Parvati Stotram

Wo Hai Jag Se Bemisaal I LAKHBIR SINGH LAKKHA I Pyara Saja Hai Tera Dwar Bhawani

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"Wo Hai Jag Se Bemisaal" और माँ भगवती की महिमा का गुणगान करता अत्यंत लोकप्रिय भजन "Pyara Saja Hai Tera Dwar Bhawani", जिसे प्रख्यात और ओजस्वी गायक लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) ने अपने अनूठे और मधुर स्वर में गाया है, सनातन भक्ति परंपरा में एक विशेष स्थान रखता है। यह भजन केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि माँ दुर्गा के दरबार की अलौकिक सुंदरता, उनके वात्सल्य और उनके प्रति अगाध प्रेम की जीवंत अभिव्यक्ति है। जब भी कोई साधक या भक्त इस भजन को सुनता है, तो उसका मन सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर सीधे शक्तिपीठों और माँ के दिव्य चरणों में लीन हो जाता है। नवरात्र के पावन दिनों, माता के जागरण, चौकी या किसी भी मांगलिक अवसर पर इस भजन का संकीर्तन वातावरण को पूरी तरह से पवित्र और ऊर्जावान बना देता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस प्रसिद्ध भजन के संपूर्ण बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, रचना की पृष्ठभूमि और इसके श्रवण से मिलने वाले मानसिक व आत्मिक लाभों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा (Refrain):
प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी,
भक्तों की लगी है लंबी कतार भवानी!
ओ है जग से बेमिसाल,
तेरा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी...

अंतरा 1:
ऊँचे पर्वतों पे तेरा धाम है सजाया,
चरणों में तेरे सारा संसार है झुकाया।
जो भी दर पे आया उसने पाया है खजाना,
मैया तेरे दर से कभी कोई ना दीवाना।
भर दो झोली खाली मेरे यार भवानी,
तेरा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी...

अंतरा 2:
लाल चुनरिया सजी माँ तेरे अंग में,
गूंज रही जयकार तेरे हर एक रंग में।
शेर पे सवारी तेरी लगती है भवानी,
गाते हैं महिमा तेरी वेदों की बानी।
तू है दुःख हरती और सुख की दातार भवानी,
तेरा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी...

अंतरा 3:
दीन-दुखियों की तू ही तो है सहारा,
डूबती हुई नौका को तूने ही उबारा।
लक्खा भी गुण गाए तेरे नाम का निरंतर,
तू ही मेरी शक्ति, तू ही मेरा पैगंबर।
सुन ले पुकार मेरी एक बार भवानी,
तेरा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक के अंतर्मन में माँ जगदम्बे के प्रति पूर्ण समर्पण और अगाध विश्वास को जागृत करता है। भजन की शुरुआत इस सुंदर दृश्य से होती है जहाँ माँ का दरबार अत्यंत भव्य रूप से सजा हुआ है और उनके दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। यह दृश्य सनातन संस्कृति के उस शाश्वत सत्य को दर्शाता है जहाँ दीन-दुखी और आस्तिक जन अपनी हर पीड़ा को भूलकर माँ के दरबार में शांति और सुकून की तलाश में पहुँचते हैं। 'वो है जग से बेमिसाल' पंक्ति यह स्पष्ट करती है कि सृष्टि में आदिशक्ति माँ भवानी के प्रेम और वैभव की कोई दूसरी तुलना नहीं है।

अन्तरों में कवि और गायक लखबीर सिंह लक्खा ने माँ के ऊँचे पर्वतों पर स्थित धाम (जैसे वैष्णो देवी या विभिन्न शक्तिपीठों) का सजीव चित्रण किया है। त्रिकूट पर्वत या ऊंचे शिखरों पर विराजमान माँ के चरणों में संपूर्ण संसार झुकता है। यहाँ तक कि वेदों और पुराणों ने भी माँ के यश का गान किया है। "जो भी दर पे आया उसने पाया है खजाना" पंक्ति यह विश्वास दिलाती है कि माँ के द्वार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। अंत में, भक्त अपनी विनती रखते हुए कहता है कि हे मैया! तू ही इस डूबती हुई नौका का खेवनहार है और इस संसार सागर से पार लगाने वाली एकमात्र महाशक्ति है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता, लयबद्धता और तीव्र भक्ति रस से परिपूर्ण शब्दावली है। लखबीर सिंह लक्खा की ऊर्जावान और भावुक गायकी शैली श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। यह भजन केवल उत्सवधर्मी नहीं है, बल्कि यह संकट के समय मनुष्य को मानसिक संबल प्रदान करता है। इसे देवी भागवत, मार्कण्डेय पुराण और दुर्गा सप्तशती के उस दार्शनिक संदेश से जोड़कर देखा जा सकता है जिसमें माँ को 'सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता' (सभी प्राणियों में शक्ति रूप में स्थित) माना गया है। नवरात्रि, अष्टमी, नवमी और माँ के जागरण के अवसरों पर इस भजन का गूँजना वातावरण को चैतन्य कर देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को प्रातः काल स्नान के पश्चात माँ के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करके अथवा संध्याकालीन आरती के समय सुना या गाया जा सकता है। नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से जब घटस्थापना और माँ की पूजा की जाती है, तब यह भजन अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे सपरिवार बैठकर, ताली बजाकर और सामूहिक संकीर्तन के रूप में गाना सबसे उत्तम माना गया है क्योंकि सामूहिक गायन से सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है। आप इसके साथ श्री दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी आदिशक्ति, जगदम्बा, माता पार्वती, दुर्गा और भवानी हैं, जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति, पालन और संहार की शक्ति का प्रतीक हैं। वहीं, इस भजन को अपनी सुरीली आवाज से अमर बनाने वाले लोकप्रिय गायक लखबीर सिंह लक्खा हैं, जिन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में माता रानी के अनगिनत लोकप्रिय भजन गाकर देश-विदेश के करोड़ों भक्तों को भक्ति मार्ग से जोड़ा है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लखबीर सिंह लक्खा के गाए हुए अधिकांश भजन हिंदी भाषी क्षेत्रों के साथ-साथ संपूर्ण भारत और विदेशों में बसे सनातन धर्मावलंबियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हैं। 1990 और 2000 के दशक में जब कैसेट्स और ऑडियो का दौर था, तब से लेकर आज डिजिटल युग तक, यह भजन माता के हर पंडाल और मंदिर की पहली पसंद बना हुआ है। इसकी रचना समकालीन भक्ति संगीतकारों और गीतकारों द्वारा इस प्रकार की गई है कि आम जनमानस की जुबान पर इसके शब्द सहज ही बैठ जाएं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल खड़ी हिंदी और ब्रज-अवधि के मिले-जुले लोक प्रचलित स्वरूप में रचा गया है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे "प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी" में ओज और माधुर्य का अद्भुत समन्वय है। शब्दावली इतनी सुगम है कि बच्चे से लेकर वृद्ध तक इसे आसानी से समझ और गुनगुना सकते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन की कितनी भी विकट परिस्थितियां क्यों न हों, यदि मनुष्य का ईश्वर पर अटूट विश्वास है, तो वह हर संकट से पार पा सकता है। माँ भवानी का दरबार जाति, धर्म, ऊंच-नीच के भेदों से परे सभी के लिए खुला है। यह हमें शरण गति (Surrender) का पाठ पढ़ाता है कि अहंकार को त्यागकर जब हम परम शक्ति के चरणों में नतमस्तक होते हैं, तो सारे रास्ते स्वतः सुगम हो जाते हैं। आप इसके साथ श्रीमद्भगवद्गीता के मुख्य संदेश का भी स्मरण कर सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
भवानी माता पार्वती / दुर्गा संसार के चक्र से मुक्त करने वाली आदि शक्ति
बेमिसाल अद्वितीय, जिसकी कोई तुलना न हो ईश्वर का प्रेम और वैभव अलौकिक है
धाम पवित्र निवास स्थान / तीर्थ देवी-देवताओं का पावन क्षेत्र
दातार देने वाला / दाता सबकी झोली भरने वाली करुणामयी माँ
पैगंबर / सहारा मार्गदर्शक / रक्षक संकट में ढाल बनकर साथ देने वाली शक्ति

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी..." - यहाँ भक्त माँ के भौतिक और आध्यात्मिक दरबार की सुंदरता का वर्णन करता है। यह सजावट केवल फूलों की नहीं, बल्कि भक्तों के प्रेम और श्रद्धा की है।
"ऊँचे पर्वतों पे तेरा धाम है सजाया..." - माँ की उपासना हमेशा ऊँचे और एकांत स्थानों पर, अर्थात भौतिक तंगियों से ऊपर उठकर आध्यात्मिक चेतना के शिखर पर होती है।
"दीन-दुखियों की तू ही तो है सहारा..." - जब दुनिया साथ छोड़ देती है, तब माँ की करुणा ही अंतिम शरणस्थली बनती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है:

"सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

श्रेणी विवरण
भजन का नाम Wo Hai Jag Se Bemisaal / Pyara Saja Hai Tera Dwar Bhawani
गायक लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha)
आराध्य देवी माता दुर्गा / भवानी / आदिशक्ति
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव भक्ति, शरणागति, वात्सल्य और प्रेम
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, चौकी, संध्या वंदना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह प्रसिद्ध भजन लोकप्रिय देवी गीत गायक श्री लखबीर सिंह लक्खा जी द्वारा अपनी ओजस्वी और मधुर आवाज में गाया गया है।

इस भजन को शारदीय और चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, मंगलवार या शुक्रवार की पूजा तथा किसी भी मांगलिक उत्सव के दौरान सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

'भवानी' माता पार्वती या दुर्गा का ही एक नाम है, जिसका अर्थ संसार को उत्पन्न करने वाली और भव (संसार) से पार लगाने वाली महाशक्ति होता है।

हाँ, इसे आप घर पर पूजा के समय, ध्यान लगाते वक्त या अकेले में भी पूर्ण भक्ति भाव से सुन और गा सकते हैं। यह मन को शांत करता है।

वर्ष में आने वाले दोनों गुप्त नवरात्रि और मुख्य शारदीय व चैत्र नवरात्रि माँ दुर्गा की आराधना के लिए सर्वोच्च पर्व माने जाते हैं।

यह भजन हमें ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास, संकट के समय धैर्य रखने और अपनी झोली (जीवन) को सत्कर्मों से भरने की प्रेरणा देता है।

बिल्कुल, भक्ति संगीत और विशेषकर देवी संकीर्तन सुनने से मस्तिष्क की तरंगे शांत होती हैं और तनाव दूर होता है।

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संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन भक्ति परंपरा, लोक संस्कृति और उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को धार्मिक गीतों के सही बोल, उनका भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन धर्म की लोक भजन परंपरा एवं मौखिक साहित्य
  • दुर्गा सप्तशती एवं देवी भागवत पुराण के दार्शनिक प्रसंग
  • भक्ति संगीत संग्रह एवं पारंपरिक संकीर्तन ग्रंथ

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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