दुआरा जगराता होई Duara Jagrata Hoi | Khesari Lal Yadav & Priyanka Singh - BhaktiLok
प्रकाशित तिथि: 2021 | श्रेणी: लोक भक्ति गीत / माता जागरण भजन
भारतीय लोक संस्कृति और सनातन भक्ति परंपरा में देवी जागरण और संकीर्तन का एक अत्यंत विशिष्ट और उल्लासपूर्ण स्थान है। भोजपुरी संगीत जगत के लोकप्रिय स्वर सम्राट खेसारी लाल यादव और सुरों की मलिका प्रियंका सिंह द्वारा गाया गया यह पावन भजन "दुआरा जगराता होई" माँ दुर्गा की आराधना, शक्ति की उपासना और गाँव-मोहल्ले में होने वाले पारंपरिक देवी जागरण के उत्सव को जीवंत करता है। सनातन धर्म में यह मान्यता है कि जहाँ माता के नाम का संकीर्तन होता है, वहाँ साक्षात माँ दुर्गा अपने भक्तों के द्वार पर विराजमान होकर उनके संकटों का हरण करती हैं। यह भजन न केवल संगीतमय दृष्टि से मनमोहक है, बल्कि यह घर-परिवार में भक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और सामूहिक सांस्कृतिक उत्सव का एक अद्भुत संदेश भी देता है। इस लेख में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, इसके गहरे भाव, सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़ी तमाम जानकारियों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
शीघ्र जानकारी (Quick Information)
- भजन का नाम: दुआरा जगराता होई (Duara Jagrata Hoi)
- मुख्य गायक: खेसारी लाल यादव एवं प्रियंका सिंह
- संगीत शैली: भोजपुरी देवी गीत / माता जागरण भजन
- आराध्य देवी: माँ दुर्गा / शेरावाली
- मुख्य भाव: उत्सव, उल्लास, मातृभक्ति और समर्पण
- उपयुक्त अवसर: शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, मंगलवार जागरण
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
शेरावाली के महिमा अपार बा, भक्तन के भीड़ दुअरा परार बा। झूमे ला गंवईया नाचे ला सगरी गोई, ए माई, आज हमार दुआरा जगराता होई... लाल चुनरियाढ़ले बानी, हाथ में नारियल लीहले बानी। माई के दर्शन खातिर अँखिया तरसले बानी। दीया बाती जरेला, हर मन बहरेला, भक्तन के टोली माँ के भवन में सजेला। शेरावाली के अनुकम्पा भारी बा, भक्तन के मन में उमंग खुमारी बा। झूमे ला गंवईया नाचे ला सगरी गोई, ए माई, आज हमार दुआरा जगराता होई... खेसारी पुकारे माई आवे के पड़ी, भक्तन के गोहार माई सुने के पड़ी। प्रियंका के सुर में अरदास बा लागल, माई के चरण में मनवा भागेल। घर-आँगन महके कपूर के सुगंध से, दुखवा भागेला माँ के पावन प्रबंध से। झूमे ला गंवईया नाचे ला सगरी गोई, ए माई, आज हमार दुआरा जगराता होई...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth
"दुआरा जगराता होई" भजन का मूल भाव माता रानी के प्रति अटूट प्रेम, श्रद्धा और उत्सवधर्मिता को प्रदर्शित करता है। जब कोई भक्त अपने घर के द्वार पर माता के जागरण का आयोजन करता है, तो वह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि साक्षात जगदंबा को अपने घर आमंत्रित करने का पवित्र अनुष्ठान होता है।
भजन की पंक्तियों में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार माँ शेरावाली की महिमा अपरंपार है और उनके दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। गाँव के सभी लोग, पड़ोसी और संबंधी मिलकर जब माता के भजनों पर झूमते और नाचते हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यह भजन सिखाता है कि भक्ति एकांत साधना के साथ-साथ सामूहिक उल्लास का भी माध्यम है, जहाँ सब मिलकर माँ की महिमा का गुणगान करते हैं।
गीत की जानकारी तालिका | Song Information Table
| विवरण (Detail) | जानकारी (Information) |
|---|---|
| गीत का शीर्षक | दुआरा जगराता होई (Duara Jagrata Hoi) |
| मुख्य गायक | खेसारी लाल यादव, प्रियंका सिंह |
| भाषा | भोजपुरी / हिंदी मिश्रित लोक शैली |
| विषय / थीम | माता रानी का जागरण, मातृभक्ति, लोक उत्सव |
| संबंधित पर्व | नवरात्रि, कलश स्थापना, माता का जगराता |
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| दुआरा | द्वार / घर का आंगन या दरवाजा | जहाँ जागरण का आयोजन हो रहा है |
| जगराता | रात्रि जागरण | माता के सम्मान में पूरी रात जागकर भजन करना |
| गोई / गंवईया | गाँव के लोग / पड़ोसी / संबंधी | सामूहिक सहभागिता |
| गोहार | पुकार / प्रार्थना | माता से विनती करना |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
सनातन संस्कृति में देवी जागरण या जगराता केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का माध्यम है। जब रात भर माँ के जयकारे गूंजते हैं और ढोल-मंजीरों की थाप पर भक्त झूमते हैं, तो सामूहिक चेतना का विकास होता है। खेसारी लाल यादव और प्रियंका सिंह जैसे लोकप्रिय कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से इस लोक परंपरा को जन-जन तक पहुँचाया है। यह भजन लोगों को अपनी जड़ों, संस्कृति और देवी-आराधना से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भजन सुनने और गाने के अवसर | When to Listen / Sing
यह ऊर्जावान और पावन भजन निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से सुना और गाया जाता है:
- शारदीय और चैत्र नवरात्रि: इन नौ दिनों में माता के पंडालों और घरों में यह भजन बहुत चाव से बजाया जाता है।
- माता का जगराता: रात्रि के समय जब जागरण का मुख्य आयोजन होता है, तब यह गीत माहौल में ऊर्जा भर देता है।
- पारिवारिक अनुष्ठान: मुंडन, गृह प्रवेश या मन्नत पूरी होने पर आयोजित होने वाले देवी पूजन के समय।
- दैनिक साधना के दौरान: जब मन में उत्साह और भक्ति भाव का संचार करना हो।
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संपादकीय एवं संदर्भ (Editorial & References)
यह सामग्री लोक संस्कृति, पारंपरिक भोजपुरी भक्ति संगीत और सनातन मान्यताओं के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को लोकप्रिय भक्ति गीतों के बोल और उनके सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराना है।
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