Parvati Stotram

सुख के सब साथी | Sukh Ke Sab Sathi | Ram JI Ke Bhajan | Vipin Sachdeva | Shraddha MH One - BhaktiLok

68 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"सुख के सब साथी, दुख में न कोय" - यह सनातन सत्य और मानव जीवन की नश्वरता को दर्शाने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजन है। भगवान श्री रामचंद्र जी के चरणों में समर्पित यह भजन जीव को संसार की क्षणभंगुरता और ईश्वर की शाश्वत सत्ता का बोध कराता है। इस भजन का मुख्य भाव 'वैराग्य' और 'शरणागति' (समर्पण) का है, जो भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के पावन चरणों से जोड़ता है। विपिन सचदेवा की मधुर आवाज में गाया गया यह भजन श्रद्धा एमएच वन (Shraddha MH One) के माध्यम से लाखों भक्तों के दिलों में गूंजता है। जब मनुष्य जीवन के संघर्षों, दुखों और अकेलेपन से थक जाता है, तब यह भजन उसे सांत्वना और आध्यात्मिक संबल प्रदान करता है। यह हमें याद दिलाता है कि संसार के सभी रिश्ते स्वार्थ और सुख के समय तक ही सीमित हैं, जबकि केवल परमात्मा ही सुख और दुख दोनों में हमारे सच्चे साथी हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

सुख के सब साथी | Sukh Ke Sab Sathi

सुख के सब साथी, दुख में न कोय।
मेरे राम, मेरे राम, तेरा नाम एक साचा, दूजा न कोय॥

जीवन की नैया डगमगाए, जब कोई खेवनहार न आए।
तब तू ही पतवार संभाले, तू ही पार लगाए।
सुख के सब साथी, दुख में न कोय॥

झूठी माया झूठी काया, झूठा है यह जग सारा।
अंत समय में कोई न अपना, राम नाम रख प्यारा।
सुख के सब साथी, दुख में न कोय॥

कौशल्या के प्यारे राघव, दीनबंधु सुखदाता।
चरण शरण में जो भी आए, उससे नाता जोड़ा।
सुख के सब साथी, दुख में न कोय॥

बाहर की तुम धूल हटाकर, मन के भीतर झांको।
राम नाम की पावन ज्योति, अपने दिल में राखो।
सुख के सब साथी, दुख में न कोय॥

कोई न जाने कब आ जाए, जीवन का बुलावा।
राम नाम ही साथ चलेगा, बाकी सब है छलावा।
सुख के सब साथी, दुख में न कोय॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन मानव जीवन के सबसे बड़े और कड़वे सत्य को उजागर करता है। संसार का नियम है कि जब तक मनुष्य के पास धन, वैभव, स्वास्थ्य और सुख होता है, तब तक सभी लोग उसके मित्र और संबंधी बने रहते हैं। परंतु, जैसे ही जीवन में विपत्ति, रोग या निर्धनता का अंधकार छाता है, वैसे ही तथाकथित अपने भी साथ छोड़ देते हैं। ऐसे कठिन समय में केवल भगवान श्री राम ही जीव के सच्चे रक्षक और साथी होते हैं।

भजन का मुख्य संदेश यह है कि सांसारिक संबंध नश्वर और स्वार्थ पर आधारित हैं, जबकि ईश्वर के साथ जीव का संबंध शाश्वत और निस्वार्थ है। जब हमारी जीवन रूपी नैया मझधार में फंस जाती है और कोई सहारा देने वाला नहीं बचता, तब भगवान राम स्वयं पतवार बनकर हमें पार लगाते हैं। इसलिए, मनुष्य को इस झूठी माया और नश्वर शरीर के अहंकार को त्यागकर केवल प्रभु राम के नाम का आश्रय लेना चाहिए। राम नाम ही वह परम सत्य है जो इस लोक में भी शांति देता है और परलोक में भी जीव का कल्याण करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस के दार्शनिक सिद्धांतों का निचोड़ है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • वैराग्य भाव की जागृति: यह भजन जीव के भीतर वैराग्य की भावना जागृत करता है, जिससे वह सांसारिक प्रपंचों से मुक्त होकर ईश्वर की ओर उन्मुख होता है।
  • शरणागति का संदेश: जब मनुष्य अपनी असमर्थता स्वीकार कर प्रभु की शरण में जाता है, तो उसे परम शांति और अभय की प्राप्ति होती है।
  • राम नाम की महिमा: भजन में राम नाम को ही एकमात्र सत्य और शाश्वत सहारा बताया गया है, जो कलयुग में भवसागर पार करने का सबसे सुलभ माध्यम है।
  • सरलता और सुगमता: इसके शब्द इतने सरल और मर्मस्पर्शी हैं कि कोई भी सामान्य व्यक्ति इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ को आसानी से समझ सकता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया या सुना जा सकता है, परंतु संध्या काल की आरती के बाद या रात्रि के समय इसका श्रवण विशेष रूप से शांति प्रदान करता है। शांत चित्त होकर, आंखें बंद करके भगवान श्री राम के सौम्य रूप का ध्यान करते हुए इस भजन को सुनना चाहिए। इसे गाते समय हृदय में समर्पण और करुणा का भाव होना आवश्यक है। मंदिरों में होने वाले सत्संगों, पारिवारिक पूजा-अर्चना और विशेष रूप से रामनवमी के पावन अवसर पर इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित है। भगवान राम सनातन धर्म में शील, शक्ति और सौंदर्य के साक्षात विग्रह हैं। वे दीनबंधु और करुणा के सागर हैं। यद्यपि इस भजन के आधुनिक संस्करण को विपिन सचदेवा जैसे प्रसिद्ध गायकों ने अपनी मधुर आवाज दी है, परंतु इसके मूल विचार गोस्वामी तुलसीदास जी, संत कबीरदास जी और सूरदास जी जैसे महान संतों की वाणियों से प्रेरित हैं, जिन्होंने सदैव संसार की नश्वरता और हरि नाम की सत्यता पर बल दिया।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि भारतीय दर्शन के 'संसार चक्र' और 'माया' के सिद्धांत पर आधारित है। सदियों से भारतीय संतों ने मनुष्य को यह सचेत किया है कि यह संसार एक रंगमंच है और यहां के सभी रिश्ते-नाते अस्थाई हैं। इस भजन की रचना इसी शाश्वत सत्य को जन-जन तक पहुंचाने के लिए की गई थी। जब इस भजन को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, तो यह भारतीय जनमानस के कंठ का हार बन गया।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें आंशिक रूप से ब्रज और अवधी भाषा का प्रभाव दिखाई देता है। इसकी काव्य शैली 'पद' शैली है, जिसमें गेयता (गाने की योग्यता) का गुण कूट-कूट कर भरा है। इसमें 'नैया', 'पतवार' और 'खेवनहार' जैसे सुंदर रूपकों का प्रयोग किया गया है, जो मानव जीवन की यात्रा को बहुत ही खूबसूरती से परिभाषित करते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख प्रदान करता है:

  • अपेक्षाओं से मुक्ति: संसार के लोगों से अत्यधिक अपेक्षाएं न रखें, क्योंकि अंततः केवल ईश्वर ही आपके सच्चे हितैषी हैं।
  • विनम्रता और समर्पण: जब जीवन में संकट आए, तो घबराने के बजाय ईश्वर के चरणों में आत्मसमर्पण कर दें।
  • सत्य की पहचान: भौतिक सुख-सुविधाएं और शरीर नश्वर हैं, केवल राम नाम ही शाश्वत सत्य है।
  • धैर्य और विश्वास: कठिन परिस्थितियों में भी भगवान पर अटूट विश्वास बनाए रखें, वे अवश्य ही आपकी नैया पार लगाएंगे।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
खेवनहार नाव

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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