Shilpi Raj | Chhath ghate Daura Pahunchadin | छठ घाटे दउरा पहुंचदिन | RANGOLI STUDIO DELHI
लोक आस्था, सूर्योपासना और पवित्रता के महान पर्व छठ पूजा के पावन अवसर पर भोजपुरी संगीत जगत की लोकप्रिय गायिका शिल्पी राज का यह भजन "Shilpi Raj | Chhath ghate Daura Pahunchadin | छठ घाटे दउरा पहुंचदिन | RANGOLI STUDIO DELHI" उत्तर भारत विशेषकर बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के घर-घर में गूंजने वाला एक बेहद भावुक और सांस्कृतिक गीत है। छठ महापर्व चार दिनों तक चलने वाला ऐसा अनुष्ठान है जिसमें छठी मईया और भगवान सूर्य नारायण की उपासना की जाती है। इस गीत में एक व्रती महिला के मन के उत्साह, लोक परंपराओं, पूजा की टोकरी (दउरा) को लेकर घाट तक पहुँचने के उल्लास और सूर्य भगवान के प्रति अटूट निष्ठा का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया है। रंगोली स्टुडियो दिल्ली द्वारा प्रस्तुत यह भजन लोक कला और भक्ति रस का अनूठा संगम है, जो श्रोताओं को लोक संस्कृति के करीब ले जाता है।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
उगी हे सुरुज देव भइले बिहान,
दउरा उठाइले हमनी चलनी घटव्विया हे राम।
छठ घाटे दउरा पहुंचदिन ए छठी मईया,
कइनी बरतिया तोहोर धइले बहंगिया हे राम..
घाट पर उमड़ल बा जनसैलाब भारी,
कोन बड़ाई करी हम मईया तोहार महिमा अनियारी।
केरा के पात पर सजले सुरुज देव मूरतिया,
रउरे आसरा हम त कइनी बरतिया हे मईया..
दउरा में सजले कसार अउर ठेकुआ पकवान,
सूप सुतली से सजवले घाट धइले धिया जियान।
शिल्पी राज गावे महिमा छठी मईया के गान,
सुरुज भगवान कइले भक्तन के कल्याण।।
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
इस पावन गीत के माध्यम से लोक गायिका शिल्पी राज ने छठ व्रती के अंतर्मन की भावनाओं को बहुत ही सरल और प्रभावी शब्दों में पिरोया है। गीत की पंक्तियों का विस्तृत भावार्थ निम्नलिखित है:
व्रती स्त्री प्रातःकाल भगवान सूर्य को पुकारती है कि हे सूर्य देव! अब सुबह हो चुकी है, हमारे व्रत का समय हो गया है और हम अपने सिर पर या हाथों में पूजा की टोकरी (दउरा) उठाकर पवित्र छठ घाट की ओर प्रस्थान कर रही हैं। हे छठी मईया! आपके आशीर्वाद से ही हमने यह कठिन निर्जला व्रत धारण किया है और आज हम ससम्मान पूजा का दउरा घाट तक पहुँचा रहे हैं।
आगे व्रती बताती है कि छठ घाट पर चारों तरफ अपार जनसमूह उमड़ा हुआ है। हर कोई भक्ति भाव में लीन है। हे मईया! आपकी महिमा अपरंपार और अलौकिक है, जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। केले के पत्तों और स्तंभों के बीच जब भगवान भास्कर की प्रतिमा या उनका प्रत्यक्ष रूप दिखाई देता है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि सारा ब्रह्मांड उनकी ज्योति से प्रकाशित हो रहा है। हमने केवल आपके ही भरोसे पर यह कठिन व्रत पूर्ण निष्ठा से रखा है।
गीत के अंतिम चरणों में पूजा की सामग्री का सुंदर वर्णन है—दउरे में सजा हुआ पवित्र कसार, पारंपरिक ठेकुआ, मौसमी फल और बांस के सूप से सजे हुए घाट का दृश्य मन को मोह लेता है। गायिका शिल्पी राज छठी मईया के यश का गान करती हुई कहती हैं कि भगवान सूर्य सभी भक्तों का कल्याण करते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि का संचार करते हैं।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
यह गीत मुख्य रूप से लोक आस्था, समर्पण, अनुशासन और कृतज्ञता की भावना से ओत-प्रोत है। छठ पर्व केवल एक पूजा नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है। इस गीत का संदेश यह है कि जब मनुष्य अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़कर पूरी पवित्रता और सच्चे भाव से प्रकृति (सूर्य देव और जल) की आराधना करता है, तो उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह गीत पारिवारिक एकता, महिलाओं के त्याग और लोक संस्कृति की जीवंतता का संदेश देता है। आप इस पर्व के धार्मिक महत्व को समझने के लिए छठ पूजा व्रत कथा का भी अध्ययन कर सकते हैं।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम | Chhath ghate Daura Pahunchadin (छठ घाटे दउरा पहुंचदिन) |
|---|---|
| गायिका | शिल्पी राज (Shilpi Raj) |
| प्रस्तुति / बैनर | रंगोली स्टुडियो दिल्ली (Rangoli Studio Delhi) |
| भाषा | भोजपुरी (लोक भाषा) |
| विषय / थीम | छठ महापर्व, सूर्योपासना, लोक आस्था |
| मुख्य प्रसंग | छठ घाट पर दउरा ले जाना और छठी मईया की महिमा |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
लोकप्रिय गायिका शिल्पी राज ने अपनी सुमधुर और ठेठ लोक शैली की आवाज में इस गीत को गाकर इसे अमर बना दिया है। 'रंगोली स्टुडियो दिल्ली' के बैनर तले रिलीज यह गीत पूर्वांचल की संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाले प्रमुख गीतों में गिना जाता है। लोक संगीत के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठानों और पर्वों की जीवंतता को बनाए रखने में ऐसे कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे ही अन्य सांस्कृतिक पर्वों के बारे में जानने के लिए आप दीपावली पूजा विधि और पर्व परंपराओं को भी पढ़ सकते हैं।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| दउरा | बांस से बनी बड़ी टोकरी | छठ पूजा की सामग्री रखने के लिए प्रयुक्त |
| घटव्विया | घाट की ओर जाने वाली | नदी या तालाब के तट की ओर प्रस्थान |
| बहंगी | बांस का डंडा जिसपर दोनों ओर टोकरी लटकाई जाती है | सामग्री ढोने का पारंपरिक साधन |
| कसार | चावल के आटे और गुड़ से बना प्रसाद | छठ पर्व का मुख्य प्रसाद |
| ठेकुआ | गेहूं के आटे और गुड़/चीनी से बनी खास मिठाई | छठ का सबसे प्रमुख नैवेद्य |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ पर्व सनातन संस्कृति का वह अनोखा पर्व है जिसमें उगते हुए सूर्य के साथ-साथ अस्ताचलगामी (डूबते हुए) सूर्य की भी पूजा की जाती है। यह इस बात का प्रतीक है कि जीवन में उतार-चढ़ाव दोनों स्वाभाविक हैं और हर परिस्थिति में ईश्वर का आभार व्यक्त करना चाहिए। यह गीत उस सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करता है जहाँ महिलाएं बिना खाए-पिए लगातार 36 घंटे का कठिन उपवास रखती हैं और अपने परिवार के कल्याण की कामना करती हैं। इस गीत को सुनकर प्रवासियों के मन में अपने घर और मातृभूमि के प्रति खिंचाव पैदा होता है।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- कठिन परिश्रम और संयम: छठ व्रत यह सिखाता है कि जीवन के बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कठोर अनुशासन और संयम की आवश्यकता होती है।
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: सूर्य, जल, वायु और पृथ्वी के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती; इनकी पूजा हमारी कृतज्ञता दर्शाती है।
- पारिवारिक सहयोग: पर्व के दौरान पूरा परिवार मिलकर सामग्री तैयार करता है, जो आपसी एकता का संदेश देता है।
- संस्कृति से जुड़ाव: आधुनिकता की दौड़ में भी अपनी लोकभाषा और संस्कृति से जुड़े रहना आत्मिक शांति देता है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत विशेष रूप से कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानी छठ महापर्व के दौरान (नहाय-खाय से लेकर उद्यमी सूर्य को अर्घ्य देने तक) घर-घर, गलियों और छठ घाटों पर बजाया जाता है। इसके अलावा लोकगीत प्रेमियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मेलों और पारंपरिक उत्सवों में भी इसे चाव से सुना और गाया जाता है। सूर्य उपासना के नियमित मंत्रों के लिए आप सूर्य नमस्कार मंत्र का भी पाठ कर सकते हैं।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| गीत शीर्षक | Chhath ghate Daura Pahunchadin |
| गायक | शिल्पी राज |
| मंच / स्टूडियो | रंगोली स्टुडियो दिल्ली |
| संगीत शैली | भोजपुरी लोक गीत / छठ गीत |
| मुख्य पर्व | छठ महापर्व (सूर्य छठी) |
| संदेश | भक्ति, लोक संस्कृति और सूर्योपासना |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह आलेख लोक संस्कृति, संगीत और पारंपरिक अनुष्ठानों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत किया गया है। इसमें प्रयुक्त शब्द और भावार्थ पारंपरिक मान्यताओं और क्षेत्रीय लोक-साहित्य पर आधारित हैं।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पूर्वांचल की लोक संगीत परंपरा और छठ गीत संग्रह
- रंगोली स्टुडियो दिल्ली के आधिकारिक ऑडियो-विजुअल प्रकाशन
- भारतीय सनातन लोक पर्व एवं सूर्योपासना के सांस्कृतिक ग्रंथ
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