Hanuman Bhajan

जग में जय जय कार है | Jag Main Jai Jai Kar Hai | Ram Kumar Lakha | Hanuman Ji Bhajan Shraddha - BhaktiLok

92 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जग में जय जय कार है | Jag Main Jai Jai Kar Hai | Ram Kumar Lakha | Hanuman Ji Bhajan Shraddha - BhaktiLok

सनातन भक्ति परंपरा में संगीत, स्वर और साधना का त्रिवेणी संगम भक्तों को सीधे भगवत चरणों से जोड़ने का माध्यम बनता है। प्रसिद्ध भजन गायक राम कुमार Lakha जी की सुमधुर वाणी में गाया गया यह पावन भजन "जग में जय जय कार है | Jag Main Jai Jai Kar Hai" पवनसुत हनुमान जी की महिमा, पराक्रम और श्री राम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति का अद्भुत गुणगान करता है। हनुमान जी को संकटमोचन, अष्टसिद्धि और नौ निधि के दाता के रूप में पूजा जाता है। जब कोई भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी के चरणों में अपनी अर्जी लगाता है, तो उसके जीवन के समस्त अमंगल दूर हो जाते हैं। इस भजन के बोल न केवल कानों को तृप्त करते हैं, बल्कि श्रोता के अंतःकरण में हनुमान जी की असीम ऊर्जा और वीरता का संचार करते हैं। सुबह की बेला में अथवा संध्याकालीन पूजन के समय इस भजन का स्मरण करने से मन को अलौकिक शांति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:
जग में जय जय कार है, बजरंगबली की!
भक्तों के संकट हरने वाले, महाबली की!
जग में जय जय कार है...
अंजनी के लाल की, पवनसुत हनुमान की!
राम भक्त हनुमान की, जय जय कार है!

अंतरा 1:
लंका को पल में जला डाला रे,
रावण का मान मर्दन कर डाला रे!
माता सीता की सुधि लाए, राम का संदेश सुनाए,
ऐसे वीर बलवान की, जग में जय जय कार है!
जग में जय जय कार है, बजरंगबली की!

अंतरा 2:
लक्ष्मण जी के प्राण बचाए, संजीवनी बूटी ले आए,
पर्वत को हाथ उठाए, आकाश मार्ग अपनाए!
चरणों में जिनके बैकुण्ठ विराजे, ऐसे प्रभु हनुमान की,
जग में जय जय कार है, बजरंगबली की!

अंतरा 3:
जो कोई ध्यावे फल पावे, दुःख दरिद्र दूर भगावे,
भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावै!
भक्तों की रक्षा करने वाले, संकटमोचन प्राण की,
जग में जय जय कार है, बजरंगबली की!

अंतिम चरण:
राम नाम अति प्यारा जिनको, सियाराम बसै मन जिनके,
राम कुमार गाए गुण इनके, कृपा होए सब पर इनकी!
बोलो बजरंगबली की जय, संकटमोचन हनुमान की जय!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन हनुमान जी के दिव्य चरित्र, उनकी शक्ति, भक्ति और शरणागति का अति सुंदर सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है। भजन के मुखड़े में ही यह उद्घोष किया गया है कि इस संपूर्ण संसार में केवल और केवल बजरंगबली की ही जय-जयकार है, क्योंकि वे अपने भक्तों के समस्त संकटों को पलभर में हर लेते हैं। उन्हें माता अंजनी का लाल और वायुदेव का पुत्र (पवनसुत) कहा गया है, जो अपनी वीरता और बुद्धि के लिए त्रिलोकी में प्रसिद्ध हैं।

पहले अंतरे में लंका दहन और रावण के अहंकार के विनाश का प्रसंग है। हनुमान जी ने अपनी शक्ति का परिचय देते हुए लंका को जलाया और माता सीता की खोज कर प्रभु श्री राम को उनका संदेश सुनाया। यह प्रसंग हमें यह सिखाता है कि जब हमारे पास अटूट विश्वास और राम नाम का बल हो, तो बड़े से बड़ा असंभव कार्य भी संभव हो जाता है।

दूसरे अंतरे में लक्ष्मण मूर्छा के समय संजीवनी बूटी लाने के पराक्रम का वर्णन है। द्रोणागिरी पर्वत को उठाकर लाने की उनकी क्षमता उनके असीम बल और श्री राम के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाती है। तीसरे अंतरे में उनके महात्म्य का बखान करते हुए कहा गया है कि उनके स्मरण मात्र से भूत, पिशाच और सभी प्रकार के भय दूर हो जाते हैं। जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी शरण में जाता है, उसके जीवन के सभी कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका ओजस्वी स्वर और सरल भाषा है, जिसे राम कुमार Lakha जी ने अपनी अनूठी शैली में गाया है। हनुमान जी कलयुग के प्रत्यक्ष देवता माने गए हैं। तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री हनुमान चालीसा के समान ही यह भजन भी भक्तों में सकारात्मक ऊर्जा और भयमुक्ति का संचार करता है। इसे सुनने मात्र से मन के अंदर छिपे हुए डर, संशय और हीनभावना का नाश होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान मंदिर में, घर की पूजा के समय या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान (सत्संग, रामायण पाठ) के अवसर पर गाया जा सकता है। प्रातःकाल स्नान के पश्चात लाल या पीले वस्त्र धारण करके, हनुमान जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर इस भजन का श्रवण और गायन अत्यंत फलदायी माना गया है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य भगवान श्री हनुमान जी हैं, जो भगवान श्री राम के परम भक्त और सेवा के सर्वोच्च प्रतीक हैं। इस भजन को स्वरबद्ध करने वाले प्रसिद्ध भजन गायक राम कुमार Lakha हैं, जिन्होंने अपनी असीम भक्ति और साधना से सनातन संगीत जगत में अनगिनत लोकप्रिय भजन भेंट किए हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन की रचना पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय संगीत के सम्मिश्रण पर आधारित है। राम कुमार Lakha की गायकी की विशेषता यह है कि वे शब्दों का उच्चारण अत्यंत स्पष्टता और संपूर्ण भाव के साथ करते हैं, जिससे श्रोता तुरंत भक्ति रस में डूब जाता है। यह भजन सदियों पुरानी हनुमान भक्ति परंपरा को आधुनिक संगीत के माध्यम से जीवंत करता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल ब्रज-प्रभावित हिंदी और खड़ी बोली के सुंदर समन्वय से रचित है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। काव्य शैली इतनी प्रवाहमयी है कि बच्चे से लेकर वृद्ध तक इसे आसानी से गुनगुना सकते हैं और इसके मर्म को समझ सकते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधाएं क्यों न आएं, यदि मन में प्रभु राम का नाम और हनुमान जैसी निष्ठा हो, तो हर संकट को पार किया जा सकता है। यह शरणागति, विनम्रता, निस्वार्थ सेवा और अटूट आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

,
शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ संदर्भ
बज्रंबलीजिसका शरीर वज्र के समान कठोर और बलवान हो हनुमान जी का विशेष नाम
पवनसुत वायु देवता (पवन) के पुत्र हनुमान जी की उत्पत्ति
संकटमोचन समस्त संकटों को दूर करने वाले हनुमान जी का गुण
संजीवनी मृतप्राय व्यक्ति को जीवन देने वाली बूटी लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जग में जय जय कार है, बजरंगबली की..."
अर्थात संपूर्ण ब्रह्मांड में हनुमान जी की ही कीर्ति और जय-जयकार सर्वत्र व्याप्त है। वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
"लंका को पल में जला डाला रे..."
अर्थात अपनी बुद्धि और पराक्रम से उन्होंने रावण की सोने की लंका को क्षणभर में भस्म कर दिया और अधर्म का नाश किया।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी होता है:

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जग में जय जय कार है (Jag Main Jai Jai Kar Hai)
आराध्य देव भगवान श्री हनुमान जी
गायक राम कुमार Lakha
भाषा हिंदी / अवधी मिश्रित
मुख्य थीम हनुमान भक्ति, शक्ति और शरणागति
शुभ अवसर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, संकट मोचन पूजन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'जग में जय जय कार है' भजन के गायक कौन हैं?

इस लोकप्रिय भजन के गायक प्रसिद्ध श्री राम और हनुमान भक्त गायक श्री राम कुमार Lakha जी हैं।

यह भजन मुख्य रूप से किस देवता को समर्पित है?

यह भजन संकटमोचन भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित है।

इस भजन को किस दिन सुनना सबसे उत्तम माना जाता है?

इस भजन को विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

हनुमान जी के स्मरण से कौन-से लाभ मिलते हैं?

हनुमान जी के स्मरण और भजन से भय, रोग, बाधाएं दूर होती हैं और बल, बुद्धि तथा विद्या की प्राप्ति होती है।

क्या इस भजन को घर पर नियमित रूप से गाया जा सकता है?

हाँ, घर में प्रातःकाल या संध्या वंदना के समय इस भजन को गाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

भजन में राम कुमार Lakha की गायकी की क्या विशेषता है?

उनकी गायकी में ठेठ भक्ति भाव, स्पष्ट उच्चारण और गहरी ऊर्जा होती है जो श्रोता को मंत्रमुग्ध कर देती है।

हनुमान जी को संकटमोचन क्यों कहा जाता है?

क्योंकि वे अपने भक्तों के बड़े से बड़े संकटों और कष्टों को चुटकियों में दूर कर देते हैं।

इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?

भक्ति, निष्ठा और भगवान राम के चरणों में पूर्ण समर्पण ही समस्त विजय का आधार है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तों की आध्यात्मिक जिज्ञासाओं और प्रामाणिक धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें प्रयुक्त शब्द और भाव सनातन संस्कृति के मूल सिद्धांतों के अनुकूल हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी
  • पारंपरिक हनुमान भजन संग्रह एवं लोकगाथाएं
  • सनातन भक्ति संगीत परंपरा और ग्रंथ

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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