Parvati Stotram

Santoshi Mata Jaap Mantra 108 times | Varsha Shrivastava | संतोषी माता मंत्र-Bhaktilok

141 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

संतोषी माता: सुख और शांति की देवी

संतोषी माता के इस भजन का जाप करें और अनुभव करें भक्ति के सच्चे सुख का।

ॐ जय संतोषी माता, तुम हो सुख-शांति की दाता। हर संकट में हो तुम सहारा, सुख-समृद्धि का करो सवेरा। सुख दायिनी, भक्ति की रक्षक। संतोषी माता, तुम हो सबका भला। हर दिन हर पल करूँ तुम्हारा जाप, संतोषी माता, तुम हो मेरे आप। ॐ जय संतोषी माता, तुम हो सुख-शांति की दाता। कामनाएँ हो सब पूर्ण, तुमसे ही मिली है सुरक्षा। सुख दायिनी, भक्ति की रक्षक। जय जय संतोषी माँ। ॐ जय संतोषी माता, तुम हो सुख-शांति की दाता। हर दुख-दर्द का करो अंत, तुम बनो मेरे जीवन का संत। संतोषी माता, तुम हो सबका भला। जय जय संतोषी माता।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संतोषी माता का नाम ही संतोष का प्रतीक है। इस भजन में भक्त संतोषी माता की स्तुति करते हुए उन्हें सुख-शांति की दाता के रूप में मानते हैं। यह भाव भक्त को यह संदेश देता है कि संकटों के समय माता ही सहारा बन सकती हैं। माता को समर्पित इस जाप से भक्त का मन संतुष्ट और शांत होता है। हर एक पंक्ति में संतोषी माता की महिमा का बखान किया गया है, जो हर संकट में भक्त को सहारा देती हैं। उनकी कृपा से हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य संतोषी माता की महिमा का गुणगान करना और उनके प्रति असीम श्रद्धा प्रकट करना है।

भजन का भावार्थ भक्त के मन में संतोष और सुख के भाव को विकसित करना है। जब भक्त लगातार माता का जाप करता है, तो उसका मन निरंतर सुख और शांति की ओर अग्रसर होता है। 'हर दिन हर पल करूँ तुम्हारा जाप' पंक्ति से भक्त का यह दृढ़ संकल्प स्पष्ट होता है कि वे माँ की कृपा में विश्वास रखते हैं। इसके माध्यम से वे अपने जीवन का हर संकट समाप्त करने का संकल्प लेते हैं। इस भजन का उद्देश्य ना केवल भक्त को संतोषी माता की महिमा का एहसास कराना है, बल्कि उन्हें जीवन में सकारात्मकता और आशा प्रदान करना भी है।

इस भजन में भक्तिरस की अद्भुत प्रस्तुति की गई है। संतोषी माता को भक्ति मार्ग का प्रतीक मानते हुए इस भजन में विश्वास और श्रद्धा की गहरी भावना को देखा जा सकता है। भक्त यह मानता है कि सच्चे मन से किया गया जाप हर बाधा को दूर करता है और जीवन को सुख-शांति की ओर ले जाता है। भक्ति मारग का यह अनूठा रूप हर व्यक्ति को अपने कर्मों की पवित्रता और दूसरों के प्रति दया का पाठ पढ़ाता है। संतोषी माता का यह जाप हमें खुद का और जगत का ध्यान रखने के लिए प्रेरित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

संतोषी माता का महत्वपूर्ण स्थान भारतीय धार्मिक परंपरा में है। यह देवी मुख्यतः दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष रूप से पूजी जाती हैं। उन्हें 'सुख और संतोष की देवी' माना जाता है और कई पुराणों में उनका उल्लेख मिलता है। भक्त संतोषी माता से दैविक कृपा प्राप्त करने के लिए अनेकों तरीकों से पूजा करते हैं, जिसमें साधारण फलों और मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। इसके पीछे का मान्यता है कि माता तृप्त होती हैं और भक्तों के दुख-दर्द को दूर करती हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से संतोषी माता का पूजन करते हैं, उन्हें शीघ्र ही फल प्राप्त होते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। संतोषी माता का जाप करने से मानसिक शांति, आत्म-संतोष, और सकारात्मकता का अनुभव होता है। यह मानसिक तनाव को कम करने और आत्मबल को बढ़ाने में सहायक होता है। भक्तों को इस जाप से जीवन में सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। नियमित रूप से माता का भजन करने से न केवल भौतिक सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि आत्मिक उन्नति भी होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

संतोषी माता की साधना सुबह के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। स्नान के बाद, एक साफ स्थान पर आसन लगाकर बैठें। दीया जलाकर माता के सामने संतोषी माता की तस्वीर रखें और उन्हें चना और गुड़ का भोग अर्पित करें। इससे माता की कृपा बढ़ती है। भक्त को मानसिक रूप से सकारात्मक और समर्पित रहना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

संतोषी माता का जाप क्यों करें?

संतोषी माता का जाप करने से मानसिक शांति, संतोष और सुख की प्राप्ति होती है। यह संकटों से मुक्ति दिलाने में भी सहायक होता है।

क्या संतोषी माता की पूजा में विशेष सामग्री की जरूरत है?

संतोषी माता की पूजा में मुख्यतः गुड़, चना, और फूलों की आवश्यकता होती है। ये सामग्री माता को बेहद प्रिय होती हैं।

कितने बार संतोषी माता का जाप करना चाहिए?

संतोषी माता का जाप कम से कम 108 बार करना उत्तम माना जाता है, जिससे संकल्प शक्ति और भक्ति दोनों में वृद्धि होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!