Shyam Bhajan

सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी ( Sar Pe Ghuma Do MorChhadi Baba Morchhadi Lyrics ) | Khatu Shyam Bhajan by Surendra Jangdi - BhaktiLok

59 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम भजन | Khatu Shyam Bhajan

सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी ( Sar Pe Ghuma Do MorChhadi Baba Morchhadi Lyrics ) | Khatu Shyam Bhajan by Surendra Jangdi

कलयुग के अवतारी, हारे के सहारे लखदातार श्री खाटू श्याम बाबा के चरणों में समर्पित यह अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन "सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी" प्रसिद्ध भजन गायक सुरेंद्र जांगिड़ (Surendra Jangdi) द्वारा अपनी मधुर वाणी में गाया गया है। खाटू श्याम जी के दरबार में मोरछड़ी (मोरपंख का गुच्छा) का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। ऐसी अटूट मान्यता है कि बाबा श्याम जब अपने भक्तों के सिर पर मोरछड़ी घुमाते हैं, तो उनके जीवन के सारे संकट, पीड़ाएं, दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा पल भर में छूमंतर हो जाती है। यह भजन साधक के भीतर बाबा के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति (Surrender) और अगाध विश्वास का भाव जागृत करता है। जब भक्त इस प्यारे भजन का संकीर्तन करते हैं, तो उनका अंतर्मन श्री श्याम प्रभु के चरणों में लीन हो जाता है और उन्हें ऐसा अनुभव होता है मानो प्रत्यक्ष रूप से खाटू नरेश लखदातार उनकी सुधि ले रहे हैं।

गायक (Singer): सुरेंद्र जांगिड़ (Surendra Jangdi)
आराध्य देव (Deity): श्री खाटू श्याम जी (Khatu Shyam Ji)
श्रेणी (Category): श्याम भजन / संकीर्तन

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी,
मेरे बिगड़े बना दो काम बाबा मोरछड़ी।
सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी...

मोरछड़ी की महिमा भारी, दुनिया जाने सारी,
तेरे दर का हर इक प्रेमी, भरता झोली खाली।
दर पे तेरे जो भी आया, खाली हाथ न पाया,
तूने तो हर हारे हुए को, गले से है लगाया।
मेरा भी तू पढ़ ले नाम बाबा मोरछड़ी,
सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी।

दुनिया के इन मेलों में, मैं तो गया घबरा,
कोई न अपना दिखता बाबा, संकट ने है घेरा।
तू ही मेरी नैया का मांझी, तू ही खेवनहार,
अब तो बाबा इस भवसागर से, मुझको कर दो पार।
आके थाम लो मेरे हाथ बाबा मोरछड़ी,
सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी।

सुरेंद्र जांगिड़ गाए महिमा, खाटू वाले तेरी,
चरणों में लेटे हैं बाबा, सुन लो अरज मेरी।
दीन-दुखियों की सेवा करना, तेरी पुरानी रीत,
श्याम धणी से जुड़ गई देखो, पक्की अपनी प्रीत।
पूरी कर दो मन की काम बाबा मोरछड़ी,
सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी।

सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी,
मेरे बिगड़े बना दो काम बाबा मोरछड़ी।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन के माध्यम से भक्त अपनी दीनता और बाबा की महान करुणा का बहुत ही सुंदर वर्णन करता है। भक्त बाबा से प्रार्थना करता है कि हे खाटू नरेश! आप अपने भक्तों के सिर पर अपनी चमत्कारी मोरछड़ी घुमा दीजिए। सनातन परंपरा में मोरछड़ी को श्याम बाबा का अस्त्र और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। जब मोरछड़ी किसी भक्त के सिर पर लगती है, तो उसके सारे कष्ट, मानसिक संताप और पापकर्म नष्ट हो जाते हैं। भक्त कहता है कि हे बाबा! मेरे जीवन के सारे बिगड़े काम केवल आपकी एक कृपा से संवर सकते हैं।

भजन के अगले चरण में गायक सुरेंद्र जांगिड़ जी बताते हैं कि खाटू श्याम के दरबार में आने वाला कोई भी इंसान कभी निराश नहीं लौटता। जो भी सच्चे मन से बाबा की शरण में आता है, उसकी झोली खुशियों से भर जाती है। कलयुग में हारे हुए का सहारा बनने वाले बाबा श्याम ने अनगिनत असहाय लोगों को अपने गले से लगाया है। भक्त निवेदन करता है कि हे लखदातार! इस विशाल और जटिल संसार में मैं अकेला पड़ गया हूँ और चारों तरफ से संकटों ने मुझे घेर लिया है। अब आप ही मेरी जीवन नैया के खेवनहार हैं। मेरी पुकार सुनिए और आकर मेरे सिर पर अपनी मोरछड़ी का स्पर्श करा दीजिए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • आराध्य देव: यह भजन कलयुग के अवतार भगवान श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है।
  • भक्ति भाव: इसमें शरणागति, दीनता, अगाध प्रेम और बाबा पर पूर्ण विश्वास का भाव प्रमुख रूप से झलकता है।
  • मोरछड़ी का रहस्य: मोरछड़ी खाटू श्याम जी का वह पवित्र प्रतीक है जिसके स्पर्श मात्र से प्रेत बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव दूर हो जाते हैं।
  • लोकप्रियता: गायक सुरेंद्र जांगिड़ की मधुर आवाज और सरल शब्दों के कारण यह भजन श्याम भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय, सुबह की पूजा के वक्त, संध्याकालीन आरती में या खाटू श्याम जी के मासिक कीर्तन (एकादशी या द्वादशी) के दौरान सुना और गाया जा सकता है। एकादशी के पावन पर्व पर घर में धूप-दीप जलाकर, बाबा श्याम का चित्रपट सजाकर यदि इस भजन का सामूहिक संकीर्तन किया जाए, तो घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके साथ ही आप अन्य प्रसिद्ध भजन जैसे श्री खाटू श्याम जी की आरती और श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी अपनी साधना में सम्मिलित कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य श्री खाटू श्याम जी हैं, जिन्हें महाभारत काल के वीर बर्बरीक के रूप में जाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के महान त्याग और बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें कलयुग में अपने ही नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था। जो भक्त बाबा श्याम की शरण में आते हैं, उन्हें भगवान श्रीकृष्ण और महादेव दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन समकालीन श्याम भजन परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। सुरेंद्र जांगिड़ जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों ने इसे अपनी स्वर लहरियों से सजाकर घर-घर तक पहुँचाया है। खाटू धाम (राजस्थान) आने वाले लाखों श्रद्धालु इस भजन को गाते हुए नाचते हैं और बाबा से मोरछड़ी का आशीर्वाद मांगते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा बेहद सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी/राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा शैली है, जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है। इसमें तुकबंदी और संगीतात्मकता का अद्भुत तालमेल है, जिसे कोई भी आसानी से गा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ क्यों न आ जाएं, मनुष्य को कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। 'हारे के सहारे' बाबा श्याम हमेशा अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। अहंकार का त्याग कर भगवान के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाना ही सच्ची भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
मोरछड़ी मोर पंखों से बना गुच्छा श्याम बाबा का पावन अस्त्र और आशीर्वाद का प्रतीक
लखदातार लाखों की दातुन/दान देने वाला खाटू श्याम जी का प्रसिद्ध संबोधन
भवसागर दुखों से भरा संसार रूपी समुद्र इस संसार से पार पाने की कामना
खेवनहार नाव चलाने वाला / पार लगाने वाला संकटों से उबारने वाले ईश्वर

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी, मेरे बिगड़े बना दो काम बाबा मोरछड़ी।" - इस पहली पंक्ति में भक्त की आर्त पुकार छिपी है। भक्त चाहता है कि बाबा उसकी समस्त परेशानियों को अपनी मोरछड़ी के एक स्पर्श से दूर कर दें और उसके अटके हुए कार्य पूर्ण कर दें।
"दुनिया के इन मेलों में, मैं तो गया घबरा..." - भक्त सांसारिक प्रपंचों और दुखों से विचलित होकर कहता है कि हे प्रभु! अब इस दुनिया में कोई अपना नहीं दिखता, केवल आप ही एकमात्र सहारा हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

"ॐ श्याम देवाय नमः" अथवा "हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा।"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम सर पे घुमा दो मोरछड़ी बाबा मोरछड़ी (Sar Pe Ghuma Do MorChhadi)
गायक कलाकार सुरेंद्र जांगिड़ (Surendra Jangdi)
आराध्य देव श्री खाटू श्याम जी (लखदातार बर्बरीक)
भाषा सरल हिंदी / राजस्थानी लोक शैली
भक्ति भाव शरणागति, विनय, प्रेम और विश्वास
उपयुक्त अवसर श्याम कीर्तन, एकादशी पूजा, जागरण, दैनिक स्मरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय श्याम भजन को प्रसिद्ध भजन गायक सुरेंद्र जांगिड़ (Surendra Jangdi) ने अपनी मधुर आवाज से सजाया है।

मोरछड़ी को खाटू श्याम जी का आशीर्वाद और दिव्य अस्त्र माना जाता है। मान्यता है कि सिर पर मोरछड़ी फेरने से सभी प्रकार के कष्ट, रोग और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

श्री खाटू श्याम जी का मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू कस्बे में स्थित है।

यह भजन किसी भी दिन गाया जा सकता है, परंतु शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी तिथि को श्याम बाबा के संकीर्तन में इसे गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

हाँ, आप इसे घर पर पूजा के समय, सुबह या शाम को अकेले या अपने परिवार के साथ पूरी भक्ति भावना के साथ गा सकते हैं।

बर्बरीक ने महाभारत युद्ध के दौरान हारे हुए पक्ष की तरफ से लड़ने का वचन दिया था, इसलिए उन्हें कलयुग में 'हारे का सहारा' कहा जाता है जो हर दुखी व्यक्ति की मदद करते हैं।

ईश्वर के गुणों और उनके नामों का संकीर्तन करने से मन का भटकाव कम होता है, तनाव दूर होता है और अंतर्मन में सकारात्मक ऊर्जा तथा शांति का अनुभव होता है।

जी हाँ, श्री खाटू श्याम मंदिर कमेटी की आधिकारिक वेबसाइट और विभिन्न सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से देश-विदेश के भक्त घर बैठे लाइव दर्शन कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

प्रस्तुत लेख में श्री खाटू श्याम बाबा के इस प्रसिद्ध भजन के लिरिक्स, अर्थ, भावार्थ और सांस्कृतिक महत्व को अत्यंत प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत किया गया है। यह सामग्री पाठकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत करने और भक्ति मार्ग पर मार्गदर्शन के लिए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री खाटू श्याम जी मंदिर समिति की ऐतिहासिक परंपराएं एवं लोक मान्यताएं।
  • भजन गायक सुरेंद्र जांगिड़ जी की आधिकारिक प्रस्तुतियाँ और लोक संगीत संग्रह।
  • पारंपरिक सनातन भजन संकीर्तन और कलयुगी महिमा ग्रंथ।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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