Parvati Stotram

पुत नू वी नाल रख ले ! Put Nu V Nal Rakh Le ! Puneet khurana ! Jai Mata Di ! Amba Bhakti

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भजन / भक्ति गीत (Bhajan & Devotional Song)

पुत नू वी नाल रख ले ! Put Nu V Nal Rakh Le ! Puneet khurana ! Jai Mata Di ! Amba Bhakti

सनातन भक्ति परंपरा में संकीर्तन और माता रानी (Amba Bhakti) के दरबार में अपनी अनन्य पुकार लगाना जीवात्मा का परमात्मा से संवाद करने का सबसे पावन मार्ग माना गया है। प्रसिद्ध भजन गायक पुनीत खुराना द्वारा प्रस्तुत यह अत्यंत ही भावुक और मार्मिक भजन "पुत नू वी नाल रख ले ! Put Nu V Nal Rakh Le !" माँ जगदम्बे के चरणों में एक बालक की तरह पूर्ण शरणागति और वात्सल्य की भीख मांगने का अनूठा प्रतीक है। कलयुग के इस भागदौड़ भरे जीवन में जब मनुष्य मानसिक और आध्यात्मिक रूप से विचलित हो जाता है, तब ऐसे पावन भजन अंतर्मन को झकझोर कर शांत करने का कार्य करते हैं। इस लेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन अध्ययन करेंगे।

श्रेणियां: Krishna Stotram, Most Common Aarti, Parvati Stotram अपडेटेड: अक्टूबर २०२१ / २०२६

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जय माता दी! बोल सांचे दरबार की जय! पुत नू वी नाल रख ले, ओ शेरावाली माता, अपने ही चरणों विच, ठिकाना दे दे माता। दुनिया दे विच मैं तो, ठोकर खाया हाँ, दर तेरे आके माँ, सुकून पाया हाँ। तू है जगत दी मालक, तू है सबकी माता, तेरे बिना मैनू कोई, राह न सुझता। पुत नू वी नाल रख ले... कंद-कंद विच तेरी जोत समाई है, तूने ही हर बिगड़ी बात बनाई है। पुनीत खुराना गाए, महिमा तेरी गाए, चरणों से लग के माँ, मन हर्षाये। पुत नू वी नाल रख ले, ओ शेरावाली माता, अपने ही चरणों विच, ठिकाना दे दे माता। जय माता दी! जय अम्बे भक्ती!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन एक सच्चे भक्त और उसकी आराध्य जगत जननी माँ अम्बे (शेरावाली) के बीच के पवित्र वात्सल्य संबंध को दर्शाता है। भजन की शुरुआती पंक्तियों में गायक पुनीत खुराना जी एक छोटे बच्चे की भांति अपनी माँ से विनती कर रहे हैं कि हे माता! इस संसार की मायावी प्रपंच और दुखों से घबराकर यह बालक तुम्हारे द्वार पर आया है। जैसे एक माँ अपने रूठे या भटके हुए पुत्र को सीने से लगा लेती है, वैसे ही हे शेरावाली माता, तू भी इस नादान पुत्र को अपने चरणों में स्थान दे दे।

संसार रूपी सागर में भटकते हुए मनुष्य को जब चारों तरफ से निराशा मिलती है, तब केवल माँ के चरणों की शरण ही उसे परम शांति प्रदान करती है। भजन का मुख्य संदेश यही है कि अहंकार का त्याग करके जब भक्त पूरी निष्ठा से माँ की आराधना करता है, तो माँ उसके सारे दुखों को हर लेती है और अपनी कृपा की शीतल छाया प्रदान करती है। यह भजन साधक के अंतर्मन में छिपे हुए भय और अकेलेपन को दूर कर भक्ति रस का संचार करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • मातृ भाव (Vatsalya Bhava): इस भजन में भगवान या देवी को केवल एक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपनी परम जननी (माँ) के रूप में देखा गया है।
  • आत्म-समर्पण (Total Surrender): साधक अपनी कमियों को स्वीकार करते हुए माँ के दरबार में पूरी तरह समर्पित हो जाता है।
  • पारिवारिक एवं सामूहिक संकीर्तन: इसे नवरात्रों, जागरण या माता की चौकी के दौरान आसानी से गाया जा सकता है, जो सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
  • आध्यात्मिक शांति: मन की विचलित अवस्था में इस भजन का श्रवण करने से अगाध मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति गीतों और संकीर्तन का कोई निश्चित समय नहीं होता, किंतु ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्याकाल में माता की ज्योत प्रज्वलित करके इस भजन का पाठ या श्रवण करना विशेष रूप से फलदायी होता है।

विशेष अवसरों जैसे कि चैत्र और शारदीय नवरात्र, अष्टमी, नवमी, मंगलवार या शुक्रवार को माता के जागरण के समय जब पुनीत खुराना या अन्य कलाकारों की स्वर लहरियों में यह भजन गूंजता है, तो वातावरण पूरी तरह से ऊर्जावान और भक्तिमय हो जाता है। श्रवण करते समय मन को एकाग्र रखें और माता के स्वरूप का ध्यान करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की मुख्य आराध्य देवी माँ दुर्गा / शेरावाली / अम्बे माता हैं, जिन्हें सनातन धर्म में आदि शक्ति, पराशक्ति और जगत जननी के रूप में पूजा जाता है। इसके साथ ही इस भजन को अपनी सुमधुर वाणी से सजाने वाले गायक पुनीत खुराना हैं, जो अपनी अमबा भक्ति (Amba Bhakti) और माता रानी के भजनों के लिए जाने जाते हैं। उनकी गायन शैली में माँ के प्रति अगाध प्रेम और विनय साफ झलकता है।

“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥” - देवी महात्म्य के अनुसार माँ अम्बे संपूर्ण ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"पुत नू वी नाल रख ले" भजन आधुनिक लोक-भक्ति संगीत परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे पंजाब और उत्तर भारत के पारंपरिक देवी जागरणों की संस्कृति से प्रेरित होकर रचा गया है। लोक संगीत की धुनों पर आधारित यह रचना हर वर्ग के श्रद्धालु को आसानी से याद हो जाती है और उनके जुबां पर चढ़ जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को माता के दरबार से जोड़ना और उनमें भक्ति भाव जागृत करना है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन मुख्य रूप से सरल हिंदी और पंजाबी मिश्रित बोलचाल की भाषा (आम बोलचाल की लोक भाषा) में रचित है। इसमें जिन शब्दों जैसे 'पुत' (पुत्र), 'नाल' (साथ), 'रख ले' (रख लो) का प्रयोग किया गया है, वे सीधे हृदय को स्पर्श करते हैं। इसमें रूपक और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जहां संसार को दुखों का सागर और माता के चरणों को एकमात्र नौका या आश्रय बताया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, अपना अहंकार छोड़कर ईश्वर की शरण में जाना ही सच्ची बुद्धिमत्ता है।
  • मातृ स्नेह पर अटूट विश्वास: ब्रह्मांड की शक्ति कभी भी अपने सच्चे भक्तों और बालकों को निराश नहीं करती।
  • धैर्य और सहनशीलता: दुखों की ठोकरें खाने के बाद भी यदि ईश्वर पर भरोसा रखा जाए, तो जीवन में सुकून अवश्य मिलता है।
  • अधिक जानकारी के लिए हमारे अन्य पावन लेख जैसे श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र का अध्ययन कर सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भावार्थ
पुत पुत्र या बेटा भक्त द्वारा स्वयं को माँ का बालक मानना
नाल रख ले साथ रख लो / शरण में ले लो अपने चरणों के समीप स्थान देने की प्रार्थना
शेरावाली माता शेर पर सवार रहने वाली माँ दुर्गा माता अम्बे का स्वरूप
सुकून शांति या मानसिक राहत माँ के चरणों में आने पर मिलने वाली आध्यात्मिक शांति

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"पुत नू वी नाल रख ले, ओ शेरावाली माता..."
इस पंक्ति में गायक पुनीत खुराना माता से गुहार लगा रहे हैं कि हे शेर पर सवारी करने वाली माँ! जिस प्रकार तू अपने अनन्य भक्तों की रक्षा करती है, उसी प्रकार इस नादान पुत्र को भी अपने चरणों की छांव में जगह दे दे।

"दुनिया दे विच मैं तो, ठोकर खाया हाँ, दर तेरे आके माँ, सुकून पाया हाँ।"
यहाँ इस बात का वर्णन है कि भौतिकवादी संसार में रहते हुए मनुष्य मोह-माया के चक्कर में पड़कर अनेक कष्ट और ठोकरें खाता है। परंतु जब वह थक-हारकर माता के दरबार में पहुंचता है, तो उसे वास्तविक शांति और आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

“सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥”

माता अम्बे के इस पावन मंत्र का जाप करने से जीवन के सभी मंगल कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम पुत नू वी नाल रख ले (Put Nu V Nal Rakh Le)
गायक / कलाकार पुनीत खुराना (Puneet Khurana)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / शेरावाली / अम्बे माता
भाषा हिंदी / पंजाबी मिश्रित लोक भाषा
भक्ति भाव वात्सल्य, शरणागति, विनय और प्रेम
उपयुक्त अवसर माता की चौकी, जागरण, नवरात्र और संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भजन के गायक पुनीत खुराना (Puneet Khurana) हैं, जो अपनी अनूठी Amba Bhakti और देवी भजनों के लिए जाने जाते हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण शरणागति, अहंकार का त्याग और माता के चरणों में सच्चे मन से आश्रय पाना है।

यह भजन विशेष रूप से नवरात्रों, माता के जागरण, कन्या पूजन और संध्या कालीन देवी उपासना के समय बहुत चाव से गाया और सुना जाता है।

माता रानी की सच्ची भक्ति से मन को अगाध शांति, संकटों से मुक्ति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

हाँ, आप इसे घर पर अकेले पूजा के समय या मानसिक शांति के लिए किसी भी समय सुन और गुनगुना सकते हैं।

शेरावाली माता का अर्थ उस देवी से है जिनका वाहन सिंह (शेर) है, जो शक्ति और निर्भयता का प्रतीक हैं।

हाँ, यह भजन उत्तर भारतीय लोक संगीत शैली में हिंदी और पंजाबी शब्दों के सुंदर मिश्रण के साथ प्रस्तुत किया गया है।

भक्ति संगीत और संकीर्तन से मस्तिष्क में सकारात्मक तरंगे उत्पन्न होती हैं, जिससे कॉर्टसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम होता है और मन शांत होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख सनातन भक्ति परंपरा, लोक संगीत और देवी उपासना के संदर्भ में संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक और भावपूर्ण जानकारी प्रदान करना है। (संपादकीय रूप से तैयार सामग्री).

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन देवी भागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
  • पारंपरिक उत्तर भारतीय लोक एवं जागरण भजन परंपरा
  • पुनीत खुराना द्वारा प्रस्तुत लाइव संकीर्तन एवं ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डings

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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