Parvati Stotram

मंगल मूर्ति राम दुलारे| Mangal Murti Ram Dulare-Bhaktilok

98 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मंगल मूर्ति राम दुलारे भजन का परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

सनातन धर्म और भक्ति परंपरा में भगवान श्री राम के पावन चरित्र का स्मरण करनामात्र से मनुष्य के समस्त भौतिक एवं आध्यात्मिक संताप दूर हो जाते हैं। "मंगल मूर्ति राम दुलारे" भजन भगवान श्रीराम के परम भक्त, संकटमोचन श्री हनुमान जी और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की संयुक्त महिमा का गुणगान करने वाला एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय स्तोत्र है। इस भजन के माध्यम से साधक भगवान राम और उनके अनन्य भक्त हनुमान जी की कृपा सहज ही प्राप्त करता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस और विनय पत्रिका के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम और उनके दुलारे (हनुमान जी) का स्मरण जीवन की हर बाधा को पार कराने में सक्षम है। इस भजन की लय, शब्द और इसका आंतरिक भाव साधक को सीधे साकेत धाम और किष्किंधा की पावन चेतना से जोड़ता है। जब कोई भक्त इस भजन का गान या श्रवण करता है, तो उसके अंतःकरण में अदम्य साहस, संयम, धर्मपरायणता और अनन्य शरणागति का भाव जागृत होता है। कलयुग में भगवान श्रीराम के नाम का जाप और हनुमान जी की उपासना को सर्वोत्तम साधन माना गया है, और यह भजन उसी परंपरा की एक अनमोल निधि है जो भक्तों को भक्ति और शक्ति दोनों का एक साथ अनुभव कराती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मंगलगौरव, पावन कीर्ति, मंगल मूर्ति राम दुलारे।
सिंधु तरन गाए जाहि यश, संकट मोचन प्राण हमारे॥

मंगल मूर्ति राम दुलारे, पवनसुत बलधाम पारे।
अंजनि नंदन संकट हरण, सुमिरत ही मन हरषे सारे॥
कंचन बरन सुभग सुवेसा, कानन कुण्डल कुंचित केशा।
हाथ बज्र औ ध्वजा विराजे, कांधे मुंज जनेऊ साजे॥

संजीवन लाये सुत हनुमान, लक्ष्मण जी के प्राण बचाये।
देवन सुर मुनि करत बड़ाई, राम भक्त सिरमौर कहाये॥
विद्या गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा, बिकट रूप धरि लंका जरावा।
भीम रूप धरि असुर संहारे, राम चंद्र के काज संवारे॥
लाय संजीवन प्राण उबारे, दीन दयाल के प्यारे दुलारे।
जो जन ध्यावे फल पावे, संकट कटै मिटै सब पीरा॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्ध साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय महं डेरा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान श्रीराम के परम प्रिय हनुमान जी के रूप, शील, शक्ति और उनके महान पराक्रम का अत्यंत सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है। 'मंगल मूर्ति राम दुलारे' का अर्थ है वे पावन विग्रह वाले हनुमान जी जो भगवान श्री राम को अत्यंत प्रिय हैं और जिनके स्मरण मात्र से जीवन में मंगल और कल्याण का आगमन होता है। भजन के प्रथम चरण में उनके स्वर्ण समान कांतिमान शरीर, सुंदर वेशभूषा, कानों में चमकते कुण्डल और घुंघराले बालों का वर्णन किया गया है। उनके हाथ में सुशोभित वज्र और ध्वजा उनके अजेय पराक्रम का प्रतीक हैं।

भजन के अगले भाग में हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाने की ऐतिहासीक और पौराणिक घटना का स्मरण कराया गया है। इस प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि संकट के समय जो भक्त पूरी निष्ठा से भगवान की शरण में जाते हैं, उनके सभी कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं। वे बुद्धिमान, गुणवान और राम जी के कार्यों को तत्परता से पूरा करने वाले हैं। लंका दहन, असुर संहार और माता सीता की खोज जैसे कठिन कार्यों को उन्होंने अपनी भक्ति और शक्ति से सहज ही पूर्ण किया। अंत में, यह भाव व्यक्त किया गया है कि जो भी भक्त सच्चे हृदय से इस स्तोत्र का गान करता है, उसके जीवन से सभी भय, पीड़ा और संताप दूर हो जाते हैं और उसे भगवान श्रीराम के चरणों में अचल भक्ति प्राप्त होती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह राम और हनुमान के अटूट संबंध को समर्पित है। हनुमान जी को श्रीराम का 'दुलारा' कहा गया है, जिसका अर्थ है कि जो भगवान श्रीराम की कृपा पाना चाहता है, उसे हनुमान जी की शरण में अवश्य जाना चाहिए। सनातन संस्कृति में श्री हनुमान चालीसा और इस प्रकार के भजनों का पाठ करने से मानसिक शांति, एकाग्रता और आंतरिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह भजन साधक के भीतर छिपे डर, निराशा और मानसिक दुर्बलता को दूर कर आत्मबल और सकारात्मकता का संचार करता है। इसे नियमित रूप से सुबह या संध्या वंदन के समय गाने से घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन का गान और श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इसे प्रातःकाल स्नान के पश्चात मंदिर में अथवा संध्याकालीन आरती के समय गाना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से हनुमान मंदिर में अथवा घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करके इस भजन का सस्वर पाठ करना चाहिए। गान करते समय शरीर और मन की पवित्रता का ध्यान रखें तथा पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ इसे उच्चारित करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और उनके अनन्य भक्त, संकटमोचन श्री हनुमान जी हैं। साथ ही, इस स्तुति परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास जी जैसे महान संतों का आशीर्वाद निहित है जिन्होंने रामभक्ति को जन-जन तक पहुँचाया। भगवान राम धर्म, मर्यादा और सत्य के प्रतीक हैं, जबकि हनुमान जी शक्ति, बुद्धि, निष्ठा और सेवा के सर्वोच्च आदर्श हैं। इन दोनों महाशक्तियों की कृपा एक साथ प्राप्त करने के लिए यह भजन अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना पारंपरिक अवधी और ब्रज मिश्रित लोक शैली में हुई है, जो संत तुलसीदास जी और उनके अनुयायियों की काव्य परंपरा से प्रेरित है। रामचरितमानस और विनय पत्रिका के विभिन्न छंदों के सार को लेकर इस भजन का स्वरूप गढ़ा गया है, ताकि आम भक्त भी आसानी से इसे गाकर आनंदित हो सके। यह भजन मौखिक परंपरा से होते हुए आज लाखों भक्तों के घरों और मंदिरों तक पहुँच चुका है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल, मधुर और प्रवाहमयी हिंदी (अवधी-खड़ी बोली का मिश्रण) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है जो इसके काव्य सौंदर्य को चार चाँद लगाते हैं। शब्दों का चयन ऐसा है कि हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से समझ और गुनगुना सकता है। इसके बोल में जो लयबद्धता है, वह सुनते ही मन को मोह लेती है और ध्यान की अवस्था में ले जाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधा या संकट क्यों न आए, यदि ईश्वर में अटूट विश्वास और गुरु-भक्तों जैसी निष्ठा हो, तो हर समस्या का समाधान संभव है। हनुमान जी का जीवन यह संदेश देता है कि शक्ति का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की सेवा और धर्म की रक्षा के लिए होना चाहिए। शरणागति का मार्ग ही जीवन को भयमुक्त और शांतिपूर्ण बनाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
मंगल मूर्ति कल्याणकारी स्वरूप वाले जिसका दर्शन मात्र अमंगल को दूर कर दे
राम दुलारे भगवान राम के अत्यंत प्रिय श्रीराम के हृदय के समीप रहने वाले
पवनसुत वायुदेव के पुत्र हनुमान जी का एक नाम (पवनपुत्र)
कंचन बरन सोने के समान रंग स्वर्ण जैसी कांति वाला शरीर
संजीवन संजीवनी बूटी मूर्छित लक्ष्मण के प्राण बचाने वाली औषधि
संकट मोचन सारे संकटों को हरने वाले दुख और बाधाओं का नाश करने वाले

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मंगल मूर्ति राम दुलारे, पवनसुत बलधाम पारे।" - हे मंगलकारी स्वरूप वाले, श्रीराम के प्रिय और असीम बल के भंडार हनुमान जी, आप हमारे जीवन के सभी अमंगल दूर करें।

"कंचन बरन सुभग सुवेसा, कानन कुण्डल कुंचित केशा।" - आपका शरीर सोने के समान कांतिमान है, सुंदर वस्त्र और कानों में कुण्डल तथा घुंघराले बाल आपकी शोभा बढ़ाते हैं।

"संजीवन लाये सुत हनुमान, लक्ष्मण जी के प्राण बचाये।" - आपने द्रोणगिरि से संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा की और संपूर्ण देवलोक को आनंदित किया।

"तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय महं डेरा।" - तुलसीदास जी प्रार्थना करते हैं कि हे नाथ! मैं सदा हरि का दास हूँ, आप मेरे हृदय में हमेशा के लिए निवास कीजिए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये॥

इस महामंत्र के स्मरण के साथ इस भजन का पाठ करने से साधक को हनुमान जी और श्री राम स्तुति दोनों का पुण्य लाभ प्राप्त होता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

मानदंड विवरण
भजन का नाम मंगल मूर्ति राम दुलारे (Mangal Murti Ram Dulare)
ाराध्य देवता भगवान श्री राम एवं संकटमोचन श्री हनुमान जी
रचनाकार / परंपरा संत तुलसीदास प्रेरित सनातन भक्ति परंपरा
भाषा अवधी-हिंदी मिश्रित
प्रमुख थीम भक्ति, शक्ति, शरणागति और संकट निवारण
मुख्य भाव अनन्य प्रेम और समर्पण
उपयुक्त अवसर मंगलवार, शनिवार, संकट काल, दैनिक पूजा और सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और उनके परम भक्त संकटमोचन श्री हनुमान जी को संयुक्त रूप से समर्पित है।

इस भजन के नियमित पाठ से मानसिक शांति, आत्मबल, संकटों से मुक्ति और भगवान श्रीराम व हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा के दौरान इस भजन का गान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है, हालांकि इसे प्रतिदिन भी गाया जा सकता है।

हाँ, इसे घर के पूजा स्थल पर अकेले या परिवार के साथ सामूहिक रूप से पूरी पवित्रता और भक्ति भाव के साथ गाया जा सकता है।

इसकी रचना सरल हिंदी और अवधी लोकभाषा की शब्दावली में की गई है, जो भक्तों की जुबान पर आसानी से चढ़ जाती है।

अवश्य! बच्चों को ऐसे धार्मिक और प्रेरणादायक भजन सिखाने से उनके संस्कार मजबूत होते हैं और उनमें नैतिक मूल्यों का विकास होता है।

गान के समय शुद्ध उच्चारण, आंतरिक स्वच्छता, शांत मन और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव रखना आवश्यक है।

हाँ, इसके कई प्रसंग और शब्दावली संत तुलसीदास जी के रामचरितमानस तथा हनुमान चालीसा की परंपरा से प्रेरित हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्तीलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन ग्रंथों, तुलसीकृत साहित्य और पारंपरिक लोकभक्ति के आधार पर तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक, आध्यात्मिक और सरल भाषा में devotional content उपलब्ध कराना है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीरामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी
  • विनय पत्रिका एवं हनुमान चालीसा ग्रंथ
  • सनातन पौराणिक कथाएं एवं लोक भक्ति गीत परंपरा
  • पारंपरिक वैष्णव एवं शाक्त संकीर्तन संग्रह

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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