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Krishna Bhajan

मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे (श्री राधा वल्लभ संकीर्तन) लिरिक्स | Main Radha Vallabh Ki Radha Vallabh Mere Shri Radha Vallabh Sankirtan Lyrics

266 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 मैं राधा वल्लभ की – राधा वल्लभ मेरे

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Main Radha Vallabh Ki – Radha Vallabh Mere) – श्री राधा वल्लभ संकीर्तन

🌸 राधा वल्लभ – कृष्ण का राधा प्रिय स्वरूप | पूर्ण समर्पण और शरणागति का संकीर्तन

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: राधा-कृष्ण भजन / संकीर्तन / शरणागति
🎶 भाव: समर्पण, आत्मीयता, श्रद्धा, निस्वार्थ प्रेम
📍 विशेषता: राधा वल्लभ (कृष्ण) के साथ अपने नित्य संबंध का स्मरण, भटकने के बाद शरणागति
📀 प्रचलन: राधा वल्लभ सम्प्रदाय और राधा-कृष्ण भक्तों में अत्यंत प्रिय संकीर्तन

📜 संकीर्तन लिरिक्स (हिन्दी में)

मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे

तुम सदा-सदा से मेरे
राधा वल्लभ मेरे
तुम सदा-सदा से मेरे
राधा वल्लभ मेरे
तुम सदा-सदा से मेरे
राधा वल्लभ मेरे

हम सदा-सदा से तेरे
राधा वल्लभ मेरे
हम सदा-सदा से तेरे
राधा वल्लभ मेरे
हम सदा-सदा से तेरे
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे

हम भटक चुके बहुतेरे
राधा वल्लभ मेरे
हम दुख पाए बहुतेरे
राधा वल्लभ मेरे
हम दुख पाए बहुतेरे
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे

अब रखिए अपने नेरे
राधा वल्लभ मेरे
तुम सदा-सदा से मेरे
राधा वल्लभ मेरे
हम सदा-सदा से तेरे
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे

जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश
जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद
जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश
जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद
जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश
जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद
जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश
जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद

मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे
मैं राधा वल्लभ की
राधा वल्लभ मेरे

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / राधा वल्लभ संकीर्तन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह श्री राधा वल्लभ संकीर्तन अत्यंत सरल किन्तु गहन समर्पण भाव से युक्त है। “मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे” – भक्त कहता है कि मैं राधा वल्लभ (श्रीकृष्ण) का हूँ, और राधा वल्लभ मेरे हैं। यह परस्पर संबंध का स्मरण है – जैसे राधा और कृष्ण अभिन्न हैं, वैसे ही भक्त और प्रभु का संबंध भी नित्य और अटूट है।

“तुम सदा-सदा से मेरे” और “हम सदा-सदा से तेरे” – यह दोहराव भक्त के विश्वास को दृढ़ करता है कि यह संबंध अनादि है, सदा से है और सदा रहेगा। यह भक्ति का अभेद भाव है – जहाँ “मैं तुम्हारा” और “तुम मेरे” का अहसास होता है।

“हम भटक चुके बहुतेरे, हम दुख पाए बहुतेरे” – भक्त स्वीकार करता है कि उसने संसार में बहुत भटकना और दुख सहा है। अब वह थक गया है और राधा वल्लभ की शरण में आता है। “अब रखिए अपने नेरे” – अब हमें अपने पास (समीप) रखिए।

अंत में जयघोष है – “जय जय राधावल्लभ श्री हरिवंश, जय जय श्री वृन्दावन श्री वनचंद” – राधा वल्लभ (कृष्ण) की जय, और श्री वृन्दावन (जहाँ रास-लीला होती है) के वनचंद (चंद्रमा के समान सुंदर) की जय।

यह संकीर्तन सिखाता है कि सच्चा भक्त वह है जो स्वयं को पूर्ण रूप से राधा वल्लभ को समर्पित कर देता है, और यह जानता है कि उसका प्रभु भी सदा उसके साथ है। यह भक्ति में पूर्ण आत्मसमर्पण और विश्वास का गीत है।

🔍 संकीर्तन का विशेष महत्त्व

राधा वल्लभ सम्प्रदाय: यह भजन राधा वल्लभ सम्प्रदाय (हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा स्थापित) में अत्यंत महत्वपूर्ण है। “राधा वल्लभ” का अर्थ है राधा के प्रिय – श्रीकृष्ण। इस सम्प्रदाय में राधा को सर्वोपरि माना जाता है और कृष्ण उनके वश में हैं।

“मैं राधा वल्लभ की” – समर्पण का उच्चतम भाव: यह पंक्ति बताती है कि भक्त का सर्वस्व राधा वल्लभ हैं, और वह उनका है। इसमें किसी प्रकार की शर्त या अपेक्षा नहीं, केवल समर्पण है।

भटकने के बाद शरणागति: “हम भटक चुके बहुतेरे” – यह स्वीकारोक्ति बहुत महत्वपूर्ण है। सच्चा भक्त वही है जो अपनी असफलताओं और भटकन को स्वीकार करता है और फिर प्रभु की शरण में आता है।

💖 राधा वल्लभ के प्रति समर्पण

🎯 संदेश

जब भक्त सच्चे मन से कहता है “मैं राधा वल्लभ की”, तो वह अपना अहंकार, अपनी स्वतंत्रता और अपनी सारी चिंताएँ प्रभु को सौंप देता है। राधा वल्लभ उसके सदा अपने रहते हैं, और भक्त सदा उनका।

✨ आस्था का प्रतीक

यह संकीर्तन राधा-कृष्ण भक्ति के गहरे रस में डुबो देता है। “राधा वल्लभ मेरे” के बार-बार दोहराने से भक्त के हृदय में अपनत्व और विश्वास का संचार होता है।

🙏 राधे-राधे ।। जय राधा वल्लभ ।। जय श्री वृन्दावन धाम ।।

॥ इति राधा वल्लभ संकीर्तन सम्पूर्णम् ॥
॥ मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे – तुम सदा-सदा से मेरे, हम सदा-सदा से तेरे ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे (श्री राधा वल्लभ संकीर्तन) लिरिक्स | Main Radha Vallabh Ki Radha Vallabh Mere Shri Radha Vallabh Sankirtan Lyrics" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

श्रेणियां: Krishna Bhajan radha bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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