Parvati Stotram

महानवमी Special मैया का चोला लाल रंग का Maiya Ka Chola Laal Rang Ka I LAKHBIR SINGH LAKKHA I Full HD - BhaktiLok

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

महानवमी के पावन अवसर पर माँ दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। लखबीर सिंह लक्खा द्वारा स्वरबद्ध भजन "मैया का चोला लाल रंग का" न केवल एक भक्ति गीत है, बल्कि यह माँ भगवती के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। लाल रंग, जो शक्ति, ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, माँ के दिव्य स्वरूप को अलंकृत करता है। यह भजन भक्तों के हृदय में माँ की ममता और उनके रौद्र-सौम्य स्वरूप के प्रति श्रद्धा जागृत करता है। नवरात्रि और विशेष रूप से महानवमी के दिन इस भजन का श्रवण और गायन साधक को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मैया का चोला है लाल रंग का,
लाल रंग का, माँ लाल रंग का,
मैया का चोला है लाल रंग का...

लाल चुनरिया सिर पर सोहे,
देख के मैया का मुखड़ा मनवा मोहे,
लाल है मुखड़ा, लाल है बिंदिया,
लाल है चोला माँ के अंग का,
मैया का चोला है लाल रंग का...

शेर सवारी मैया की प्यारी,
भक्तों की मैया है संकट हारी,
लाल है ध्वजा, लाल है ज्योत,
लाल है चोला माँ के अंग का,
मैया का चोला है लाल रंग का...

महानवमी के पावन दिन पर,
आए हैं भक्त माँ के दर पर,
लाल है फूल, लाल है भोग,
लाल है चोला माँ के अंग का,
मैया का चोला है लाल रंग का...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में 'लाल रंग' को माँ दुर्गा की शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। भक्त कहता है कि माँ का चोला (वस्त्र) लाल रंग का है, जो उनके तेज को दर्शाता है। लाल चुनरी, लाल मुखड़ा और लाल बिंदिया—ये सभी माँ के मंगलकारी स्वरूप को परिभाषित करते हैं। भजन का भावार्थ यह है कि माँ भगवती अपने भक्तों के सभी संकटों को हरने वाली हैं। महानवमी के दिन माँ की विशेष पूजा में लाल पुष्प और लाल भोग का अर्पण करना उनकी कृपा प्राप्ति का सरल मार्ग है। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति में रंग और रूप का महत्व केवल एकाग्रता के लिए है, मूल तो माँ के प्रति हमारा निश्छल प्रेम है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • शक्ति का प्रतीक: लाल रंग माँ दुर्गा के 'शक्ति' स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है।
  • महानवमी का संदर्भ: यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि की नवमी तिथि के लिए उपयुक्त है।
  • भक्ति भाव: लखबीर सिंह लक्खा की ओजस्वी आवाज में यह भजन भक्तों में उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है।
  • सांस्कृतिक महत्व: सनातन धर्म में लाल रंग को सौभाग्य और विजय का प्रतीक माना गया है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को नवरात्रि के नौ दिनों में, विशेषकर सुबह की आरती या शाम के जागरण के समय गाना अत्यंत फलदायी होता है। महानवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा के समय इसे गाना विशेष कृपा प्रदान करता है। इसे गाते समय मन में माँ के लाल स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाममैया का चोला लाल रंग का
गायकलखबीर सिंह लक्खा
विषयमाँ दुर्गा भक्ति
उपयुक्त अवसरनवरात्रि, महानवमी
भावसमर्पण एवं शक्ति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

महानवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो सभी सिद्धियों की दात्री हैं।

लाल रंग माँ दुर्गा की शक्ति, ऊर्जा, प्रेम और विजय का प्रतीक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री माँ दुर्गा की भक्ति परंपरा और लखबीर सिंह लक्खा द्वारा गाए गए भजनों के आधार पर तैयार की गई है। यह एक "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" है।

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!