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स्कंदमाता की आरती | Skandamata Aarti | by Anuradha Paudwa - Bhaktilok

81 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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स्कंदमाता की आरती | Skandamata Aarti | by Anuradha Paudwa - Bhaktilok

नवरात्र के पावन पर्व पर माँ दुर्गा के पंचम स्वरूप देवी स्कंदमाता की आराधना का विशेष महत्व है। भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें 'स्कंदमाता' कहा जाता है। प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल जी की सुमधुर वाणी में गाई गई स्कंदमाता की आरती (Skandamata Aarti by Anuradha Paudwa) भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इस आरती के श्रवण और गायन से साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, आंतरिक भय दूर होते हैं और मोक्ष के मार्ग प्रशस्त होते हैं। यह पावन आरती न केवल गृहस्थ जीवन में सुख-शांति लाती है, बल्कि साधक को ఆధ్యాత్మిక उन्नति की ओर भी अग्रसर करती है। देवी स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान हैं और उनके गोद में बाल कार्तिकेय सुशोभित हैं, जो मातृत्व और वात्सल्य का सर्वोच्च प्रतीक है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जय तेरी हो स्कंदमाता, पावन नाम तुम्हारा।
सबके मन को भाती हो, जग का करो उबारा॥

सिंहासन पर बैठ, कमल दल पर तुम मुस्काती हो,
ज्ञान और कल्याण की देवी, सबका भाग्य जगाती हो।
स्कंद देव की माता तुम हो, आदि शक्ति की धारा,
शरण तिहारी जो भी आया, पाया उसने किनारा॥
जय तेरी हो स्कंदमाता...

चार भुजाओं वाली माता, वर मुद्रा में रहती हो,
भक्तों के हर संकट को, पल भर में हर लेती हो।
सूर्य मंडल की अधिदेवी, तेज तुम्हारा चमके,
कोटि सूर्य की ज्योति से भी, तेरा रूप ही दमके॥
जय तेरी हो स्कंदमाता...

जो भी सच्चे मन से आकर, शीश झुकाता है,
मनवांछित फल पाकर वह, भव से तर जाता है।
अनुराधा पौडवाल सुर में, गाए तेरी गाथा,
भक्ति भाव से पूजें तुझको, दीन-हीन सब माता॥
जय तेरी हो स्कंदमाता, पावन नाम तुम्हारा।
सबके मन को भाती हो, जग का करो उबारा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

प्रस्तुत आरती में देवी स्कंदमाता की महिमा का अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण वर्णन किया गया है। 'जय तेरी हो स्कंदमाता' पंक्ति के माध्यम से भक्त माता के चरणों में अपनी निष्ठा और श्रद्धा अर्पित करता है। देवी स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि भगवान का भक्त संसार में रहते हुए भी कमल के समान अनासक्त और पवित्र जीवन व्यतीत करे। उनकी चार भुजाएँ जीव के चारों पुरुषार्थों - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का संकेत देती हैं। सूर्य मंडल की अधिदेवी होने के कारण माता का तेज अलौकिक है, जो साधक के अंतःकरण के अज्ञान रूपी अंधकार को पूर्णतः नष्ट कर देता है। अनुराधा पौडवाल जी की स्वर लहरियों में सजी यह आरती भक्त के हृदय में दिव्यता और समर्पण का भाव जागृत करती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह आरती नवरात्र के पंचम दिवस पर विशेष रूप से गाई और सुनी जाती है। स्कंदमाता की उपासना करने से बुद्धि, ज्ञान और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस भजन की विशेषता यह है कि इसके शब्द अत्यंत सरल, लयबद्ध और हृदयस्पर्शी हैं, जिन्हें सरलता से याद किया जा सकता है। इसका निरंतर श्रवण करने से मन की चंचलता शांत होती है और एकाग्रता बढ़ती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

स्कंदमाता की आरती का पाठ सुबह की पूजा के समय या संध्याकालीन वेला में करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है। दीपक और धूप प्रज्वलित करके, माता के विग्रह के समक्ष श्रद्धापूर्वक इस आरती का गान करने से घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है। नवरात्र के पांचवें दिन विशेष हवन और अनुष्ठान के समय इस आरती का सामूहिक गान विशेष रूप से किया जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस आरती की मुख्य आराध्य देवी स्कंदमाता हैं, जो माँ दुर्गा का पंचम स्वरूप हैं। इनके साथ ही देव सेना के नायक भगवान कार्तिकेय (स्कंद) का भी स्मरण होता है। इस भजन की लोकप्रिय प्रस्तुति प्रसिद्ध भक्ति गायिका अनुराधा पौडवाल द्वारा दी गई है, जिन्होंने अपनी सुमधुर आवाज से इस आरती को जन-जन तक पहुँचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह आरती पारंपरिक पौराणिक स्तुतियों और देवी भागवत पुराण में वर्णित स्कंदमाता के स्वरूप पर आधारित है। समकालीन भक्ति संगीत परंपरा में इसे आधुनिक धुनों और शास्त्रीय संगीत के मिश्रण के साथ ढाला गया है ताकि युवा पीढ़ी भी अपनी संस्कृति और देवी आराधना से जुड़ सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सहज, सरल और प्रवाहित हिंदी है, जिसमें ब्रज और अवधि के कुछ लोकगीत शैली के प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जो इसके काव्य सौंदर्य को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि मातृत्व और वात्सल्य में ईश्वर का साक्षात वास होता है। जिस प्रकार स्कंदमाता अपने पुत्र स्कंद का पालन-पोषण करती हैं और भक्तों पर अपनी करुणा बरसाती हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने जीवन में प्रेम, करुणा और वात्सल्य का विस्तार करना चाहिए। निष्काम भाव से की गई आराधना ही सच्ची भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल अर्थ संदर्भ
स्कंदमाता कार्तिकेय (स्कंद) की माता देवी दुर्गा का पंचम रूप
सिंहासन सिंह रूपी आसन माता की सवारी
कमल दल कमल के फूल की पंखुड़ी पवित्रता और अनासक्ति का प्रतीक
अधिदेवी प्रधान देवी या नियंत्रक शक्ति सूर्य मंडल की संचालक शक्ति

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

आरती की शुरुआत 'जय तेरी हो स्कंदमाता' से होती है, जिसका अर्थ है कि हे माँ! आपकी जय हो, आपका नाम समस्त पापो का नाश करने वाला है। 'सिंहासन पर बैठ, कमल दल पर तुम मुस्काती हो' पंक्ति का भाव है कि माता कमल पर विराजमान होकर संसार को अभयदान देती हैं। 'चार भुजाओं वाली माता, वर मुद्रा में रहती हो' यह दर्शाती है कि माता के हाथ हमेशा अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए तत्पर रहते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

इस पावन श्लोक का पाठ करने से देवी स्कंदमाता की विशेष कृपा प्राप्त होती है और साधक के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। नवरात्र के पांचवें दिन दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ इस श्लोक का उच्चारण अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन / आरती का नाम स्कंदमाता की आरती (Skandamata Aarti)
प्रसिद्ध गायक अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal)
आराध्य देवी माँ स्कंदमाता (पंचम नवरात्र)
भाषा हिंदी
भक्ति भाव समर्पण, वात्सल्य और श्रद्धा
उपयुक्त अवसर नवरात्र का पाँचten दिन, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

स्कंदमाता की आरती मुख्य रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्र के पाँचवें दिन (पंचमी तिथि) गाई जाती है, हालांकि दैनिक पूजा में भी इसका नियमित पाठ किया जा सकता है।

स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (जिनका दूसरा नाम स्कंद है) की माता हैं। इन्हें देवी दुर्गा का पंचम स्वरूप माना जाता है जो ज्ञान, मोक्ष और संतान सुख प्रदान करती हैं।

आप इस आरती को विभिन्न संगीत प्लेटफार्मों, यूट्यूब और धार्मिक पोर्टल्स जैसे भक्तलोक (Bhaktilok) पर आसानी से सुन और पढ़ सकते हैं।

स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को मोक्ष, शक्ति, ज्ञान और संतान सुख की प्राप्ति होती है। साधक के सभी प्रकार के कष्ट और भय दूर हो जाते हैं।

स्कंदमाता की पूजा में हरा रंग अत्यधिक शुभ और प्रिय माना जाता है, जो हरियाली, समृद्धि और जीवन में नई ऊर्जा का प्रतीक है।

आरती के दौरान शुद्धता, पवित्रता, और पूर्ण भक्ति भाव का ध्यान रखना चाहिए। थाली में दीपक, कपूर, फूल और धूपबत्ती रखकर क्लॉकवाइज दिशा में घुमाना चाहिए।

हाँ, इस आरती का पाठ गृहस्थ अपने घर के मंदिर में परिवार सहित पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ कर सकते हैं।

माता स्कंदमाता को केले का भोग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसके अलावा मिष्ठान और ताजे फलों का भोग भी अर्पित किया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह आलेख सनातन धर्म की परंपराओं, पुराणों में वर्णित देवी स्वरूपों और लोकप्रिय भक्ति संगीत के संकलन के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक और सुंदर धार्मिक सामग्री प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

देवी भागवत पुराण, मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती), पारंपरिक नवरात्र पूजन पद्धतियाँ तथा अनुराधा पौडवाल द्वारा प्रस्तुत भक्ति संगीत संग्रह।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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