Parvati Stotram

जो भी सच्चे मन से इस भजन को सुनेगा उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होगी हार नहीं होगी भजन इन हिंदी लिरिक्स

56 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जो भी सच्चे मन से इस भजन को सुनेगा उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होगी हार नहीं होगी - संपूर्ण भजन और आध्यात्मिक व्याख्या

भक्ति और संगीत का संगम मनुष्य के अंतःकरण को पावन करने का सबसे सहज माध्यम है। जब कोई साधक अनन्य भाव से भगवान के चरणों में समर्पित होकर भजन-कीर्तन करता है, तो उसके जीवन के समस्त संताप स्वतः ही समाप्त होने लगते हैं। यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "जो भी सच्चे मन से इस भजन को सुनेगा उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होगी हार नहीं होगी भजन इन हिंदी लिरिक्स" ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास, समर्पण और पूर्ण शरणागति का जीवंत और प्रेरक उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम के जाप को कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता यानी परमात्मा से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है। यह रचना न केवल साधक को मानसिक शांति प्रदान करती है, बल्कि जीवन की विकट परिस्थितियों में भी हार न मानने की अद्भुत आंतरिक शक्ति देती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस भजन के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन की विधि और जीवनोपयोगी संदेशों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिससे आप इस पवित्र संकीर्तन का पूरा लाभ उठा सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ स्थायी (मुखड़ा) ॥

जो भी सच्चे मन से इस भजन को सुनेगा,
उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होगी, हार नहीं होगी!
प्रभु चरणों में जो ध्यान लगाएगा,
जीवन में कभी वो निराश न पाएगा!
हार नहीं होगी, कभी हार नहीं होगी,
सच्चे मन से जो गाएगा, उसकी बेड़ा पार होगी!

॥ अंतरा 1 ॥

दुनिया की भीड़ में जो खुद को अकेला पाए,
दुखों के सागर में जो पल-पल घबराए!
एक बार नाम तू सांवरिया का ले ले,
वह सारे दुखों को पल में दूर भगाए!
कृपा जिनकी बरसे सदा भक्तों के द्वारे,
वो प्रभु सबका ही जीवन संवारते हमारे!
हार नहीं होगी, कभी हार नहीं होगी...

॥ अंतरा 2 ॥

कर्मों की डोर से यह संसार बंधा है,
हर मोड़ पे यहाँ इम्तिहान खड़ा है!
जो रख ले भरोसा प्रभु की रजा पर,
उसी का ही हर सपना पूरा हुआ है!
सुख-दुख तो जीवन के दो पहिया प्यारे,
मैया और बाबा का पल्ला तू थाम ले सारे!
हार नहीं होगी, कभी हार नहीं होगी...

॥ अंतरा 3 ॥

कलयुग में नाम का ही केवल आधार है,
जो भजे हरि को, उसका बेड़ा पार है!
नियम और संयम से जो कीर्तन करेगा,
उसके जीवन में न कोई अंधकार है!
उठो हे मुसाफिर अब राह को पहचानो,
प्रभु की इस महिमा को तुम सत्य जानो!
हार नहीं होगी, कभी हार नहीं होगी,
सच्चे मन से जो गाएगा, उसकी बेड़ा पार होगी!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है। भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। मुखड़े में स्पष्ट किया गया है कि जो व्यक्ति किसी स्वार्थ के बिना, पूरी निष्ठा और सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं ईश्वर अवश्य पूर्ण करते हैं। जीवन में कितनी भी बाधाएं आएं, लेकिन भगवान पर अटूट विश्वास रखने वाले की कभी हार नहीं होती।

पहले अंतरे में उन लोगों को सांत्वना दी गई है जो संसार की भागदौड़ में खुद को अकेला या असहाय महसूस करते हैं। संकट के समय जब चारों तरफ से रास्ते बंद नजर आते हैं, तब प्रभु का नाम एक प्रकाशपुंज बनकर मार्ग दिखाता है। दूसरे अंतरे में कर्म और भाग्य के सिद्धांत को समझाते हुए बताया गया है कि यह संसार कर्मों के अधीन है, परंतु जो व्यक्ति ईश्वर की इच्छा (रजा) में रहना सीख जाता है, उसके जीवन के सभी कष्ट छंट जाते हैं। तीसरे और अंतिम अंतरे में कलयुग के प्रभाव और नामस्मरण की महिमा को रेखांकित किया गया है। संत महात्माओं का भी यही मत है कि कलयुग में केवल हरि नाम का संकीर्तन ही भवसागर से पार लगाने का एकमात्र अचूक साधन है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस पावन भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और मर्मस्पर्शी भाषा है, जो आम जनमानस के दिल को तुरंत छू लेती है। यह भजन किसी एक विशेष संप्रदाय तक सीमित न होकर संपूर्ण मानवता को ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण का संदेश देता है।

  • भक्ति भाव का संचार: इसे सुनने मात्र से मन के विकार, तनाव, और नकारात्मकता दूर होने लगती है।
  • आत्मविश्वास में वृद्धि: यह भजन मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानने की प्रेरणा देता है और मानसिक संबल प्रदान करता है।
  • सार्वभौमिक संदेश: इसमें भगवान श्री कृष्ण और अन्य आराध्य देवों की कृपा का सहज वर्णन है, जो सभी आयु वर्ग के भक्तों को आकर्षित करता है।
  • तनाव मुक्ति: आधुनिक जीवन की व्यस्तता और मानसिक अशांति के बीच यह भजन ध्यान और शांति का उत्तम माध्यम है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन श्रवण और गायन का कोई सख्त समय नहीं होता, क्योंकि ईश्वर स्मरण के लिए हर पल पवित्र है। फिर भी, आध्यात्मिक दृष्टि से कुछ विशेष समय इसके लिए अति उत्तम माने गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातःकाल: सुबह उठकर स्नान के पश्चात शांत चित्त से इस भजन को सुनने या गुनगुनाने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।
  • संध्यावचन एवं आरती के समय: शाम के वक्त घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करने के बाद इस भजन का संकीर्तन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मकता आती है।
  • साप्ताहिक सत्संग और व्रत के दिन: एकादशी, गुरुवार, या किसी भी पावन पर्व पर परिवार के साथ बैठकर इस भजन को गाना सामूहिक चेतना को जागृत करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन किसी एक विशिष्ट देवी-देवता के बंधन से परे समस्त आराध्य शक्तियों—विशेषकर भगवान श्री कृष्ण, जगत जननी माँ पार्वती Stotram और करुणा के सागर परमात्मा—को समर्पित है। सनातन परंपरा में संकीर्तन का यह मार्ग आदिकाल से चला आ रहा है। नारद मुनि से लेकर चैतन्य महाप्रभु और मीराबाई तक सभी ने नामस्मरण को ही मोक्ष का मार्ग बताया है। जब भक्त सच्चे भाव से भजन गाता है, तो उसका सीधा संवाद सृष्टिकर्ता के साथ स्थापित हो जाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस आधुनिक युग में लोक-संगीत और पारंपरिक भक्ति धाराओं के समन्वय से ऐसे भजनों की रचना की गई है जो नई पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखते हैं। इसकी पृष्ठभूमि भारतीय दर्शन के उस मूल सिद्धांत पर आधारित है जिसमें कहा गया है—"श्रद्धावान लभते ज्ञानम्"। रचनाकारों ने उन तमाम श्रद्धालुओं की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर इन पंक्तियों को गढ़ा है जो जीवन की असफलताओं से टूट जाते हैं और जिन्हें सांत्वना व संबल की आवश्यकता होती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सुबोध और प्रभावमयी हिंदी व ब्रज-अवधि मिश्रित लोकभाषा है। इसमें कठिन संस्कृतनिष्ठ शब्दों के स्थान पर सीधे और आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया गया है ताकि एक साधारण व्यक्ति भी इसके मर्म को आसानी से समझ सके। काव्य शैली में तुकबंदी (Rhyming) का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे—सुनेगा-पूर्ण होगी, लगाएगा-पाएगा, जो इसे गाने और याद रखने में अत्यंत सहज बनाता है। उपमा और रूपक अलंकारों के माध्यम से जीवन की तुलना यात्रा और सुख-दुख को पहिया बताया गया है, जो साहित्यिक दृष्टि से भी इसे समृद्ध बनाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई गहरे दार्शनिक और व्यावहारिक पाठ पढ़ाता है:

  1. अटूट विश्वास (Faith): ईश्वर पर भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत है। कठिनाइयां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, आस्था अडिग रहनी चाहिए।
  2. निराशा से मुक्ति (Hope): असफलताएं जीवन का अंत नहीं हैं, बल्कि वे हमें और अधिक मजबूत बनाने के लिए आती हैं।
  3. शरणगति (Surrender): अहंकार को त्यागकर भगवान के चरणों में समर्पित हो जाना ही सच्चे भक्त का लक्षण है।
  4. नियमित स्मरण (Constant Remembrance): व्यस्तता के बीच भी ईश्वर के नाम के लिए समय निकालना मानसिक संतुलन बनाए रखता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक / साहित्यिक संदर्भ
सच्चे मन से छल-कपट रहित, शुद्ध भाव से अहंकार और स्वार्थमुक्त होकर की गई प्रार्थना
मनोकामना मन की इच्छा या संकल्प धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सच्ची अभिलाषा
बेड़ा पार संकट से मुक्ति पाना इस भवसागर से आत्मा का सहज उद्धार होना
रजा इच्छा या मर्ज़ी परमात्मा के विधान को पूर्ण रूप से स्वीकार करना
संकीर्तन समूह में ईश्वर का गुणगान उच्च स्वर में सामूहिक रूप से प्रभु के नाम का जाप

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "जो भी सच्चे मन से इस भजन को सुनेगा, उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होगी..."
भावार्थ: यहाँ 'सच्चे मन' का अर्थ है कि मन में कोई दुर्भावना या छलावा न हो। जब कोई व्यक्ति शुद्ध अंतःकरण से प्रभु का गुणगान सुनता है, तो उसके भीतर की सकारात्मक ऊर्जा जागृत होती है, जिससे उसकी सभी मनोकामनाएं स्वतः पूर्ण होने का मार्ग प्रशस्त होता है।

पंक्ति: "दुनिया की भीड़ में जो खुद को अकेला पाए, दुखों के सागर में जो पल-पल घबराए..."
भावार्थ: आधुनिक युग में मनुष्य अपनों के बीच रहकर भी अकेलापन महसूस करता है। जब जीवन में विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ता है, तब बाहरी लोग साथ छोड़ देते हैं। ऐसे समय में ईश्वर ही एकमात्र ऐसे साथी हैं जो कभी साथ नहीं छोड़ते।

पंक्ति: "कर्मों की डोर से यह संसार बंधा है, हर मोड़ पे यहाँ इम्तिहान खड़ा है..."
भावार्थ: यह सृष्टि कर्म प्रधान है। हर जीव को अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ता है। जीवन का हर कदम एक परीक्षा की तरह है, जिसमें धैर्य और संयम की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने वाले कुछ प्रमुख वैदिक और पौराणिक श्लोक निम्नलिखित हैं, जिनका स्मरण करना अत्यंत लाभकारी माना गया है:

"कृष्णे मतिर्भू मम देव देव, शनैः शनैः सर्वसुखप्रदः स्यात्।"

श्रीमद्भागवत पुराण संदर्भ

इसके साथ ही महामंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" और "हरे कृष्ण महामंत्र" का जाप इस भजन के साथ करने से आध्यात्मिक ऊर्जा में कई गुना वृद्धि होती है। आप हमारी ओम जय जगदीश आरती से जुड़ी पावन कथाओं का भी अध्ययन कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम जो भी सच्चे मन से इस भजन को सुनेगा...
समर्पित देवता भगवान श्री कृष्ण एवं समस्त आराध्य देव
संगीत शैली भक्ति रस, लोक संकीर्तन
भाषा सरल हिंदी एवं ब्रज मिश्रित लोकभाषा
मुख्य भाव पूर्ण शरणागति, विश्वास और निराशा का निवारण
उपयुक्त अवसर प्रातःकालीन वंदना, संध्या आरती, साप्ताहिक सत्संग
लक्ष्य श्रोता समस्त सनातनधर्मी एवं भक्ति प्रेमी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को आप प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में या संध्याकालीन आरती के समय सुन सकते हैं। इसके अलावा जब भी आपका मन अशांत हो या जीवन में निराशा महसूस हो, इसे सुनकर आप मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं।

सनातन धर्म में अटूट विश्वास और भक्ति को ही सबसे बड़ी शक्ति माना गया है। जब आप सच्चे मन और बिना किसी छल के प्रभु का स्मरण करते हैं, तो आपको संकटों से लड़ने की आंतरिक शक्ति मिलती है, जिससे आपकी मनोकामनाएं और लक्ष्य स्वतः पूर्ण होने लगते हैं।

हाँ, यह एक पारिवारिक और सर्वसुलभ भजन है। इसे परिवार के सभी सदस्य मिलकर संध्या आरती या विशेष पर्वों के अवसर पर गा सकते हैं, जिससे घर में सकारात्मकता और आपसी प्रेम बढ़ता है।

शास्त्रों के अनुसार कलयुग में कठिन तपस्या या यज्ञ करना अत्यंत कठिन है। ऐसे में ईश्वर का नामस्मरण, संकीर्तन और ऐसे पावन भजन ही जीवात्मा को तारने और मन को शांत करने का सबसे सरल और सुगम मार्ग बताए गए हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के विद्वान आचार्यों और सांस्कृतिक शोधकर्ताओं द्वारा सनातन धर्म की पारंपरिक लोक-संकीर्तन परंपरा, श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों और आधुनिक मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भक्ति रस और जीवनोपयोगी प्रेरणा प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (भक्ति योग खंड)
  • सनातन लोकगीत एवं संकीर्तन परंपरा
  • वैदिक साहित्य एवं संत वाणी संकलन

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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