Parvati Stotram

तुमको आना होगा ! इस संकट की घड़ी मैं माता रानी से अरदास ! Tumko Aana Hoga ! Jai Mata Di !Amba Bhakti - BhaktiLok

60 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"तुमको आना होगा" भजन माता रानी के प्रति अटूट विश्वास, करुणा की पुकार और शरणागति का एक अत्यंत भावपूर्ण प्रतीक है। कलयुग के इस आपाधापी भरे समय में, जब मनुष्य विभिन्न प्रकार के मानसिक, शारीरिक और सांसारिक संकटों से घिरा होता है, तब 'माता रानी' का स्मरण ही एकमात्र संबल (सहारा) शेष रह जाता है। यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक भक्त की वह करुण पुकार है जो सीधे जगदम्बा के चरणों तक पहुँचती है। सनातन धर्म में 'अरदास' या 'प्रार्थना' का अर्थ केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति नहीं, बल्कि माँ के प्रति पूर्ण समर्पण है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी विवशता को माँ के समक्ष रखता है और यह विश्वास व्यक्त करता है कि माँ अपने बालक की पुकार सुनकर अवश्य आएंगी। यह भक्ति रस से ओत-प्रोत रचना साधक के अंतर्मन को शुद्ध करने और उसमें धैर्य व साहस का संचार करने में सक्षम है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तुमको आना होगा, तुमको आना होगा।
इस संकट की घड़ी में, माता रानी तुमको आना होगा॥

भटके हुए हैं राह से हम, तू ही राह दिखा दे माँ,
अंधियारे हैं जीवन पथ पर, ज्योत तू ही जला दे माँ।
धीरज खोया है मन ने मेरे, धीर बंधाना होगा,
इस संकट की घड़ी में, माता रानी तुमको आना होगा॥

पाप और संताप मिटा दे, ममता की तू छाँव दे,
भूल गए हैं हम तो तुझको, फिर से अपना नाम दे।
भूल हमारी क्षमा करो, अब तो अपनाना होगा,
इस संकट की घड़ी में, माता रानी तुमको आना होगा॥

तू ही दुर्गा, तू ही काली, तू ही है कल्याणी माँ,
दुखियों की तू पीर हरे, तू ही है वरदानी माँ।
भक्तों की इस पुकार को, माँ अब तो सुनना होगा,
इस संकट की घड़ी में, माता रानी तुमको आना होगा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त यहाँ माता रानी को एक ऐसी शक्ति के रूप में संबोधित कर रहा है जो न केवल ब्रह्मांड की संचालिका है, बल्कि एक ममतामयी माँ भी है। 'तुमको आना होगा' पंक्ति में भक्त का हठ नहीं, बल्कि उसका अटूट विश्वास है कि माँ अपने बच्चे को संकट में नहीं देख सकतीं।

भजन की पंक्तियों में भक्त स्वीकार करता है कि वह सांसारिक मोह-माया के कारण अपने मार्ग से भटक गया है। वह माँ से प्रार्थना करता है कि वह उसे सही दिशा दिखाएं। 'अंधियारे जीवन पथ' का अर्थ है अज्ञानता और दुखों का अंधकार, जिसे केवल माँ की भक्ति रूपी ज्योति ही मिटा सकती है। भजन का दूसरा भाग 'क्षमा' और 'अपनापन' पर केंद्रित है। भक्त अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए माँ से शरण मांगता है। अंत में, माँ के विभिन्न स्वरूपों (दुर्गा, काली, कल्याणी) का स्मरण करते हुए भक्त यह विश्वास दिलाता है कि माँ ही एकमात्र सहारा हैं जो दुखों का निवारण कर सकती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति का स्वरूप: यह भजन 'दैन्य भाव' (विनम्रता) और 'शरणागति' का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • मानसिक शांति: इस भजन का निरंतर श्रवण मन की चंचलता को कम करता है और एकाग्रता बढ़ाता है।
  • संकट निवारण: यह भजन विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह भजन माता के जागरण, नवरात्रि और दैनिक पूजा में अत्यंत लोकप्रिय है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) या संध्या काल में इसका गायन विशेष फलदायी होता है।

  • विधि: सर्वप्रथम माता रानी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।
  • भाव: गायन करते समय मन में पूर्ण विश्वास रखें कि माँ आपकी पुकार सुन रही हैं।
  • स्थान: इसे घर के पूजा स्थल या किसी मंदिर में सामूहिक रूप से गाना अधिक प्रभावशाली होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
अरदास प्रार्थना या विनती ईश्वर के समक्ष अपनी बात रखना
संताप दुख या कष्ट सांसारिक दुखों का नाश
कल्याणी कल्याण करने वाली माता का एक नाम
पीर पीड़ा या दर्द भक्तों के दुखों का निवारण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

नहीं, इसे किसी भी दिन गाया जा सकता है, लेकिन मंगलवार, शुक्रवार और नवरात्रि के दिनों में इसका विशेष महत्व है।

भजन गाने से मन को शांति मिलती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और माता रानी की कृपा प्राप्त होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्ति साहित्य और पारंपरिक भजनों के संकलन पर आधारित है। इसे भक्तों की श्रद्धा और आध्यात्मिक लाभ को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह भजन लोक-परंपरा और भक्ति संगीत के विभिन्न स्रोतों से संकलित है। इसके भावार्थ की व्याख्या सनातन धर्म के शरणागति सिद्धांत के आधार पर की गई है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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