आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरَس्वती को समर्पित यह अत्यंत भावपूर्ण और कर्णप्रिय भजन "हे जगदम्बा ना भुलइहा | Ravindra Singh Jyoti" जगत जननी जगदम्बा की असीम करुणा, ममता और महिमा का अद्भुत गान करता है। सनातन वैदिक संस्कृति में स्त्री शक्ति को चराचर जगत का मूल आधार, प्राणशक्ति और चेतना माना गया है। प्रसिद्ध गायक रविंद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti) की सुरीली और समर्पित आवाज में गाया गया यह भजन साधक के भीतर भक्ति के ऐसे भाव जगाता है जहाँ वह मां के चरणों में अपनी पूर्ण शरणागति अर्पित करता है। नवरात्र के पावन दिनों, देवी जागरण, माता की चौकी अथवा दैनिक संध्या वंदन के समय इस भजन का स्मरण एवं श्रवण करने से मन को असीम शांति और अलौकिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि भक्त चाहे संसार के प्रपंचों में कितना भी उलझ जाए, माता कभी अपने सच्चे भक्तों का हाथ नहीं छोड़तीं और उन्हें अपनी शरण में रखती हैं।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मुखड़ा:
हे जगदम्बा ना भुलइहा, ओ मैया हमके अपना चरणवा में रखिहा!
दरश दिखा के अपना भाग जगाइहा, हे जगदम्बा ना भुलइहा।
अंतरा 1:
भटकत बानी हम तऽ एह संसार में,
मियां फँस गइनी माया के जंजाल में।
अब तऽ तूही गोहरावे के बारी बा,
मैया डूबत नइया पार लगइहा, हे जगदम्बा ना भुलइहा।
अंतरा 2:
पाप-पुण्य के भार हम तऽ ढोवत बानी,
अपन अभागिया रोवत बानी।
तोर महिमा अपरम्पार मैया मोर,
बिगड़ल भाग्य हमार बनाइहा, हे जगदम्बा ना भुलइहा।
अंतरा 3:
रविंद्र गावे तोर महिमा गुणगान,
मैया देहि शरणिया में तू ही वरदान।
बालक जानि के अपराध बिसराइहा,
चरण कमलन में सदा थइहा, हे जगदम्बा ना भुलइहा।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस पावन भजन का मूल भाव एक अबोध बालक और उसकी माता के बीच के पवित्र रिश्ते पर आधारित है। साधक अपनी त्रुटियों और संसार की मोह-माया में फंसने के बाद माता जगदम्बा को पुकारता है। वह कहता है कि हे मैया! इस भवसागर रूपी संसार में भटकते हुए मैं माया के जाल में उलझ गया हूँ। अब मेरे पास आपको पुकारने के अलावा और कोई दूसरा उपाय नहीं बचा है। जैसे एक माता अपने रोते हुए और भटकते हुए बालक को अपने आंचल में छुपा लेती है, वैसे ही हे जगदम्बा! आप भी मेरी इस जीवन नइया को इस भवसागर से पार लगा दीजिए।
भजन के अगले चरण में भक्त अपने संचित कर्मों और पाप-पुण्य के भार का स्मरण करता हुआ अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगता है। वह स्वीकार करता है कि मनुष्य होने के नाते उससे कई भूले हुई हैं, परंतु माता का हृदय तो क्षमा और करुणा का सागर है। गायक रविंद्र सिंह ज्योति ने बहुत ही सुंदर तरीके से इस बात को रेखांकित किया है कि चाहे भक्त कितना भी अज्ञानी या पापी क्यों न हो, जब वह सच्चे मन से जगदम्बा की शरण में आता है, तो मां अपने वात्सल्य से उसके सभी कष्टों को हर लेती हैं और उसे अभय प्रदान करती हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन लोकभाषा और शुद्ध भक्ति रस का एक अनूठा संगम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- समर्पण और शरणागति: भजन का हर एक शब्द साधक के भीतर अहंकार को त्यागकर माता के प्रति पूर्ण समर्पण (Surrender) की भावना जागृत करता है।
- लोकप्रिय गायन शैली: रविंद्र सिंह ज्योति जी की विशिष्ट शैली और क्षेत्रीय लोक धुनों का प्रभाव इसे हर वर्ग के श्रोताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाता है।
- मानसिक शांति और संबल: संकट के समय इस भजन को सुनने से मानसिक संताप दूर होते हैं और आत्मबल में वृद्धि होती है।
- सनातन संस्कृति में दुर्गा सप्तशती पाठ विधि के साथ ऐसे भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन का गायन और श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है:
- ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्याकाल: प्रातः काल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर माता के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करते समय इस भजन का स्मरण मन को पूरे दिन ऊर्जावान रखता है।
- नवरात्रि के नौ दिन: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के पावन अवसरों पर माता की चौकी, जागरण और घरों में होने वाले अनुष्ठानों में यह भजन अनिवार्य रूप से गाया जाता है।
- शुक्रवार और मंगलवार की पूजा: मां दुर्गा और लक्ष्मी जी की विशेष पूजा के दिनों में धूप-दीप अर्पित करते हुए इसका संकीर्तन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की आराध्य देवी माता जगदम्बा (आदिशक्ति माँ दुर्गा) हैं, जो महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का संयुक्त स्वरूप हैं। संपूर्ण चराचर जगत का संचालन करने वाली वही आदि शक्ति हैं। इस भजन के प्रणेता एवं लोकप्रिय गायक रविंद्र सिंह ज्योति हैं, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी से देवी के इस रूप को जीवंत कर दिया है। देवी उपासना की परंपरा में मां दुर्गा की आरती के साथ ऐसे भजनों का गायन साधक को ईश्वरीय चेतना के और निकट ले जाता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
भजन की रचना लोक संगीत और आधुनिक भक्ति संगीत के सुंदर समन्वय से हुई है। भोजपुरी एवं हिंदी भाषी क्षेत्रों की पारंपरिक लोक धुनों को आधार बनाकर इसे तैयार किया गया है। गीतकार और गायक ने उन साधारण शब्दों का चयन किया है जो सीधे आम जनमानस के हृदय को स्पर्श करते हैं। यह रचना इस बात का प्रमाण है कि शुद्ध भाव से पुकारने पर जगत जननी अपने भक्तों की सुधि अवश्य लेती हैं।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल हिंदी और लोकभाषा (भोजपुरी/अवधी प्रभाव युक्त) का सहज मिश्रण है। इसमें 'भुलइहा', 'रखिहा', 'लगइहा' जैसे लोक शब्दों का प्रयोग इसे और अधिक मार्मिक और अपनेपन से परिपूर्ण बनाता है। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें विप्रलंभ और शांत रस के साथ-साथ अनन्य भक्ति रस की प्रधानता है। रूपकों और प्रतीकों के माध्यम से जीवन की नइया और भवसागर जैसे आध्यात्मिक सत्यों को बहुत ही सरल रूप में समझाया गया है.
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत का साधन नहीं है, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है:
- अहंकार का त्याग: मनुष्य को अपनी बुद्धि और बल का अहंकार छोड़कर ईश्वरीय शरण स्वीकार करनी चाहिए।
- क्षमा और कृपा पर विश्वास: कितनी भी बड़ी भूल हो जाए, यदि मनुष्य पश्चाताप की अग्नि में तपकर क्षमा मांगे, तो करुणा मई मां उसे क्षमा कर देती हैं।
- कर्म और भक्ति का संतुलन: जीवन के प्रपंचों के बीच भी ईश्वर का स्मरण बनाए रखना ही सच्ची साधना है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| जगदम्बा | जगत की माता (माँ दुर्गा) | संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी और पालनकर्ता |
| भुलइहा | भूल न जाना / स्मरण रखना | भक्त की यह विनती कि प्रभु हमें अपनी कृपा से वंचित न करें |
| माया के जंजाल | मोह-माया का बंधन | संसार के भौतिक प्रपंच जिसमें जीव उलझ जाता है |
| भवसागर | जन्म-मृत्यु का संसार चक्र | जिसे पार करने के लिए ईश्वरीय कृपा अनिवार्य है |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"हे जगदम्बा ना भुलइहा, ओ मैया हमके अपना चरणवा में रखिहा!"
इस पंक्ति में भक्त का आर्त स्वर गूंजता है। वह माता से प्रार्थना करता है कि हे ब्रह्मांड की संचालिका! इस विशाल संसार में मुझे अपने चरणों की शरण दें और कभी भी अपनी कृपा दृष्टि से ओझल न होने दें।
"भटकत बानी हम तऽ एह संसार में, मियां फँस गइनी माया के जंजाल में।"
यहाँ जीव अपनी लाचारी व्यक्त करता है कि सांसारिक मोह, सुख और दुखों के चक्रव्यूह में फंसकर वह अपने वास्तविक मार्ग से भटक गया है।
"मैया डूबत नइया पार लगइहा, बिगड़ल भाग्य हमार बनाइहा।"
यह जीवन एक नौका के समान है जो विकट परिस्थितियों में डगमगा रही है। भक्त अपनी इस नइया की पतवार माता के हाथों में सौंपकर उसे सुरक्षित पार लगाने की गुहार लगाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माता जगदम्बा के इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी होता है:
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
यह मंत्र माता के हर रूप को नमन करता है और साधक को सभी प्रकार के अमंगल से बचाता है। साथ ही नियमित रूप से ॐ जय जगदीश हरे आरती और देवी स्तोत्रों का पाठ करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | हे जगदम्बा ना भुलइहा |
| गायक / कलाकार | रविंद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti) |
| आराध्य देवी | माता आदिशक्ति दुर्गा / जगदम्बा |
| भाषा | हिंदी / भोजपुरी लोक शैली |
| मुख्य भाव | शरणागति, विनय और वात्सल्य |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, माता की चौकी, दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"हे जगदम्बा ना भुलइहा" भजन के गायक कौन हैं?
इस भजन के लोकप्रिय गायक रविंद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti) हैं, जिन्होंने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण आवाज में इसे प्रस्तुत किया है।
यह भजन किस देवी को समर्पित है?
यह भजन जगत जननी आदिशक्ति माता दुर्गा (जगदम्बा) को समर्पित है।
इस भजन को किस समय सुनना सबसे अच्छा होता है?
प्रातः काल पूजा के समय, संध्या वंदन के दौरान अथवा विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में इसे सुनना अत्यंत फलदायी माना गया है।
क्या इस भजन को घर पर होने वाले अनुष्ठानों में गाया जा सकता है?
हाँ, माता की चौकी, जागरण और किसी भी मांगलिक या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान इस भजन को पूर्ण भक्ति भाव से गाया जा सकता है।
भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अहंकार त्यागकर माता जगदम्बा के चरणों में पूर्ण शरणागति रखनी चाहिए, जिससे वह भवसागर से पार हो सके।
क्या इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है?
निश्चित रूप से, देवी के गुणों का गान और श्रवण करने से मन का तनाव दूर होता है और आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है।
इस भजन के साथ और कौन से पाठ किए जा सकते हैं?
इसके साथ दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती के श्लोक और माता की आरती का पाठ करना अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।
इस प्रकार के भजनों से हमारी संस्कृति को क्या लाभ है?
ऐसे भजन हमारी पारंपरिक जड़ों, लोक संगीत और सनातन संस्कृति को जीवित रखते हैं तथा आने वाली पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री भaktilok के उच्च संपादकीय मानकों के अनुसार तैयार की गई है। इसमें प्रामाणिक धार्मिक परंपराओं, लोक साहित्य और भक्ति संगीत के तत्वों का समावेश किया गया है ताकि पाठकों को एक संपूर्ण और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- सनातन देवी उपासना पद्धतियां एवं लोकगीत परंपरा
- श्री दुर्गा सप्तशती एवं पौराणिक आख्यान
- भक्ति संगीत संग्रह एवं पारंपरिक लोक संकीर्तन
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें