भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए भजन का परिचय | Introduction
सनातन धर्म और शक्ति उपासना की परंपरा में माता वैष्णो देवी और माँ शेरावाली के दरबार का स्मरण मात्र ही साधक के मन में असीम ऊर्जा, उत्साह और भक्ति भाव का संचार कर देता है। "भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए" यह अत्यंत ही प्रसिद्ध, ऊर्जावान और लोकप्रिय देवी भजन है, जो माँ भगवती के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और बुलावा आने पर माता के दरबार की यात्रा करने के आनंद को व्यक्त करता है। इस भजन की रचना और गायन शैली ऐसी है कि इसे सुनते ही हर एक भक्त का रोम-रोम माँ के जयकारों से गूंज उठता है। जब भी कोई भक्त त्रिकुटांचल पर्वत पर स्थित माँ वैष्णो देवी के दरबार की यात्रा करता है, तो उसके होठों पर और मन में यही पावन भजन गूंजता रहता है। यह भजन केवल एक गीत मात्र नहीं है, बल्कि यह उस जीव की पुकार और संतोष का प्रतीक है जिसे साक्षात जगदंबा ने अपने चरणों में हाजिर होने का आमंत्रण दिया है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, माता की महिमा, गायन की विधि और जीवन पर इसके प्रभाव का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मखड़ा (Refrain):
भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए,
नच के मनावा मैं तां माँ नू मनावा,
शेरा वालिए, मेहरा वालिए,
भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए...
अंतरा 1:
ऊँचे पर्वतों पे तेरा सुंदर भवन है,
भक्तों के दिलों में तू ही तो रमन है।
चरणों में तेरे आके झुकता जहाँ है,
तेरी ही दया से मेरी चलती निशा है।
दर्शन पा के तेरा मैं तो धन्य हो गया,
मेरा ये जीवन माँ तेरे रंग रंग गया।
शेरा वालिए, मेहरा वालिए,
भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए...
अंतरा 2:
लाल चुनरिया माथे पे साजे प्यारा टीका,
तेरे बिना जग का हर रंग है फीका।
जो भी दर पे आए झोली भर के जाए,
कोई भी सवाली कभी खाली न लौट जाए।
तू है ममता की मूरत, तू है सुख की खान,
तुझसे ही मिलती है भक्तों को पहचान।
शेरा वालिए, मेहरा वालिए,
भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए...
अंतरा 3:
शेर पे सवारी तूने की है भवानी,
तीन लोक में गूंजे तेरी अमर कहानी।
पापियों का नाश करे भक्तों को उबारे,
डूबती हुई नौका को तू ही तो तारे।
तेरा नाम जपने से कट जाए पापी कष्ट सारे,
आ गए दर पे तेरे तेरे ही सहारे।
शेरा वालिए, मेहरा वालिए,
भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन साधक के अंतर्मन की उस परम आनंद की स्थिति को दर्शाता है जब उसे अपनी इष्ट देवी माँ दुर्गा या माता वैष्णो देवी के दर्शन का अवसर प्राप्त होता है। भजन की पहली पंक्ति "भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए" इस बात का प्रतीक है कि संसार में कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से माता के दरबार तक नहीं पहुँच सकता, जब तक कि स्वयं जगदंबा की विशेष कृपा और बुलावा न हो। शास्त्रों में भी कहा गया है कि माँ के दरबार का बुलावा ही सबसे बड़ा सौभाग्य है। साधक कहता है कि हे शेरावाली माँ! तूने मुझे अपने दरबार में बुलाया है, इसलिए मैं नाच-गाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त कर रहा हूँ और तुझे मना रहा हूँ।
आगे के अंतरा में पर्वतों पर स्थित माता के सुंदर भवन और उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। त्रिकूट पर्वत पर विराजमान माता का दरबार भक्तों के लिए वैकुंठ समान है। कवि या गायक यह भाव व्यक्त करता है कि माता की कृपा से ही उसका जीवन धन्य हुआ है और उसका हर एक श्वास माँ के चरणों में समर्पित है। "लाल चुनरिया माथे पे साजे" पंक्ति माँ के उस दिव्य और अलंकृत स्वरूप का वर्णन करती है जो हर भक्त के मन को मोह लेता है। माँ ममता की सागर हैं और उनके द्वार से कोई भी सवाली खाली हाथ नहीं लौटता। अंत में, माता की शक्ति, उनके वाहन शेर और उनके द्वारा भक्तों के संकटों का निवारण करने की महानता का गुणगान किया गया है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन का सनातन संस्कृति और विशेष रूप से देवी भक्तों के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह भजन उत्साह, ऊर्जा और आत्मिक शांति का एक अनूठा संगम है।
- भक्ति का उत्साह: यह भजन साधक के भीतर आलस्य को दूर कर उत्साह और उमंग भर देता है।
- पूर्ण शरणागति: भजन यह सिखाता है कि मनुष्य को अपने जीवन की डोर माता के हाथों में सौंप देनी चाहिए।
- सामूहिक संकीर्तन में लोकप्रियता: माता के जागरण, चौकी, नवरात्रि और भंडारों में इस भजन के बिना उत्सव अधूरा माना जाता है।
- मानसिक शांति: इस भजन के श्रवण मात्र से मन की चिंताएं और भय दूर हो जाते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस ऊर्जावान भजन को किसी भी पवित्र अवसर पर गाया जा सकता है। विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर इसका गायन अत्यधिक फलदायी माना जाता है:
- नवरात्रि के नौ दिन: शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान माता की चौकी या पूजा में।
- माता वैष्णो देवी यात्रा के दौरान: यात्रा मार्ग पर या भवन पहुँचने पर यह भजन भक्तों की थकान मिटा देता है।
- संध्याकालीन आरती: घर में संध्या के समय दीपक प्रज्वलित करने के बाद माँ के समक्ष।
- पारिवारिक अनुष्ठान: मुंडन, गृह प्रवेश या किसी भी मांगलिक कार्य में माता के जागरण के समय।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की आराध्य देवी आदि शक्ति जगदंबा, माँ दुर्गा और माता वैष्णो देवी हैं। सनातन धर्म में आदि शक्ति को ब्रह्मांड की उत्पत्ति, पालन और संहार की शक्ति माना जाता है। मार्कण्डेय पुराण और दुर्गा सप्तशती में माता के विभिन्न स्वरूपों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का विस्तार से वर्णन मिलता है। यह भजन उन्हीं महाशक्ति के चरणों में समर्पित है जो अपने भक्तों की रक्षा के लिए सिंह पर सवार होकर प्रकट होती हैं। माता वैष्णो देवी के रूप में त्रिकुटांचल पर विराजमान देवी त्रिशक्ति का सम्मिलित रूप हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन आधुनिक और पारंपरिक लोक संगीत शैली का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसे बॉलीवुड की फिल्मों और विभिन्न देवी गीतों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया गया है। माता के दरबार के प्रति भक्तों के अगाध प्रेम को ध्यान में रखते हुए इस रचना को तैयार किया गया है। यह रचना उन सभी भक्तों की मनोदशा को दर्शाती है जो लंबे समय से माता के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं और अचानक बुलावा आने पर उनकी प्रसन्नता की कोई सीमा नहीं रहती।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, मधुर और सहज हिंदी/पंजाबी मिश्रित ब्रजभाषा-प्रभावित लोक शैली है, जिसे उत्तर भारत के लोग आसानी से समझ सकते हैं और गा सकते हैं। इसमें उपमा, रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है। शब्दों की लयबद्धता ऐसी है कि संगीत के साथ यह स्वतः ही नृत्य और आनंद की मुद्रा में ले आती है। यह जनसामान्य की भाषा में रची गई एक ऐसी कृति है जो हर वर्ग के व्यक्ति के हृदय को छू लेती है.
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें जीवन के कई गहरे आध्यात्मिक पाठ पढ़ाता है:
- ईश्वरीय कृपा बिना कुछ संभव नहीं: जीवन में सब कुछ अपनी इच्छा से नहीं होता, बल्कि जब माँ का बुलावा आता है तभी सत्कर्म और तीर्थयात्रा का योग बनता है।
- कृतज्ञता का भाव: माँ की कृपा से प्राप्त जीवन और सुखों के लिए हमेशा आभारी रहना चाहिए।
- विश्वास और धैर्य: कठिनाइयों के समय माता पर अटूट विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि वह अपने बच्चों के सभी संकट हर लेती हैं।
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भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| शेरा वालिए | सिंह पर सवारी करने वाली माँ | शक्ति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक |
| मेहरा वालिए | कृपा बरसाने वाली | भक्तों पर अपनी अहेतुकी कृपा करने वाली |
| भवन | पवित्र निवास स्थान | माता का दरबार या मंदिर |
| सवाली | याचिकाकर्ता या भक्त | जो माँ के दरबार में अपनी कामना लेकर आता है |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए..." - इस पंक्ति का अर्थ है कि हे माँ! तेरी कृपा से ही मुझे तेरे दरबार में आने का निमंत्रण मिला है, और इस महान सौभाग्य को पाकर मेरा मन आनंद से नृत्य कर रहा है।
"ऊँचे पर्वतों पे तेरा सुंदर भवन है..." - भौतिक संसार से दूर, ऊंचे और पवित्र पहाड़ों पर माँ का दिव्य धाम सुशोभित है, जहाँ संपूर्ण ब्रह्मांड के जीव नमन करने आते हैं।
"जो भी दर पे आए झोली भर के जाए..." - माँ इतनी दयालु हैं कि उनके द्वार से कभी कोई निराश नहीं लौटता, जो सच्चे मन से मांगता है उसे उसकी पात्रता से अधिक मिलता है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत लाभकारी होता है:
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
यह मंत्र माता दुर्गा के सभी स्वरूपों की वंदना करता है और साधक को सभी प्रकार के अमंगल से बचाता है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | भेजा है बुलावा तूने शेरा वालिए |
| आराध्य देवी | माता वैष्णो देवी / माँ दुर्गा |
| संगीत शैली | लोक भजन / देवी गीत |
| भाषा | हिंदी / लोक भाषा |
| मुख्य भाव | भक्ति, प्रेम, शरणागति और उत्साह |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री सनातन धर्म की देवी उपासना परंपरा, लोक संगीत के सांस्कृतिक महत्व और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भजन लिरिक्स, उसका सरल अर्थ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। यह सामग्री पूरी तरह से जनहित और भक्ति भावना को समर्पित है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं दुर्गा सप्तशती
- पारंपरिक लोकगीत एवं देवी भजन संग्रह
- वैष्णो देवी यात्रा एवं धार्मिक संकीर्तन परंपरा
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