरण में आ जाता है, उसकी जीवन नैया भवसागर से पार हो जाती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऊर्जावान और उत्साहवर्धक स्वरूप है जो किसी भी सुस्त मन में भी भक्ति की नई लहर पैदा कर देता है। भगवान शिव के तांडव, उनकी अघोर लीला और उनकी सरल कृपालु प्रकृति का इसमें बहुत ही सुंदर समन्वय किया गया है। यह भजन साधक को सिखाता है कि शिव की भक्ति के लिए किसी आडंबर या जटिल कर्मकांड की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि केवल सच्चे हृदय से उनके नाम का स्मरण ही पर्याप्त है। सांस्कृतिक दृष्टि से यह भजन भारत की लोक-भक्ति परंपरा और शिव आराधना के उत्सवधर्मी स्वरूप को जीवंत करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को आप किसी भी समय और किसी भी पवित्र अवसर पर सुन या गा सकते हैं, परंतु इसके आनंद को पूरी तरह अनुभव करने के लिए कुछ विशेष समय और नियम निर्धारित किए गए हैं:

  • प्रातःकाल की बेला: ब्रह्म मुहूर्त या सुबह स्नान के पश्चात जब आप भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं, तब इस भजन का श्रवण मन को पूरे दिन ऊर्जावान बनाए रखता है।
  • प्रदोष काल एवं संध्या आरती: संध्या के समय दीपक प्रज्वलित करने के उपरांत शिव मंदिर में या घर के मंदिर में इस भजन को बजाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • सावन मास एवं महाशिवरात्रि: सावन के पवित्र सोमवारों और महाशिवरात्रि के जागरण के दौरान यह भजन जागरण और कांवड़ यात्रा के शिविरों में विशेष रूप से गूंजता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में देवादिदेव महादेव, महाकाल, भोलेनाथ और आशुतोष शिव विराजमान हैं, जो संपूर्ण ब्रह्मांड के पालन, संहार और कल्याण के देवता हैं। साथ ही इस भजन की रचना और प्रस्तुति में गीतकार अनिल शर्मा, गायक चेतना और संगीतकार अरुण वीर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से शिव भक्तों को एक अमूल्य आध्यात्मिक कृति भेंट की है। शिव भक्तों के लिए शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र के साथ इस भजन का स्मरण अत्यंत फलदायी माना गया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

एचएलएम रिकॉर्ड्स (HLM Records) और डिजीलाइन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले जारी यह भजन आधुनिक लोक-भक्ति संगीत शैली का एक बेहतरीन उदाहरण है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे ढोलक, मंजीरा, और आधुनिक सिंथेसाइज़र के सम्मिश्रण से इसे युवा पीढ़ी के बीच भी बेहद लोकप्रिय बनाया गया है। इसकी रचना इस प्रकार की गई है कि श्रोता बिना थके इसके हर अंतरे के साथ झूम उठे।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा बेहद सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी तथा ब्रज-अवधि के प्रभाव वाली लोक भाषा है। इसमें रूपक अलंकार और उपमाओं का सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे 'नाम की प्याली', 'भव से पार' और 'मस्ती चढ़ी है'। यह काव्यात्मक शैली आम जनमानस के दिलों पर सीधा प्रभाव डालती है और बिना किसी कठिन संस्कृत व्याकरण के भी गहरे आध्यात्मिक अर्थ को समझा देती है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • सांसारिक मोह से मुक्ति: शिव की मस्ती व्यक्ति को भौतिक वस्तुओं की लालसा से ऊपर उठाती है।
  • समर्पण का भाव: महाकाल की शरण में जाने पर सारे भय और चिंताएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
  • सच्ची भक्ति का आनंद: ईश्वर का नाम ही सबसे बड़ा नशा और सबसे बड़ा आनंद है।
  • समभाव: शिव की तरह सभी जीवों के प्रति करुणा और समानता का भाव रखना ही सच्ची शिव आराधना है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल अर्थ आध्यात्मिक प्रसंग
मस्ती चढ़ी है परमानंद और उत्साह का भाव साधक की आंतरिक चेतना का ऊर्ध्वगामी होना
डमरू वाला भगवान शिव ब्रह्मांडीय नाद (प्रणव ध्वनि) के नियंत्रक
भस्म रमाने वाले शरीर पर राख लगाने वाले नश्वरता का बोध और वैराग्य का प्रतीक
नाम की प्याली ईश्वर के नाम का स्मरण सांसारिक विषयों से विरक्ति और दिव्यता का पान
भव से पार संसार के चक्र से मुक्ति जन्म-मृत्य के बंधन से छुटकारा (मोक्ष)

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: गले में जिनके नाग विराजे, शीश चंद्र का पहरा है...
भावार्थ: भगवान शिव का स्वरूप समस्त विरोधाभासों का समन्वय है। उनके गले में भयानक सर्प है और माथे पर शीतल चंद्रमा सुशोभित है, जो यह संदेश देता है कि ज्ञानी पुरुष के लिए मित्र और शत्रु, शीत और उष्ण सब समान हैं।

पंक्ति: जटाजूट से बहती गंगा, मुक्ति का यह द्वार है...
भावार्थ: शिव की जटाओं से प्रवाहित होने वाली माँ गंगा केवल जलधारा नहीं है, बल्कि वह पावन ज्ञान और पवित्रता का स्त्रोत है जो हर पापी को तारने की सामर्थ्य रखती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन का आनंद लेते समय निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

ॐ नमः शिवाय‖

कपूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयाारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम मुझे भोले शंकर की मस्ती चढ़ी है (Bhole Shankar Ki Masti)
मुख्य आराध्य भगवान शिव / महाकाल
गायक / कलाकार चेतना (Chetna)
गीतकार अनिल शर्मा (Anil Sharma)
संगीतकार अरुण वीर (Arun Vir)
प्रकाशक / लेबल डिजीलाइन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (HLM Records)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव भक्ति, वैराग्य, परमानंद और समर्पण
उचित अवसर सावन सोमवार, महाशिवरात्रि, दैनिक पूजा, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय शिव भजन की मुख्य गायिका चेतना (Chetna) हैं, और इसके गीत अनिल शर्मा द्वारा लिखे गए हैं।

यह भजन सांसारिक मोह-माया को छोड़कर भगवान शिव के नाम की सच्ची भक्ति में लीन होने और वैराग्य एवं परमानंद को प्राप्त करने का संदेश देता है।

सावन मास, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि, सोमवार की पूजा अथवा शिव जागरण के अवसर पर इस भजन को सुनना विशेष रूप से आनंददायक होता है।

हाँ, आप इसे घर पर सुबह या शाम की पूजा के दौरान, जलाभिषेक करते समय या सत्संग में आसानी से गा सकते हैं।

इस भजन का संगीत अरुण वीर (Arun Vir) द्वारा तैयार किया गया है और इसे HLM Records द्वारा रिलीज़ किया गया है।

यहाँ 'नाम की प्याली' से तात्पर्य भगवान शिव के पावन नाम का निरंतर स्मरण करने से मिलने वाले आंतरिक आनंद और नशे से है जो सांसारिक दुखों को मिटा देता है।

शिव भक्ति मनुष्य के मन से मृत्यु का भय, क्रोध, लोभ और अहंकार को समाप्त कर उसे शांत, सहनशील और निडर बनाती है।

अवश्य! इस भजन के साथ आप शिव तांडव स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र और शिव चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तितत्व और लोक संगीत के मानदंडों को ध्यान में रखते हुए यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें भगवान शिव की महिमा, भजन के प्रामाणिक बोल, शब्दार्थ और आध्यात्मिक व्याख्या को पाठकों की सुगमता के लिए सरल हिंदी में पिरोया गया है ताकि हर शिव भक्त इसका पूरा लाभ उठा सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक शिव स्तोत्र एवं पुराण ग्रंथ
  • लोक भक्ति संगीत संग्रह एवं एचएलएम रिकॉर्ड्स प्रकाशन
  • वैदिक एवं पौराणिक शिव तत्व व्याख्या

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!