Parvati Stotram

जिस घर में मैया का सुमिरन होता || Jis Ghar Me Maiya Ka Sumiran Hota || Mata Rani Bhajan - Bhaktilok

155 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

माँ दुर्गा का भक्ति गीत: सुख समृद्धि का आसमान

इस भजन के माध्यम से माता की कृपा से सुख और समृद्धि का अनुभव करें, इसे गाकर मन की श्रद्धा को बढ़ाएँ।

जिस घर में मैया का सुमिरन होता || जिस घर में मैया का सुमिरन होता, उस घर में सुख समृद्धि, धाम का चिरनिधन होता।। . जिस घर में मैया का सुमिरन होता, उस घर में सुख समृद्धि, धाम का चिरनिधन होता।। . जिस मन में भक्ति का सुमिरन होता, उस मन में प्रेम की, संजीवनी निदान होता।। . जिस मन में भक्ति का सुमिरन होता, उस मन में प्रेम की, संजीवनी निदान होता।। . जय माता दी।। जय माता दी।। जय माता दी।। जय माता दी।। .
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ दुर्गा की स्तुति की गई है, जहाँ यह कहा गया है कि जिस घर में उनकी भक्ति और सुमिरन किया जाता है, वहाँ पर सुख और समृद्धि का निवास होता है। यह पंक्तियाँ भक्तों को प्रेरित करती हैं कि वे अपने घर में रोजाना माँ की पूजा और स्मरण करें जिससे उनके घर में दिव्यता बनी रहे। 'जिस घर में मैया का सुमिरन होता' का अर्थ है कि जब हम माता की याद करते हैं, तो न केवल हमारे जीवन में सुख आता है, बल्कि घर में प्रेम और एकता का माहौल भी बनता है। माँ दुर्गा की उपासना से हर चारों ओर सकारात्मकता का संचार होता है। उनकी महिमा का गुणगान करते हुए यह गीत भक्ति की शक्ति को उभारता है, अर्थात्, भक्ति ही हमारी जीवनधारा है।

इस भजन की भावनाओं में गहराई से यह जिज्ञासा है कि कैसे भक्ति के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन में सुख और शांति अनुभव कर सकता है। 'जिस मन में भक्ति का सुमिरन होता' से यह संकेत मिलता है कि मात्र शब्दों की अपील नहीं है, बल्कि एक गहरी आस्था है जो भक्त को विस्तार में ले जाती है। यह भजन हमें बताता है कि भक्ति के जरिए हम कौन सी भावना को ग्रहण करते हैं, जैसे प्रेम, अहिंसा, और सामंजस्य। यह पंक्तियाँ हमें उन कठिनाइयों को पार करने की प्रेरणा देती हैं, जो जीवन में आती हैं, क्योंकि माँ दुर्गा सभी भक्तों के संकट दूर करती हैं।

भक्ति मार्ग के संबंध में, यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति ही मोक्ष की प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग है। यहाँ 'सुमिरन' का अर्थ है ध्यान और स्मरण। जब हम माँ दुर्गा का सुमिरन करते हैं, तब हम अपने भीतर के नकारात्मकता को समाप्त करते हैं और आत्मा को शुद्ध करते हैं। यही कारण है कि सभी धर्मों में ध्यान एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भक्ति का यह मार्ग हमें उचित विचार करने, अच्छे कर्म करने और माँ की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। इस प्रकार, यह भजन हमें भक्ति के महत्व को समझाने के साथ-साथ आत्मा की शुद्धता के लिए भी उच्तान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय संस्कृति में अत्यधिक है, जहाँ माता दुर्गा को शक्ति और करुणा की देवी माना जाता है। पुराणों में माँ दुर्गा का वर्णन इस प्रकार किया गया है कि जब संसार में अत्याचार बढ़ा, तब उन्होंने दुष्टों का संहार किया। यह भजन इस विश्वास को दर्शाता है कि यदि हम अपने मन और घर में माँ का स्मरण करते हैं, तो उनकी कृपा से सभी बुराइयाँ समाप्त हो जाती हैं और सुख की प्रचुरता आती है। महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में भक्ति की शक्ति को विशिष्टता से दर्शाया गया है, जो इस भजन के प्रेरित न्याय के मूल्य को और भी मजबूती देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आत्म-संयम और ऊर्जा में वृद्धि होती है। इसके माध्यम से व्यक्ति तनाव और चिंता को दूर कर सकता है, जिससे मन की शांति बढ़ती है। भक्ति के इस मार्ग से रोग और व्याधियों से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है, और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह का प्रिय समय होता है, जब वातावरण शुद्ध होता है। भक्तों को चाहिए कि वे पूजा से पहले स्वच्छता का ध्यान रखें, एक दीपक लगाएँ, और माँ दुर्गा को फूल और नैवेद्य अर्पित करें। मानसिक एकाग्रता के साथ बैठकर गद्दी पर या आसन पर एक शांत मन से इसका जाप करें। सच्चे मन से सुमिरन करने से माँ का आशीर्वाद अवश्य मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है माता दुर्गा की भक्ति और सुमिरन के जरिए सुख-संपत्ति और शांति प्राप्त करना। यह दर्शाता है कि माता का स्मरण करने से नकारात्मकता दूर होती है।

इस भजन का जप करने का सही समय कौन सा है?

इस भजन का जप सुबह के समय अवश्य करना चाहिए, जिससे सकारात्मक ऊर्जा के साथ दिन की शुरुआत हो सके और दिन भर की कठिनाईयों का सामना किया जा सके।

भजन का जाप करते समय क्या ध्यान रखना चाहिए?

भजन का जाप करते समय मन को एकाग्र रखना चाहिए और सकारात्मक भावनाओं का संचार करना चाहिए। इसके साथ ही, माता को फूल, दीपक अर्पित करना भी आवश्यक है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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