Shyam Bhajan

जबसे हुई है तेरी मेहरबानी बदली ज़िंदगानी Teri Meharbani Lyrics in hindi | Khatu Shyam Bhajan | Sumitra Banerjee - BhaktiLok

72 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तुत भजन "जबसे हुई है तेरी मेहरबानी बदली ज़िंदगानी" कलयुग के जाग्रत देव भगवान श्री खाटू श्याम जी को समर्पित एक अत्यंत ही भावपूर्ण और लोकप्रिय श्याम भजन है। इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका सुमित्रा बनर्जी ने अपनी मधुर आवाज में गाकर जीवंत किया है। यह भजन पूर्ण रूप से समर्पण, कृतज्ञता और अनन्य भक्ति रस से सराबोर है। इसमें एक भक्त के जीवन में आने वाले उस महान परिवर्तन का चित्रण किया गया है, जो भगवान श्री श्याम सुंदर की असीम अनुकंपा और कृपा प्राप्त होने के बाद घटित होता है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम के स्मरण को कलयुग में भवसागर से पार उतरने का सबसे सुगम मार्ग बताया गया है। जब कोई भक्त अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण रूप से खाटू नरेश के चरणों में आत्मसमर्पण कर देता है, तब प्रभु की मेहरबानी से उसका संपूर्ण जीवन आनंद, शांति और समृद्धि से भर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है और उसे ईश्वर के और समीप ले जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ जबसे हुई है तेरी मेहरबानी बदली ज़िंदगानी ॥

(स्थाई)
जबसे हुई है तेरी मेहरबानी बदली ज़िंदगानी,
ओ श्याम प्यारे, ओ श्याम प्यारे।
जबसे हुई है तेरी मेहरबानी बदली ज़िंदगानी,
ओ श्याम प्यारे, ओ श्याम प्यारे।

(अंतरा - 1)
पहले तो मैं दर-दर भटकता रहा,
कोई न सहारा मुझे मिलता रहा।
जबसे पकड़ी है तूने मेरी बहियाँ,
पार हुई मेरी जीवन की नैया,
ओ श्याम प्यारे, ओ श्याम प्यारे।

(अंतरा - 2)
सुख-दुख में अब तो तेरा ही सहारा,
तू ही है माझी, तू ही है किनारा।
तेरे ही चरणों में जीवन बिताऊँ,
तेरी ही महिमा मैं गाता जाऊँ,
ओ श्याम प्यारे, ओ श्याम प्यारे।

(अंतरा - 3)
हारे का सहारा तू ही कहलाए,
जो भी शरण आए, वो सब कुछ पाए।
मुझ पर भी कृपा ऐसी बरसाई,
तेरी दया से खुशहाली आई,
ओ श्याम प्यारे, ओ श्याम प्यारे।

जबसे हुई है तेरी मेहरबानी बदली ज़िंदगानी,
ओ श्याम प्यारे, ओ श्याम प्यारे।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और उनकी असीम कृपा का गुणगान करना है। भक्त अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहता है कि हे श्याम सुंदर! जब से आपकी मेहरबानी (कृपा) मेरे ऊपर हुई है, तब से मेरी संपूर्ण जीवन यात्रा ही बदल गई है। पहले मेरा जीवन अंधकारमय, दिशाहीन और दुखों से भरा हुआ था, लेकिन आपके आशीर्वाद ने मेरे जीवन को आलोकित कर दिया है।

भजन के प्रथम भाग में भक्त अपनी पूर्व स्थिति का वर्णन करता है, जहाँ वह संसार के थपेड़ों से परेशान होकर दर-दर भटक रहा था। इस भौतिक संसार में कोई भी उसका सच्चा हितैषी या सहारा नहीं था। परंतु, जैसे ही उसने भगवान खाटू श्याम की शरण ली और प्रभु ने उसकी बाँह थामी, वैसे ही उसकी जीवन रूपी नैया संकटों के तूफान से पार निकल गई।

द्वितीय और तृतीय भाग में भक्त की अटूट आस्था प्रकट होती है। वह स्वीकार करता है कि अब चाहे सुख हो या दुख, उसका एकमात्र सहारा केवल और केवल श्याम बाबा ही हैं। भगवान ही उसके जीवन के खेवनहार (माझी) हैं और वही अंतिम किनारा (मोक्ष) भी हैं। भक्त की केवल यही अभिलाषा है कि वह अपना संपूर्ण जीवन प्रभु के चरणों में समर्पित कर दे और निरंतर उनकी महिमा का गान करता रहे। "हारे का सहारा" के रूप में प्रसिद्ध बाबा श्याम की शरण में आने वाला कोई भी जीव कभी खाली हाथ नहीं लौटता, यही इस भजन का परम सत्य है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह एक भक्त के हृदय की पुकार और उसकी आध्यात्मिक यात्रा का जीवंत दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शरणागति का भाव: भजन का मूल स्वर पूर्ण शरणागति (प्रपत्ति) का है। जब भक्त अपनी असमर्थता स्वीकार कर लेता है, तब भगवान का उत्तरदायित्व शुरू होता है।
  • कृतज्ञता की अभिव्यक्ति: इसमें भक्त भगवान के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता है। वह मानता है कि उसके जीवन में जो भी सकारात्मक बदलाव आए हैं, वे केवल प्रभु की कृपा का परिणाम हैं।
  • सरलता और सुबोधता: भजन की भाषा अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी है, जिससे कोई भी सामान्य भक्त इससे तुरंत जुड़ जाता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस भजन के श्रवण और कीर्तन से मन में निराशा के भाव दूर होते हैं और आशा तथा विश्वास का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए कोई भी समय वर्जित नहीं है, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यधिक फलदायी मानी गई हैं:

  • संध्या आरती के समय: शाम के समय घर के मंदिर में या श्याम मंदिर में घी का दीपक जलाकर इस भजन का गायन करने से मानसिक शांति मिलती है।
  • एकादशी व्रत: खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन श्याम भक्तों के साथ मिलकर सामूहिक संकीर्तन में इस भजन को गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • नियमित साधना: सुबह के समय अपने दिन की शुरुआत इस भजन को सुनकर करने से दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  • गायन की विधि: इसे गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, आंखों में प्रेमाश्रु और हाथों से ताली बजाकर प्रभु के ध्यान में मग्न होना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन महाभारत कालीन महान योद्धा बर्बरीक, जिन्हें कलयुग में भगवान श्री कृष्ण के वरदान स्वरूप "श्री खाटू श्याम जी" के नाम से पूजा जाता है, को समर्पित है। भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के महान बलिदान (शीश दान) से प्रसन्न होकर उन्हें अपना नाम "श्याम" दिया था और वरदान दिया था कि कलयुग में जो भी भक्त हारकर इनके पास आएगा, उसे बाबा श्याम का सहारा मिलेगा।

इस भजन को अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज देने वाली गायिका सुमित्रा बनर्जी हैं। उन्होंने अपनी गायकी के माध्यम से देश-विदेश के लाखों श्याम भक्तों के दिलों में भक्ति की अलख जगाई है। उनके द्वारा गाए गए भजनों में एक विशेष प्रकार का खिंचाव और समर्पण भाव होता है, जो श्रोताओं को सीधे ईश्वर से जोड़ता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन आधुनिक श्याम भजनों की श्रेणी में आता है, जो पारंपरिक लोक धुनों और सुगम संगीत के मिश्रण पर आधारित है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम से जुड़े अनगिनत चमत्कारों और भक्तों के अनुभवों ने इस भजन की पृष्ठभूमि तैयार की है। जब कोई भक्त खाटू धाम की यात्रा करता है और वहाँ के दिव्य वातावरण का अनुभव करता है, तो उसके भीतर से स्वतः ही ऐसे भाव प्रस्फुटित होते हैं। यह भजन उसी दिव्य अनुभूति का काव्यात्मक रूपांतरण है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली अत्यंत प्रवाहमयी और गेय (गाने योग्य) है।

  • अलंकार और रूपक: भजन में "जीवन की नैया" और "माझी" जैसे सुंदर रूपकों का प्रयोग किया गया है, जो संसार को एक सागर और भगवान को पार लगाने वाले नाविक के रूप में दर्शाते हैं।
  • लय और ताल: इसकी लय मध्यम और कर्णप्रिय है, जो कीर्तन के दौरान भक्तों को झूमने पर मजबूर कर देती है।
  • संबोधन शैली: भक्त सीधे अपने आराध्य "श्याम प्यारे" को संबोधित करता है, जिससे भगवान और भक्त के बीच का संबंध अत्यंत आत्मीय और व्यक्तिगत प्रतीत होता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक सीख देता है:

  1. अहंकार का त्याग: जब तक मनुष्य के भीतर यह भ्रम रहता है कि वह स्वयं सब कुछ कर सकता है, तब तक उसे शांति नहीं मिलती। प्रभु की शरण में आते ही अहंकार नष्ट हो जाता है।
  2. धैर्य और विश्वास: जीवन में कठिन समय आने पर घबराना नहीं चाहिए। यदि हम सच्चे मन से ईश्वर पर विश्वास रखेंगे, तो उनकी मेहरबानी अवश्य होगी।
  3. कृतज्ञ जीवन: हमें अपने जीवन में मिली सुख-सुविधाओं और कृपा के लिए हमेशा ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए।
  4. समर्पण की शक्ति: पूर्ण समर्पण ही ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल और सीधा मार्ग है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मेहरबानी कृपा, दया, अनुकंपा ईश्वर की वह अकारण दया जो भक्त का उद्धार करती है।
बहियाँ बाँह, हाथ शरण में आए भक्त को सहारा देना और उसका मार्गदर्शन करना।
नैया नाव, नौका मनुष्य का जीवन जो संसार रूपी सागर में तैर रहा है।
माझी नाविक, खेवनहार भगवान श्री कृष्ण/श्याम जो जीवन रथ के सारथी हैं।
हारे का सहारा निर्बलों का रक्षक खाटू श्याम जी का वह स्वरूप जो निराश लोगों को आशा देता है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जबसे हुई है तेरी मेहरबानी बदली ज़िंदगानी, ओ श्याम प्यारे..."
हे मेरे प्यारे श्याम बाबा! जब से आपकी दया दृष्टि मुझ पर पड़ी है, मेरा पूरा जीवन ही बदल गया है। मेरे सोचने का ढंग, मेरी परिस्थितियां और मेरा भाग्य सब कुछ आपकी कृपा से मंगलमय हो गया है।

"पहले तो मैं दर-दर भटकता रहा, कोई न सहारा मुझे मिलता रहा..."
आपके शरण में आने से पहले मैं इस मतलबी दुनिया में सच्चे सुख और सहारे की तलाश में भटक रहा था। हर जगह मुझे केवल निराशा और उपेक्षा ही हाथ लगी।

"जबसे पकड़ी है तूने मेरी बहियाँ, पार हुई मेरी जीवन की नैया..."
लेकिन जैसे ही आपने दया करके मेरा हाथ थाम लिया, मेरे जीवन की डगमगाती हुई नाव सुरक्षित रूप से किनारे लग गई। अब मुझे किसी भी संकट का भय नहीं है।

"सुख-दुख में अब तो तेरा ही सहारा, तू ही है माझी, तू ही है किनारा..."
अब मेरे जीवन में चाहे सुख आए या दुख, मुझे केवल आपका ही भरोसा है। आप ही मेरे रक्षक हैं और आप ही मेरी अंतिम गति हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्याम साधना के समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है:

॥ श्री श्याम मंत्र ॥

ॐ श्याम देवाय नमः

अथवा

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं श्याम देवाय नमः

श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक भी इस भजन के समर्पण भाव को पूर्णतः चरितार्थ करता है:

॥ श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 18, श्लोक 66) ॥

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥

अर्थ: सभी धर्मों (कर्तव्यों) को मुझमें समर्पित करके केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत करो।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जबसे हुई है तेरी मेहरबानी बदली ज़िंदगानी (Teri Meharbani)
समर्पित देवता भगवान श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक / श्री कृष्ण)
मुख्य गायिका सुमित्रा बनर्जी (Sumitra Banerjee)
भाषा सरल हिंदी (भक्ति रस)
मुख्य भाव कृतज्ञता, समर्पण, अनन्य भक्ति (दास्य व माधुर्य भाव)
उपयुक्त अवसर श्याम संकीर्तन, एकादशी, देवउठनी एकादशी, फाल्गुन मेला
श्रेणी श्याम भजन (Shyam Bhajan)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका सुमित्रा बनर्जी ने गाया है। उनकी भावपूर्ण आवाज ने इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

यह भजन कलयुग के अवतारी देव भगवान श्री खाटू श्याम जी को समर्पित है, जिन्हें "हारे का सहारा" भी कहा जाता है।

महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक ने प्रतिज्ञा की थी कि वह उसी पक्ष से लड़ेंगे जो हार रहा होगा। भगवान श्री कृष्ण ने उनकी इस भावना और महान बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे "हारे का सहारा" के रूप में पूजे जाएंगे।

इस भजन के नियमित श्रवण और कीर्तन से मन की व्याकुलता दूर होती है, अवसाद और तनाव से मुक्ति मिलती है, और साधक के भीतर ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और सकारात्मकता का उदय होता है।

प्रत्येक माह की एकादशी और द्वादशी तिथि बाबा श्याम की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। विशेष रूप से कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी और फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का अत्यधिक महत्व है।

हाँ, इस भजन को आप अपनी दैनिक सुबह या शाम की पूजा के समय अत्यंत श्रद्धा के साथ गा सकते हैं। यह घर के वातावरण को पवित्र और शांतिमय बनाता है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य संसार के झूठे सहारों को छोड़कर पूर्ण रूप से भगवान की शरण में आ जाता है, तो भगवान स्वयं उसके जीवन का दायित्व संभाल लेते हैं और उसका कल्याण करते हैं।

भगवान श्री खाटू श्याम जी का मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के सीकर जिले के खाटू धाम नामक स्थान पर स्थित है। यह एक अत्यंत जाग्रत और पवित्र तीर्थ स्थल है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल और इसकी व्याख्या को विभिन्न प्रामाणिक भक्ति ग्रंथों, संतों के प्रवचनों और पारंपरिक श्याम संकीर्तन पद्धतियों के आधार पर संकलित और विश्लेषित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, त्रुटिहीन और उच्च गुणवत्ता वाली आध्यात्मिक सामग्री पहुंचाना है ताकि वे अपनी साधना और भक्ति मार्ग में आगे बढ़ सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता - शरणागति योग और भक्ति मार्ग संदर्भ।
  • महाभारत - बर्बरीक की कथा और श्री कृष्ण के वरदान का पौराणिक प्रसंग।
  • पारंपरिक श्याम भजन संग्रह एवं खाटू धाम महात्म्य।
  • सुमित्रा बनर्जी के आधिकारिक संगीत एल्बम और प्रस्तुतियां।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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