भक्ति संगीत की दुनिया में माता मातारानी के भजनों का अपना एक विशेष स्थान है। "तू छम छम करती आजा माता" भजन मुख्य रूप से माता मातारानी यानी श्री दुर्गा जी की स्तुति में गाया जाने वाला अत्यंत ही मधुर और भावपूर्ण भजन है। इस भजन को प्रसिद्ध भजन गायक मुकेश बगड़ा जी ने अपनी सुमधुर आवाज़ में स्वरबद्ध किया है। यह भजन माता के आगमन का वर्णन करता है, जहाँ भक्त माता से अपने घर-आँगन में पधारने की प्रार्थना करता है। "छम छम" शब्द माता के पायल की ध्वनि को दर्शाता है, जो भक्त के हृदय में भक्ति की तरंगें पैदा करती है। यह भजन नवरात्रि, दुर्गा पूजा, और अन्य मांगलिक अवसरों पर विशेष रूप से गाया जाता है। भक्ति भाव से परिपूर्ण यह भजन साधक के मन को शांति और आनंद से भर देता है। माता मातारानी की कृपा से भक्त के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस भजन के माध्यम से भक्त माता से अपने जीवन में आने की प्रार्थना करता है, ताकि उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकें और वह माता की शरण में सुखी जीवन व्यतीत कर सके।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
तू छम छम करती आजा माता
तू छम छम करती आजा माता, मैं बलिहारी जाऊँ।
तेरे चरणों की धूल से मैं, अपना जीवन पाऊँ।।
तू छम छम करती आजा माता...
मैं तो तेरी शरण में आया, दुखड़े मेरे दूर कर दे।
भक्तों के तू काज सँवारे, मेरा भी काज सँवार दे।।
तू छम छम करती आजा माता...
तेरे द्वारे पे जो भी आया, खाली नहीं लौटाया।
मैं भी आया तेरे द्वारे, मुझे भी अपनाओ।।
तू छम छम करती आजा माता...
शेरों वाली मैया तेरी, जय जयकार करूँ मैं।
तेरे चरणों की भक्ति में, अपना जीवन वारूँ मैं।।
तू छम छम करती आजा माता...
मातारानी की महिमा न्यारी, भक्तों के दुख हरती है।
जो भी शरण में आता है, उसकी नैया पार करती है।।
तू छम छम करती आजा माता...
मुकेश बगड़ा ने भक्ति भाव से, यह भजन सुनाया है।
माता की कृपा से ही, यह जगत बसाया है।।
तू छम छम करती आजा माता...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मुख्य भाव यह है कि भक्त माता मातारानी से अपने जीवन में आने की प्रार्थना कर रहा है। "तू छम छम करती आजा माता" का अर्थ है कि हे माता! आप अपने चरणों की पायल की मधुर ध्वनि के साथ मेरे जीवन में पधारें। भक्त माता के चरणों की धूल को अपने जीवन का सर्वस्व मानता है। वह माता की शरण में आकर अपने सभी दुखों को दूर करने की प्रार्थना करता है। भजन में भक्त माता को "शेरों वाली" कहकर संबोधित करता है, जो उनकी शक्ति और साहस का प्रतीक है। माता मातारानी की महिमा का वर्णन करते हुए भक्त कहता है कि जो भी भक्त माता की शरण में आता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसकी नैया पार हो जाती है। यह भजन पूर्ण शरणागति और अनन्य भक्ति का प्रतीक है। भक्त माता को अपना सब कुछ अर्पित कर देता है और उनकी कृपा से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति की कामना करता है। भजन का भावार्थ यह भी है कि माता अपने भक्तों के दुखों को हरती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं। भक्त माता की भक्ति में अपना जीवन वारने को तैयार है। यह भजन भक्ति रस से परिपूर्ण है और साधक के मन को शांति और आनंद प्रदान करता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन माता मातारानी की स्तुति में गाया जाने वाला एक अत्यंत ही शक्तिशाली भजन है। इस भजन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- देवी की महिमा: यह भजन माता मातारानी की महिमा का गुणगान करता है, जो भक्तों के दुखों को हरती हैं।
- भक्ति भाव: भजन में पूर्ण शरणागति और अनन्य भक्ति का भाव है, जो साधक को माता के चरणों में समर्पित करता है।
- शक्ति का प्रतीक: "शेरों वाली" कहकर माता की शक्ति और साहस को दर्शाया गया है।
- मनोकामना पूर्ति: भजन में यह विश्वास व्यक्त किया गया है कि माता की शरण में आने वाले भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- सुमधुर संगीत: मुकेश बगड़ा जी की सुमधुर आवाज़ में यह भजन और भी मधुर और भावपूर्ण हो जाता है।
इस भजन का आध्यात्मिक महत्व यह है कि यह साधक को माता के प्रति समर्पण का भाव सिखाता है। जब भक्त पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ इस भजन को गाता है, तो माता की कृपा से उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह भजन नवरात्रि, दुर्गा पूजा, और अन्य मांगलिक अवसरों पर विशेष रूप से गाया जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया और सुना जा सकता है। विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान, दुर्गा पूजा, और अन्य माता के पर्वों पर यह भजन अत्यंत ही फलदायी माना जाता है। भजन गाने की विधि इस प्रकार है:
- समय: प्रातःकाल या संध्या के समय भजन गाना शुभ माना जाता है।
- स्थान: भजन गाने के लिए पवित्र और शांत स्थान का चयन करें, जहाँ माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित हो।
- विधि: भजन गाने से पहले माता का ध्यान करें और उन्हें पुष्प अर्पित करें। फिर पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से भजन गाएं।
- आवृत्ति: इस भजन को एक या अधिक बार गाया जा सकता है। जितनी अधिक बार गाएंगे, उतनी ही अधिक भक्ति का अनुभव होगा।
भजन सुनते समय भी मन को एकाग्र करके माता के चरणों में लगाना चाहिए। ऐसा करने से भजन का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "तू छम छम करती आजा माता" भजन किस देवी को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन माता मातारानी यानी श्री दुर्गा जी को समर्पित है।
प्रश्न 2: इस भजन के गायक कौन हैं?
उत्तर: इस भजन को प्रसिद्ध भजन गायक मुकेश बगड़ा जी ने अपनी सुमधुर आवाज़ में गाया है।
प्रश्न 3: यह भजन कब गाया जाता है?
उत्तर: यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा, और अन्य माता के पर्वों पर गाया जाता है।
प्रश्न 4: इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भक्त को पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ माता की शरण में आना चाहिए, जिससे उसके सभी दुख दूर हो जाएं।
प्रश्न 5: क्या इस भजन को सुनने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं?
उत्तर: हाँ, यदि भक्त पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ इस भजन को सुनता या गाता है, तो माता की कृपा से उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें भजन के मूल पाठ, उसके भावार्थ, और आध्यात्मिक महत्व को शामिल किया गया है। भजन के बोल पारंपरिक रूप से प्रचलित हैं और इन्हें मुकेश बगड़ा जी द्वारा गाया गया है। हमारा प्रयास है कि भक्तों तक माता मातारानी की भक्ति का यह पावन संदेश सही रूप में पहुँचे।
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