Chhath Puja Geet

Pramod Premi Yadav का Chhath Geet 2021 | Pramod Premi का Chhath Video Song | Chhath Puja Gaana 2021

74 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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छठ पूजा लोक-आस्था, शुचिता और प्रकृति वंदना का सबसे पावन महापर्व है। इस पावन अवसर पर भोजपुरी लोक-संगीत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। "Pramod Premi Yadav का Chhath Geet 2021 | Pramod Premi का Chhath Video Song | Chhath Puja Gaana 2021" केवल एक गीत नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था, भक्ति और समर्पण का संगीतमय प्रकटीकरण है। प्रमोद प्रेमी यादव की सुरीली और भावुक आवाज में गाया गया यह छठ गीत छठी मैया और भगवान सूर्य देव के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। इस गीत में छठ महापर्व के कठिन नियमों, घाटों की सजावट, दउरा सजाने की व्याकुलता और परिवार के कल्याण की कामना को अत्यंत मार्मिक ढंग से पिरोया गया है। यह लेख इस लोकप्रिय छठ गीत के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं का एक विस्तृत और विद्वतापूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जो पाठकों को इस महापर्व की वास्तविक चेतना से जोड़ेगा।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

|| छठी मैया के पावन गीत ||

कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए।
बहंगी लचकत जाए, बहंगी लचकत जाए॥
उहवें पर सुगना मंडराए, सुगना देवें जूठियाए।
आदित मल होखब सहाय, बहंगी घाट पहुंचाए॥

केरवा के पात पर उगेलन सुरुज देव, झांके-झांके।
करेलू छठ बरतिया से सुरुज देव, झांके-झांके॥
कांच ही माटी के कलशवा, दीया बलत सवाई।
प्रमोद प्रेमी गावे गीतिया, छठी माई होखब सहाई॥

दउरा सजवले बानी माई, फल-फूल से सजाई।
अरघ के बेर भईल बा, दर्शन दीहीं आई॥
सभ परिवार मिलि गावे, छठी माई के गीत।
सदा बनल रहे माई, हमनी के ई प्रीत॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

प्रमोद प्रेमी यादव द्वारा प्रस्तुत इस छठ गीत में लोक-परंपरा और भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। गीत की प्रत्येक पंक्ति में छठी मैया के प्रति समर्पण और पूजा की शुद्धता को रेखांकित किया गया है:

  • प्रथम अंतरा (बहंगी और पवित्रता): गीत की शुरुआत पारंपरिक 'बहंगी' (बांस की टोकरी ले जाने वाला ढांचा) के वर्णन से होती है। भक्त कहता है कि कच्चे बांस से बनी बहंगी अत्यधिक भार और श्रद्धा के कारण लचक रही है। इस बहंगी पर रखे फल-फूलों पर तोता मंडरा रहा है। भक्त तोते को भगाता है ताकि वह फलों को जूठा न कर दे, क्योंकि छठ पूजा में पूर्ण शुद्धता और पवित्रता अनिवार्य है। भगवान सूर्य (आदित मल) से प्रार्थना की जा रही है कि वे इस यात्रा में सहायक बनें और बहंगी को सुरक्षित घाट तक पहुंचाएं।
  • द्वितीय अंतरा (प्रकृति और सूर्य देव): केले के पत्तों के बीच से उदित होते हुए सूर्य देव का सुंदर चित्रण किया गया है। सूर्य देव अपनी रश्मियों के माध्यम से व्रत करने वाली महिलाओं (व्रतियों) को आशीर्वाद दे रहे हैं। मिट्टी के कलश और घी के दीये इस बात के प्रतीक हैं कि यह पर्व पूरी तरह से मिट्टी और प्रकृति से जुड़ा हुआ है। गायक प्रमोद प्रेमी छठी मैया से प्रार्थना करते हैं कि वे सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें।
  • तृतीय अंतरा (पारिवारिक एकता और प्रार्थना): इस भाग में भक्त कहता है कि उसने विभिन्न प्रकार के कंद-मूल, फल और पकवानों (ठेकुआ) से पूजा का दउरा सजाया है। अब संध्या अर्घ्य का समय हो चुका है, इसलिए हे छठी मैया! आप प्रकट होकर हमें दर्शन दीजिए। पूरा परिवार एक साथ मिलकर आपके मंगल गीत गा रहा है, जिससे घर-परिवार में प्रेम और सौहार्द का वातावरण बना रहे।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'शरणागति' और 'प्रकृति के प्रति कृतज्ञता' है। छठ महापर्व एकमात्र ऐसा त्योहार है जहां डूबते हुए सूर्य और उगते हुए सूर्य दोनों की पूजा की जाती है। यह गीत हमें सिखाता है कि जीवन के हर उतार-चढ़ाव में ईश्वर के प्रति विश्वास बनाए रखना चाहिए। गीत का संदेश अत्यंत स्पष्ट है—भौतिक चकाचौंध से दूर रहकर, मिट्टी और प्रकृति के करीब आकर ही सच्ची शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है। यह गीत पारिवारिक एकजुटता को बढ़ावा देता है, जहां सभी सदस्य मिलकर घाटों की सफाई करते हैं और प्रसाद तैयार करते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Name) Pramod Premi Yadav का Chhath Geet 2021
मुख्य गायक (Singer) प्रमोद प्रेमी यादव (Pramod Premi Yadav)
संगीत शैली (Genre) भोजपुरी भक्ति लोकगीत (Bhojpuri Devotional Folk)
समर्पित देवता (Presiding Deity) छठी मैया एवं भगवान सूर्य देव (Chhathi Maiya & Surya Dev)
मुख्य वाद्य यंत्र (Instruments) ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, हारमोनियम
रिलीज वर्ष (Release Year) 2021
सांस्कृतिक संदर्भ (Cultural Context) छठ पूजा महापर्व (Chhath Puja Festival)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी संगीत जगत में प्रमोद प्रेमी यादव अपनी अनूठी गायकी और माटी की सुगंध वाले गीतों के लिए जाने जाते हैं। उनके इस छठ गीत में पारंपरिक धुनों को आधुनिक संगीत के साथ इस प्रकार पिरोया गया है कि यह युवाओं और बुजुर्गों दोनों को समान रूप से आकर्षित करता है। गीत के संगीतकार और गीतकार ने पारंपरिक लोक-साहित्य के तत्वों को सुरक्षित रखते हुए इसे एक नया आयाम दिया है। प्रमोद प्रेमी के स्वर में जो दर्द, पुकार और समर्पण है, वह सीधे श्रोताओं के हृदय को छू लेता है और उन्हें अपने पैतृक गांव की याद दिलाता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
बहंगिया (Bahangiya) बांस का बना हुआ ढांचा अर्घ्य की सामग्री ले जाने के लिए प्रयुक्त होने वाला पारंपरिक साधन।
जूठियाए (Joothiyae) जूठा करना या अशुद्ध करना छठ पूजा में प्रसाद की शुद्धता का अत्यधिक ध्यान रखा जाता है।
आदित मल (Aadit Mal) भगवान आदित्य (सूर्य देव) सृष्टि के प्रत्यक्ष देवता और ऊर्जा के स्रोत।
दउरा (Daura) बांस की बड़ी टोकरी जिसमें छठ पूजा का मुख्य प्रसाद और फल रखे जाते हैं।
अरघ (Aragh) अर्घ्य (जल या दूध देना) अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को दिया जाने वाला अर्पण।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का उल्लेख हमारे प्राचीन ग्रंथों जैसे ऋग्वेद, महाभारत और रामायण में भी मिलता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, कार्तिक मास में सूर्य की किरणों का पृथ्वी पर विशेष प्रभाव पड़ता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। प्रमोद प्रेमी का यह गीत इसी वैज्ञानिक और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करता है।

यह गीत हमें याद दिलाता है कि छठ पूजा में किसी पुरोहित या मंत्रोच्चार की आवश्यकता नहीं होती; यह सीधे भक्त और भगवान के बीच का संवाद है। नदी के पावन तट पर खड़े होकर जब लाखों लोग एक साथ अर्घ्य देते हैं, तो सामाजिक समरसता का एक ऐसा दृश्य उपस्थित होता है जो विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलता। यह गीत इसी समरसता और सामूहिक चेतना का संगीतमय उत्सव है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस पावन छठ गीत से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती हैं:

  1. पूर्ण अनुशासन और शुचिता: जैसे गीत में तोते से प्रसाद को बचाने की बात कही गई है, वैसे ही हमें अपने विचारों और कर्मों को भी अशुद्धियों से बचाना चाहिए।
  2. प्रकृति का संरक्षण: बांस की बहंगी, मिट्टी के बर्तन, केले के पत्ते और कंद-मूल का उपयोग यह दर्शाता है कि हमारा जीवन प्रकृति पर निर्भर है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए।
  3. धैर्य और तपस्या: 36 घंटे का निर्जला व्रत हमें कठिन परिस्थितियों में भी विचलित न होने और धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
  4. कृतज्ञता का भाव: जो शक्ति हमें जीवन दे रही है (सूर्य देव), उनके प्रति आभार व्यक्त करना ही मनुष्य का परम कर्तव्य है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि छठ गीत पूरे कार्तिक मास में सुने जाते हैं, लेकिन महापर्व के चार दिनों के दौरान इनका महत्व चरम पर होता है:

  • नहाय-खाय (प्रारंभिक दिन): इस दिन घर की सफाई और पवित्रता के साथ इस गीत को बजाकर अनुष्ठान की शुरुआत की जाती है।
  • खरना (दूसरा दिन): शाम को प्रसाद ग्रहण करने के समय शांत और भक्तिमय माहौल में यह गीत मन को शांति प्रदान करता है।
  • संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): जब पूरा परिवार घाट की ओर प्रस्थान करता है, तब यह गीत सामूहिक रूप से गाया जाता है।
  • उषा अर्घ्य (चौथा दिन): उगते सूर्य को अर्घ्य देते समय और व्रत की पूर्णाहुति के अवसर पर इस गीत का श्रवण अत्यंत शुभ माना जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का प्रकार भोजपुरी पारंपरिक एवं आधुनिक छठ गीत
मुख्य विषय छठी मैया की आराधना, बहंगी की पवित्रता, सूर्य देव को अर्घ्य
गायन शैली करुण, भक्ति और उल्लास का मिश्रण
उपयुक्त अवसर छठ पूजा महापर्व, कार्तिक मास
प्रमुख संदेश शुद्धता, प्रकृति प्रेम, पारिवारिक एकता

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह लोकप्रिय छठ गीत वर्ष 2021 में रिलीज हुआ था और इसे दर्शकों द्वारा अत्यधिक पसंद किया गया था।

'बहंगी' बांस से बना एक ढांचा होता है जिसका उपयोग छठ पूजा के पावन प्रसाद (दउरा) को कंधे पर रखकर नदी घाट तक ले जाने के लिए किया जाता है। यह सादगी और शुद्धता का प्रतीक है।

लोक कथाओं के अनुसार, तोता फलों को खाने का प्रयास करता है। गीत में सुगना को भगाने का उल्लेख इसलिए है ताकि पूजा का कोई भी फल जूठा या अशुद्ध न हो सके, जो छठ पूजा की कठोर शुचिता को दर्शाता है।

छठ पूजा में प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य देव और उनकी मानस बहन छठी मैया (उषा और प्रत्युषा) की पूजा-अर्चना की जाती है।

हाँ, इस गीत की मूल पंक्तियाँ पारंपरिक भोजपुरी छठ लोकगीतों से प्रेरित हैं, जिन्हें आधुनिक संगीत और नए अंदाज में प्रमोद प्रेमी यादव ने प्रस्तुत किया है।

छठ पूजा का महापर्व पूरे चार दिनों का होता है, जिसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य शामिल हैं।

यह गीत मन को असीम शांति, भक्ति भाव और अपने पैतृक गांव व संस्कृति के प्रति गहरे जुड़ाव की अनुभूति कराता है।

ठेकुआ गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना एक पारंपरिक महाप्रसाद है, जिसे अत्यंत पवित्रता के साथ मिट्टी के चूल्हे पर तैयार किया जाता है। यह छठ पूजा का मुख्य प्रसाद है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य भोजपुरी लोक-संस्कृति और छठ महापर्व की समृद्ध विरासत को सहेजना है। प्रमोद प्रेमी यादव का यह गीत आधुनिक डिजिटल युग में भी हमारी पारंपरिक जड़ों को मजबूत बनाए रखने का कार्य करता है। इस विश्लेषण में गीत के साहित्यिक सौंदर्य, कठिन शब्दों के अर्थ और उसके आध्यात्मिक महत्व को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति से भली-भांति परिचित हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं ऋग्वेद: सूर्य उपासना के प्राचीन मंत्र और पौराणिक संदर्भ।
  • भोजपुरी लोक-साहित्य संकलन: पारंपरिक छठ गीतों की मौखिक एवं लिखित परंपरा।
  • भक्तिलोक संपादकीय टीम: लोक-संस्कृति और संगीत का गहन विश्लेषण।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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