लोकप्रिय भोजपुरी गायक पवन सिंह द्वारा गाया गया "उगी हे सूरजदेव" (Ugi He Surujdev) छठी मइया और सूर्य देव की उपासना का एक अत्यंत ही पावन, प्रसिद्ध और कर्णप्रिय लोकगीत एवं भजन है। यह गीत लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के दौरान बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और देश-विदेश के कोने-कोने में बड़े ही भक्ति भाव के साथ गूंजता है। इस भजन में साधक, विशेष रूप से व्रती माताएं, भगवान भास्कर (सूर्य देव) से प्रातःकाल उदित होने और अपने भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्यता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने की अत्यंत ही करुण और मधुर स्वर में प्रार्थना करती हैं। पवन सिंह की जादुई और भावपूर्ण आवाज में यह गीत न केवल छठ व्रतियों के अंतर्मन को झंकृत करता है, बल्कि सनातन संस्कृति में प्रकृति, जल, अग्नि और सूर्य की उपासना के सनातन संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाता है। भोर की पहली किरण के साथ जब यह गीत गूंज उठता है, तो संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और ऊर्जावान हो जाता है।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
उगी हे सूरजदेव, अरघ के बेर...
उगी हे सूरजदेव, अरघ के बेर,
सुगा सुगी खेले जुड़नुकबेर,
निअराइल भोर, अरघ के बेर,
उगी हे सूरजदेव...
कांचहि बाँस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय,
बहंगी लचकत जाय, दर्शन दिहिं छठी मइया,
दर्शन दिहिं छठी मइया, बहंगी घटवा पहुँचाय।
घाट पर उमड़ल भीड़ अपार,
करेले सब जन जय जयकार,
सुर्य देव के महिमा अपार,
करिहें बेड़ा पार हे सूरजदेव...
नहले धुवले रहब उपवासे, धवब छठी के धियान,
छठी मइया दिहिं वरदान, हो सूरजदेव...
उगी हे सूरजदेव, अरघ के बेर,
सुगा सुगी खेले जुड़नुकबेर,
निअराइल भोर, अरघ के बेर,
उगी हे सूरजदेव...
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
पवन सिंह द्वारा प्रस्तुत इस लोकगीत के माध्यम से सूर्योपासना के उस दृश्यात्मक और भावनात्मक रूप को उकेरा गया है जो छठ महापर्व के समय घाट पर दिखाई देता है। गीत के मुखड़े में व्रती माताएं भगवान सूर्य से विनती करती हैं कि हे सूर्य देव! अब प्रातःकाल होने को है और अर्घ्य देने का पवित्र समय आ गया है। कृपया आप अपनी दीप्तिमान किरणों के साथ उदित हों। 'सुगा सुगी खेले जुड़नुकबेर' प्रकृति की उस सहज सुंदरता और पवित्रता का प्रतीक है जहाँ जीव-जंतु भी इस पावन पर्व की पवित्रता में रमे हुए हैं।
दूसरे चरण में, पारंपरिक बांस की बहंगी और उसमें रखे पूजा के सूप, फल, ठेकुआ और कंदमूल का सजीव वर्णन किया गया है। व्रति महिलाएं कठिन निर्जला व्रत रखकर भारी बहंगी को अपने कंधों या सिर पर उठाकर पवित्र नदी घाट तक ले जाती हैं। उनका यह कठिन श्रम और अटूट विश्वास इस बात का गवाह है कि वे छठी मइया और सूर्य देव के सीधे दर्शन और उनकी कृपा पाने के लिए कितनी समर्पित हैं। संपूर्ण गीत में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, पारिवारिक कल्याण, संतान की दीर्घायु और समस्त समाज के लिए मंगलकामना का भाव छिपा हुआ है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस लोकगीत का मूल भाव शरणागति, तपस्या, प्रकृति प्रेम और सूर्योपासना है। छठ पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति (सूर्य और जल) के प्रति आभार व्यक्त करने का अनुष्ठान है। गीत यह संदेश देता है कि जीवन की समस्त बाधाओं को पार करने के लिए भगवान भास्कर की कृपा और अनुशासन आवश्यक है। जिस प्रकार सूर्य प्रतिदिन बिना किसी भेदभाव के संपूर्ण संसार को प्रकाश और जीवन देते हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने जीवन में परोपकार, संयम और निरंतरता का पालन करना चाहिए।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम (Song Name) | उगी हे सूरजदेव (Ugi He Surujdev) |
|---|---|
| गायक (Singer) | पवन सिंह (Pawan Singh) |
| संगीत शैली (Genre) | भोजपुरी छठ गीत / लोक भक्ति संगीत |
| भाषा (Language) | भोजपुरी / हिंदी |
| मुख्य आराध्य (Main Deity) | भगवान सूर्य (सूर्य देव) एवं छठी मइया |
| पर्व प्रसंग (Occasion) | छठ महापर्व (कार्तिक एवं चैती छठ) |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
इस कालजयी छठ गीत को अपनी सशक्त और गंवई माटी से जुड़ी आवाज से सजाने वाले लोकप्रिय गायक पवन सिंह हैं। उनकी आवाज का ओज और समर्पण इस गीत को जीवंत बना देता है। पारंपरिक लोकगीतों की शैली में रचे गए इस गीत के बोल लोक परंपरा से आए हैं, जिसे आधुनिक संगीत संयोजन के साथ प्रस्तुत किया गया है। पवन सिंह की गायकी ने इसे हर घर, हर घाट और हर छठ पूजा पंडाल का अनिवार्य हिस्सा बना दिया है। छठ पर्व के दौरान जब यह गीत बजता है, तो हर भारतीय के हृदय में अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम उमड़ पड़ता है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| उगी | उदित होइए / निकलिए | सूर्य देव के उदय होने का आह्वान |
| अरघ | अर्घ्य / जल अर्पित करना | सूर्य भगवान को जल देने की प्रक्रिया |
| बेर | समय / बेला | पूजा का उचित समय |
| बहंगिया | बांस का बना भार ढोने का साधन | पूजा की सामग्री ले जाने का पारंपरिक साधन |
| निअराइल | निकट आना / पास आना | भोर (सुबह) का निकट आना |
| जुड़नुकबेर | शुभ और सुखद समय | कल्याणकारी बेला |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
सनातन संस्कृति में सूर्य देव एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें प्रत्यक्ष रूप में देखा और पूजा जाता है। उन्हें स्वास्थ्य, यश, ऊर्जा और आयु का प्रदाता माना जाता है। छठ महापर्व के दौरान गाए जाने वाले ऐसे गीत समाज को उसकी जड़ों से जोड़ते हैं। यह गीत इस बात का प्रतीक है कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति के हर उपादान—चाहे वह नदी हो, सूर्य हो, या पौधे—का कितना सम्मान किया जाता है। इस गीत के श्रवण मात्र से मन में सात्विक विचारों का उदय होता है और अहंकार समाप्त होकर परमात्मा के प्रति समर्पण भाव जागृत होता है।
छठ पूजा और उससे जुड़े गीतों के विषय में अधिक जानने के लिए आप हमारे अन्य लेख जैसे श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र भी पढ़ सकते हैं, जो साधना और स्तुति के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- कठिन परिस्थितियों में धैर्य: जिस प्रकार व्रती माताएं 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं, उसी प्रकार जीवन की कठिनाइयों में भी धैर्य नहीं खोना चाहिए।
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: सूर्य और जल के बिना जीवन असंभव है, अतः इनके प्रति सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए।
- नियमितता और अनुशासन: सूर्य भगवान की भांति हमें भी अपने जीवन में नियमित और कर्तव्यनिष्ठ होना चाहिए।
- सामूहिकता और समानता: छठ घाट पर जात-पात और ऊंच-नीच का भेद मिट जाता है; सभी एक समान भाव से सूर्य की उपासना करते हैं।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले महापर्व छठ के अवसर पर सुना और गाया जाता है। विशेषकर खरस से लेकर उद्योंग सूर्य को अर्घ्य देने तक के समय में यह गीत हर घर और घाट पर गूंजता रहता है। इसके अलावा, सूर्य उपासना के साप्ताहिक पर्व (रविवार व्रत) या किसी भी शुभ अवसर पर सूर्य देव की स्तुति के लिए इस गीत को सुना जा सकता है।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| शीर्षक (Title) | उगी हे सूरजदेव (Ugi He Surujdev) |
|---|---|
| गायक (Artist) | पवन सिंह |
| मुख्य विषय (Theme) | सूर्योपासना और छठ महापर्व |
| प्रमुख भाव (Bhava) | भक्ति, समर्पण और प्रार्थना |
| उपयुक्त अवसर (Occasion) | छठ पूजा (Chhath Puja) |
| संस्कृति (Culture) | भोजपुरी लोक संस्कृति एवं सनातन धर्म |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"उगी हे सूरजदेव" गीत के मुख्य गायक कौन हैं?
इस प्रसिद्ध छठ गीत के मुख्य गायक लोकप्रिय भोजपुरी गायक पवन सिंह हैं, जिनकी आवाज में यह गीत अत्यधिक लोकप्रिय हुआ है।
यह गीत किस अवसर पर गाया जाता है?
यह गीत मुख्य रूप से लोक आस्था के महापर्व 'छठ पूजा' के दौरान संध्या अर्घ्य और सुबह के अर्घ्य के समय गाया और सुना जाता है।
इस गीत का मुख्य संदेश क्या है?
इस गीत का मुख्य संदेश भगवान सूर्य (सूर्य देव) की स्तुति करना, प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करना और कठिन व्रतों के माध्यम से आरोग्यता एवं समृद्धि की कामना करना है।
छठ पूजा में सूर्य देव की उपासना क्यों की जाती है?
सनातन परंपरा में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है जो जीवन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और यश प्रदान करते हैं। इसलिए उनकी पूजा का विशेष महत्व है।
क्या यह गीत अन्य गायकों ने भी गाया है?
हाँ, इस पारंपरिक लोकगीत को कई अन्य लोक कलाकारों ने भी गाया है, परंतु पवन सिंह का संस्करण सबसे अधिक प्रसिद्ध और सुना जाने वाला है।
छठ पर्व मुख्य रूप से किन राज्यों में मनाया जाता है?
यह मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है, तथा अब यह वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा है।
बहंगिया शब्द का क्या अर्थ है?
बहंगिया बांस से बनी हुई एक ऐसी कावड़ या संरचना होती है जिसका उपयोग छठ पूजा के प्रसाद और पूजन सामग्री को सुरक्षित रूप से घाट तक ले जाने के लिए किया जाता है।
इस गीत को सुनकर कैसा अनुभव होता है?
इस गीत को सुनकर श्रोता के मन में भक्ति रस, अपने लोक और संस्कृति के प्रति जुड़ाव तथा आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
प्रस्तुत सामग्री "उगी हे सूरजदेव" छठ गीत के बोल, उसके दार्शनिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को सनातन लोक संस्कृति और पर्वों की गहराई से परिचित कराना है। सभी तथ्यों और पारंपरिक मान्यताओं को प्रामाणिक संदर्भों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- सनातन लोक परंपरा एवं क्षेत्रीय लोकाचार संदर्भ
- भोजपुरी लोक संगीत एवं छठ महापर्व अनुष्ठान परंपरा
- सूर्य पुराण एवं वैदिक सूर्योपासना ग्रंथ
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें