"तेरे नाम का करम है ये सारा" भजन सनातन भक्ति परंपरा का एक अत्यंत हृदयस्पर्शी और भावपूर्ण संकीर्तन है। यह भजन ईश्वर के प्रति पूर्ण शरणागति, कृतज्ञता और उनके नाम की महिमा का गुणगान करता है। कलयुग में नाम-स्मरण को ही मोक्ष का सुगम मार्ग बताया गया है, और यह भजन साधक के अंतर्मन में उसी दिव्य प्रेम को जागृत करने का कार्य करता है। जब भक्त यह स्वीकार करता है कि उसके जीवन की हर घटना, हर सुख और हर उपलब्धि केवल प्रभु की कृपा (करम) का परिणाम है, तो उसका अहंकार स्वतः ही विलीन हो जाता है। यह भजन विशेष रूप से सत्संग, संध्या आरती, और व्यक्तिगत साधना के समय गाया जाता है, जो मन को चंचलता से हटाकर प्रभु के चरणों में स्थिर करने में सहायक सिद्ध होता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
तेरे नाम का करम है ये सारा,
जो मुझे मिला है सहारा।
मैं तो था दर-दर का राही,
तूने ही मुझे संवारा॥
तेरी दया से ही सांसें चलती,
तेरी कृपा से ही राहें मिलती।
तू जो न होता तो क्या होता मेरा,
तूने ही दिया है ये जीवन प्यारा॥
तेरे नाम का करम है ये सारा...
भूल गया था मैं अपनी हस्ती,
खो गया था मैं इस दुनिया की बस्ती।
तूने आकर हाथ थाम लिया,
मिटा दिया मन का हर अंधियारा॥
तेरे नाम का करम है ये सारा...
अब तो बस यही अरदास है मेरी,
हर धड़कन में हो बस यादें तेरी।
जब तक जियूं बस तेरा ही गाऊं,
तेरी भक्ति में बीते ये जीवन सारा॥
तेरे नाम का करम है ये सारा...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का भावार्थ 'आत्म-समर्पण' (Surrender) है। भक्त प्रभु से कहता है कि हे प्रभु, आज मैं जो कुछ भी हूँ, वह केवल आपके नाम की कृपा का फल है। संसार में भटकते हुए जीव को जब प्रभु का आश्रय मिलता है, तो उसका जीवन सार्थक हो जाता है। भजन की पंक्तियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि मनुष्य का अहंकार ही उसके और ईश्वर के बीच की सबसे बड़ी बाधा है। जब भक्त यह मान लेता है कि उसकी सांसें, उसकी सफलता और उसका अस्तित्व सब प्रभु की देन है, तो वह 'मैं' और 'मेरा' के भाव से मुक्त हो जाता है। यह भजन साधक को सिखाता है कि ईश्वर के प्रति कृतज्ञता ही भक्ति की प्रथम सीढ़ी है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- शरणागति का भाव: यह भजन पूर्ण समर्पण की भावना को पुष्ट करता है।
- कृतज्ञता: ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने का यह एक उत्तम माध्यम है।
- मानसिक शांति: इसके नियमित श्रवण से मन की चंचलता कम होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
- कलयुग में नाम-जप: यह भजन नाम-स्मरण की महिमा को रेखांकित करता है, जो कलयुग का सबसे सरल उपाय है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में इसका प्रभाव अधिक होता है। इसे आप अपनी दैनिक पूजा के बाद, मंदिर में, या किसी सत्संग कार्यक्रम में गा सकते हैं। इसे गाते समय मन में प्रभु के प्रति प्रेम और आंखों में श्रद्धा के आंसू हों, तो यह भजन अधिक प्रभावशाली होता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| करम | कृपा / आशीर्वाद | ईश्वर की दया |
| राही | मुसाफिर / पथिक | संसार में भटकता जीव |
| संवारा | सुधारना / सजाना | जीवन को सही दिशा देना |
| हस्ती | अस्तित्व / पहचान | स्वयं का बोध |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | तेरे नाम का करम है ये सारा |
|---|---|
| मुख्य भाव | शरणागति एवं कृतज्ञता |
| भाषा | हिंदी |
| उपयुक्त अवसर | दैनिक पूजा, सत्संग, कीर्तन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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