Parvati Stotram

मेडी वाले गोगाजी | Medi Wale Gogaji | Shir Goga Jaharveer Most Popular Bhajan | Sonali shri | Video - BhaktiLok

170 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

मेडी वाले गोगाजी का यह पावन भजन लोक-देवता जाहरवीर गोगाजी की महिमा का एक अद्भुत और हृदयस्पर्शी गुणगान है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के जनमानस में 'गोगाजी' को 'जाहर पीर' के रूप में पूजा जाता है। यह भजन न केवल एक भक्ति गीत है, बल्कि यह उस अटूट विश्वास का प्रतीक है जो भक्त अपने आराध्य के प्रति रखते हैं। गोगाजी को नागों के रक्षक, संकटमोचक और न्याय के देवता के रूप में जाना जाता है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी पीड़ाओं को दूर करने और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना हेतु 'मेडी' (गोगाजी के पावन स्थान) की शरण में जाने का आह्वान करते हैं। यह भजन विशेष रूप से गोगा नवमी और अन्य मांगलिक अवसरों पर अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है, जो भक्तों के हृदय में भक्ति का संचार करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:
मेडी वाले गोगाजी, थारी महिमा अपरम्पार,
भक्तों के तुम संकट हरते, करते बेड़ा पार।
मेडी वाले गोगाजी, थारी महिमा अपरम्पार...

अंतरा 1:
नीले घोड़े असवार प्रभु तुम, भाला हाथ में साजे,
जाहर पीर के जयकारों से, गूँज रही है मेडी राजे।
दौड़ के आते संकट हरने, जब भी पुकारे पुकार,
मेडी वाले गोगाजी, थारी महिमा अपरम्पार...

अंतरा 2:
सांपों के तुम स्वामी हो, तुम रक्षक हो संसार के,
दुखियों के तुम साथी हो, तुम दाता हो करतार के।
शरण में जो भी आता बाबा, पावे खुशियां अपार,
मेडी वाले गोगाजी, थारी महिमा अपरम्पार...

अंतरा 3:
भादवा की नवमी को बाबा, मेला भारी लागे,
श्रद्धा सुमन चढ़ाते भक्त, सोई किस्मत जागे।
सोनल श्री गावे गुण तेरे, कर दो बेड़ा पार,
मेडी वाले गोगाजी, थारी महिमा अपरम्पार...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ गोगाजी के प्रति भक्त की अनन्य निष्ठा को दर्शाता है। 'मेडी' शब्द गोगाजी के उस पवित्र स्थान को इंगित करता है जहाँ उनकी समाधि है और जहाँ भक्त अपनी मन्नतें लेकर जाते हैं। भजन में गोगाजी को 'नीले घोड़े' का असवार कहा गया है, जो उनकी वीरता और शक्ति का प्रतीक है। 'जाहर पीर' का अर्थ है वह पीर जो साक्षात प्रकट होकर भक्तों की रक्षा करता है। भजन का मुख्य संदेश यह है कि गोगाजी न केवल नागों के स्वामी हैं, बल्कि वे दीन-दुखियों के रक्षक भी हैं। जब भक्त सच्चे मन से उन्हें पुकारता है, तो वे भादवा की नवमी के पावन अवसर पर भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर की शरण में जाने से जीवन की सभी बाधाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • लोक-देवता का स्वरूप: गोगाजी को राजस्थान और उत्तर भारत में लोक-देवता के रूप में पूजा जाता है।
  • संकटमोचक: उन्हें विशेष रूप से सर्प दंश और अन्य शारीरिक कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
  • सांस्कृतिक एकता: यह भजन विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है।
  • भक्ति का भाव: भजन में समर्पण और विश्वास का भाव प्रमुख है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को गोगा नवमी के अवसर पर विशेष रूप से गाया जाता है। इसके अलावा, मंगलवार और शनिवार को गोगाजी की पूजा के समय इसे गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे किसी भी मांगलिक कार्य या घर में सुख-शांति के लिए आयोजित सत्संग में गाया जा सकता है। भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और गोगाजी के प्रति विश्वास होना अनिवार्य है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाममेडी वाले गोगाजी
आराध्य देवजाहरवीर गोगाजी
भाषाहिंदी/राजस्थानी मिश्रित
मुख्य भावसमर्पण एवं रक्षा
उपयुक्त अवसरगोगा नवमी, मंगलवार, शनिवार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

गोगाजी कौन हैं?

गोगाजी राजस्थान के एक प्रसिद्ध लोक-देवता हैं, जिन्हें 'जाहर पीर' के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें नागों का रक्षक माना जाता है।

गोगा नवमी कब मनाई जाती है?

गोगा नवमी भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है।

मेडी का क्या अर्थ है?

मेडी गोगाजी के उस पवित्र समाधि स्थल को कहा जाता है, जहाँ भक्त दर्शन और पूजा के लिए जाते हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री लोक-परंपराओं, क्षेत्रीय लोक-गाथाओं और गोगाजी से संबंधित प्रचलित भजनों के संकलन पर आधारित है।

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!