Parvati Stotram

सांवरा सांवरा हारे का बाबा तू सहारा भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

63 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भजन परिचय: सांवरा सांवरा हारे का बाबा तू सहारा भक्ति

कलयुग के अवतारी, हारे के सहारे और तीन बाण धारी बाबा श्याम (खाटू श्याम जी) के चरणों में समर्पित यह अत्यंत पावन भजन "सांवरा सांवरा हारे का बाबा तू सहारा" अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और अगाध विश्वास का प्रतीक है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि उन करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों, हार और निराशा के क्षणों में सांवरे की शरण में पहुंचते हैं। यह भजन साधक के अंतर्मन को झकझोर कर उसमें भगवान श्री कृष्ण के बाल और युवा स्वरूप श्याम बाबा के प्रति भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है। जब भक्त चारों ओर से निराश होकर दुनिया के बंधनों से थक जाता है, तब उसे केवल एक ही नाम और एक ही शक्ति संबल प्रदान करती है—वह है खाटू वाले सांवरे का दरबार। इस भजन का गायन और श्रवण करने मात्र से हृदय में एक अलौकिक शांति और अटूट विश्वास जागृत होता है कि चाहे दुनिया रूठ जाए, पर हारे का सहारा बाबा श्याम हमेशा अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। सनातन धर्म और भक्ति परंपरा में संकीर्तन को कलयुग का सबसे सरल और प्रभावशाली साधन माना गया है, और यह भजन उसी संकीर्तन की महिमा को चरितार्थ करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्री खाटू श्याम जी का पावन भजन


स्थाई (मुखड़ा):
सांवरा सांवरा हारे का बाबा तू सहारा,
तेरे चरणों में बीते उम्र मेरी सारी सांवरा!
हारे का बाबा तू सहारा, सांवरा सांवरा...

अंतररा 1:
दुनिया के ठुकराए हुओं को तूने गले लगाया,
जिसने भी तुझे पुकारा, तू दौड़ा चला आया।
तेरी कृपा का कोई अंत नहीं है दाता,
तू ही इस सृष्टि का है पालनहार विधाता!
सांवरा सांवरा हारे का बाबा तू सहारा...

अंतररा 2:
तीन बाण धारी, लीला तेरी न्यारी,
शीश के दानी तेरी महिमा है सबसे प्यारी।
जो भी खाटू आया, झोली भर के गया,
तेरा दर ऐसा, जहाँ हर दुखी सुखी हुआ!
सांवरा सांवरा हारे का बाबा तू सहारा...

अंतररा 3:
कलयुग में तूने अपना नाम अमर किया है,
हर भक्त के दुख को तूने ही हर लिया है।
अनिश वर्मा की वाणी, गाए तेरा गुणगान,
चरणों की धूल दे दो, यही मेरा वरदान!
सांवरा सांवरा हारे का बाबा तू सहारा,
तेरे चरणों में बीते उम्र मेरी सारी सांवरा!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और परमात्मा के बीच के अटूट रिश्ते की सुंदर अभिव्यक्ति है। भजन की मुख्य पंक्ति "सांवरा सांवरा हारे का बाबा तू सहारा" इस बात का द्योतक है कि जब मनुष्य जीवन के संघर्षों से हार जाता है, समाज और अपने उसे छोड़ देते हैं, तब खाटू श्याम बाबा ही एकमात्र ऐसा आत्मीय संबल बनते हैं जो हारे हुए को गले लगाते हैं। महाभारत के प्रसिद्ध पात्र बर्बरीक, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण ने कलियुग में अपने नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था, वही आज 'हारे का सहारा' के रूप में पूजे जाते हैं।

भजन के भावार्थ में यह स्पष्ट किया गया है कि बाबा श्याम का दरबार किसी भेदभाव को नहीं मानता। यहाँ राजा हो या रंक, अमीर हो या गरीब, सभी को एक समान प्रेम और आशीर्वाद प्राप्त होता है। "दुनिया के ठुकराए हुओं को तूने गले लगाया" यह पंक्ति भगवान की करुणा का सजीव चित्रण करती है। साधक अपने आराध्य से प्रार्थना करता है कि उसकी संपूर्ण आयु केवल और केवल श्याम बाबा की भक्ति और उनके चरणों की सेवा में ही व्यतीत हो। यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह एक भक्त की वह पुकार है जो उसके भीतर छिपे अंहकार को समाप्त कर पूर्ण समर्पण का भाव पैदा करती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की रचना और गायन शैली में खाटू श्याम जी के प्रति अनन्य समर्पण झलकता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • हारे के सहारे का संदेश: यह भजन निराशा के अंधकार में डूबे व्यक्ति को आशा की किरण दिखाता है।
  • श्री कृष्ण का स्वरूप: बर्बरीक से श्याम बने बाबा खाटू वाले के रूप का इसमें जीवंत वर्णन किया गया है।
  • सरल और मधुर भाषा: आम जनमानस की भाषा में रचित होने के कारण यह तुरंत हृदय को स्पर्श करता है।
  • मानसिक शांति: इसके निरंतर स्मरण से मानसिक तनाव, चिंता और भय दूर होते हैं और आंतरिक बल की प्राप्ति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन गायन के लिए किसी कठोर नियम की आवश्यकता नहीं होती, केवल भाव और पवित्रता मुख्य होती है:

  • उचित समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के पश्चात या संध्या बेला में दीप प्रज्वलित करने के बाद इस भजन का गान या श्रवण अत्यंत फलदायी होता है।
  • स्थान: घर के पूजा कक्ष में खाटू श्याम जी के चित्र या विग्रह के समक्ष धूप-दीप जलाकर इसे गाया जा सकता है।
  • सांसारिक आयोजन: मासिक एकादशी, खाटू श्याम फाल्गुनी लक्खी मेला, या किसी भी पारिवारिक सत्संग और जागरण के अवसर पर इस भजन का सामूहिक गान वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक) को समर्पित है, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण का ही कलयुगी अवतार माना जाता है। बर्बरीक पांडੁपुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। अपनी माता से सीखे गए वचनों और हमेशा 'हारे के साथ रहने' की प्रतिज्ञा के कारण उन्होंने महाभारत युद्ध में कमजोर पक्ष (यानी कौरवों, जब वे हारने लगे थे) का साथ देने का संकल्प लिया था। उनकी इस अद्वितीय निष्ठा और दानशीलता को देखकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें अपने शीश का दान मांगकर 'शीश के दानी' और 'हारे के सहारे' के रूप में कलयुग में पूजे जाने का वरदान दिया। इस भजन को अनिता वर्मा जी द्वारा स्वरबद्ध किया गया है, जिनकी सुमधुर आवाज ने इसमें भक्ति रस की पराकाष्ठा को छुआ है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सहज और प्रवाहमान हिंदी (खड़ी बोली एवं राजस्थानी लोक शैली के मिश्रण) में रचा गया है। इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जो इसकी लयात्मकता को बढ़ाते हैं। शब्दों का चयन इतना सरल और हृदयस्पर्शी है कि संगीत के बिना भी इसे गुनगुनाने मात्र से आंखों में प्रेम के अश्रु और चेहरे पर संतोष का भाव आ जाता है। काव्य की दृष्टि से यह एक उत्कृष्ट पद है जो गेयता (Singability) के गुणों से परिपूर्ण है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के सबसे बड़े सत्यों से अवगत कराता है:

  1. धैर्य और विश्वास: विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए।
  2. अहंकार का त्याग: जब मनुष्य अपनी शक्ति पर गर्व करना छोड़ देता है और भगवान को सब कुछ मान लेता है, तब बाबा श्याम स्वयं उसकी नैया पार लगाते हैं।
  3. दूसरों की सहायता: हारे हुए और निराश व्यक्ति की मदद करना ही सबसे बड़ी सच्ची भगवत सेवा है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संधर्भ / भाव
सांवरा श्याम वर्ण वाले, श्री कृष्ण रूपी बाबा भक्त द्वारा अपने प्रिय आराध्य का स्नेहिल संबोधन
हारे का सहारा जो जीवन में निराश या पराजित हो गए हैं, उनका बल खाटू श्याम जी की मुख्य उपाधि
तीन बाण धारी तीनों लोकों को जीतने में सक्षम तीन अमोघ बाण रखने वाले बर्बरीक जी की अस्त्र विद्या
शीश के दानी अपना सिर हंसते-हंसते दान करने वाले महाभारत काल का महान त्याग प्रसंग
संकीर्तन ईश्वर के गुणों और नामों का सामूहिक गान कलयुग में मुक्ति का सरल मार्ग

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सांवरा सांवरा हारे का बाबा तू सहारा..."
भक्त अपने इष्ट को सांवरे के नाम से पुकारते हुए कहता है कि हे बाबा! इस संसार में जब कोई अपना नहीं रहता और हर तरफ से हार मिलती है, तब केवल आप ही हमारे एकमात्र रक्षक और संबल बनते हैं।

"दुनिया के ठुकराए हुओं को तूने गले लगाया..."
समाज द्वारा उपेक्षित और दुखी इंसानों को जब कहीं आश्रय नहीं मिलता, तब खाटू नरेश उन्हें अपनी शरण में लेकर माता-पिता की भांति प्रेम प्रदान करते हैं।

"तीन बाण धारी, लीला तेरी न्यारी..."
हे बर्बरीक! आपके पास ऐसी असीम शक्तियां हैं जिनकी लीला इस संसार की समझ से परे है। आप भक्तों के सभी संकटों को पल भर में दूर कर देते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

खाटू श्याम बाबा के स्मरण और ध्यान के लिए निम्नलिखित पावन मंत्र का जप अत्यंत फलदायी माना गया है:

ॐ श्री श्याम देवाय नमः

"शीश के दानी तुझे प्रणाम, हारे के सहारे को कोटि-कोटि प्रणाम।"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम सांवरा सांवरा हारे का बाबा तू सहारा
समर्पित देवता श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक)
गायक / कलाकार अनिता वर्मा
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-राजस्थानी मिश्रित
विषय / थीम शरणागति, भक्ति, और हारे का सहारा
मुख्य भाव अनन्य प्रेम, विश्वास और समर्पण
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, एकादशी, जागरण, और सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह लोकप्रिय भजन प्रसिद्ध भजन गायिका अनिता वर्मा जी द्वारा अपनी सुमधुर आवाज में गाया गया है।

पौराणिक कथा के अनुसार बर्बरीक ने वचन लिया था कि वे युद्ध में हमेशा हारे हुए पक्ष का साथ देंगे। इसी कारण उन्हें कलयुग में 'हारे का सहारा' कहा जाता है जो जीवन में निराश भक्तों की सहायता करते हैं।

हाँ, इस भजन को आप अपने घर पर पूजा के समय, सुबह या शाम को श्रद्धापूर्वक गा या सुन सकते हैं। इससे घर का वातावरण सकारात्मक बनता है।

खाटू श्याम जी का भव्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू कस्बे में स्थित है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

प्रत्येक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी तिथि खाटू श्याम बाबा के दर्शन के लिए सबसे पवित्र और विशेष मानी जाती है।

खाटू श्याम बाबा असल में पांडवों के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक हैं, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण का वरदान प्राप्त है।

भजन के मधुर शब्द और ईश्वर के गुणों का स्मरण हमारे मन के विकारों, चिंताओं और नकारात्मक विचारों को शांत करके आंतरिक प्रसन्नता और ऊर्जा प्रदान करता है।

निश्चित रूप से, यह भजन श्याम संकीर्तन, चौकी और जागरण के कार्यक्रमों में सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले और झूमने पर मजबूर करने वाले भजनों में से एक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ, और धार्मिक संदर्भों को सनातन परंपरा, खाटू श्याम जी के इतिहास और प्रामाणिक लोक कथाओं के आधार पर सत्यापित किया गया है ताकि पाठकों को उच्च कोटि की आध्यात्मिक सामग्री प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन पौराणिक कथाएं एवं महाभारत ग्रंथ
  • खाटू श्याम मंदिर ट्रस्ट की ऐतिहासिक परंपराएं एवं जनश्रुतियां
  • भक्तिकालीन संकीर्तन परंपरा एवं लोकगीत संग्रह

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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