Parvati Stotram

भजन - जय जय जननी श्री गणेश की लिरिक्स इन हिंदी - भक्ति लोक

48 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी को समर्पित यह भजन "जय जय जननी श्री गणेश की" भक्ति साहित्य की एक अत्यंत मधुर और भावपूर्ण रचना है। विघ्नहर्ता, ऋद्धि-सिद्धि के दाता और बुद्धि-विवेक के अधिष्ठाता गणेश जी का यह कीर्तन साधक के हृदय में श्रद्धा, शांति और आत्मविश्वास का संचार करता है। इस भजन में माता पार्वती के पुत्र गणेश जी की महिमा, उनके गजमुख स्वरूप, विशाल उदर, मूषक वाहन तथा उनके दिव्य गुणों का सुंदर वर्णन मिलता है। भक्ति परंपरा में किसी भी शुभ कार्य के आरंभ से पूर्व गणेश वंदना अनिवार्य मानी गई है, क्योंकि वे समस्त विघ्नों के नाशक और मंगल कार्यों के प्रेरक हैं। यह भजन विशेष रूप से गणेश चतुर्थी, मंगलवार, बुधवार, विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण तथा अन्य मांगलिक अवसरों पर गाया जाता है। इसकी लय सरल, मधुर और सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त है, जिससे साधक सहज ही भक्ति भाव में लीन हो जाता है। भक्ति लोक पर प्रस्तुत यह सामग्री संदर्भ एवं व्याख्या सहित तैयार की गई है, जिससे पाठक भजन के शब्दों के साथ-साथ उसके गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ को भी समझ सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।
जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।

जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।
जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।

गजानन जय जय, गणनाथ जय जय,
गजानन जय जय, गणनाथ जय जय।
विघ्न विनाशन, शुभ फल दायक,
विघ्न विनाशन, शुभ फल दायक।

जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।

एकदंत जय जय, वक्रतुंड जय जय,
एकदंत जय जय, वक्रतुंड जय जय।
मूषक वाहन, मोदक प्रियकर,
मूषक वाहन, मोदक प्रियकर।

जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।

ऋद्धि सिद्धि के दाता जय जय,
बुद्धि विद्या के दाता जय जय।
पार्वती नंदन, शिव गण नायक,
पार्वती नंदन, शिव गण नायक।

जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।

सिद्धि विनायक, अष्ट विनायक,
सिद्धि विनायक, अष्ट विनायक।
भक्त जनों के संकट हारी,
भक्त जनों के संकट हारी।

जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।

शरण तिहारी जो जन आवे,
शरण तिहारी जो जन आवे।
सब सुख पावे, दुख नसावे,
सब सुख पावे, दुख नसावे।

जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।

जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।
जय जय जननी श्री गणेश की,
जय जय जननी श्री गणेश की।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य आधार "जय जय जननी श्री गणेश की" यह पंक्ति है, जिसमें भक्त गणेश जी की जय-जयकार करता है। 'जननी' शब्द यहाँ माता पार्वती की ओर संकेत करता है, जिनकी गोद में गणेश जी विराजमान हैं। भक्त कहता है कि जय हो उस जननी की, जिन्होंने गणेश जी को जन्म दिया और जय हो स्वयं श्री गणेश की। यह भाव मातृत्व और पुत्रत्व के पवित्र संबंध को दर्शाता है, जो भारतीय भक्ति परंपरा का केंद्रीय स्वर है।

भजन में गणेश जी के अनेक नामों का स्मरण किया गया है — गजानन, गणनाथ, एकदंत, वक्रतुंड, मूषक वाहन, मोदक प्रियकर, पार्वती नंदन, शिव गण नायक, सिद्धि विनायक और अष्ट विनायक। 'गजानन' अर्थात हाथी के मुख वाले, जो बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं। 'गणनाथ' अर्थात गणों के स्वामी, जो समस्त शिवगणों के अधिपति हैं। 'एकदंत' अर्थात एक दाँत वाले, जो अद्वैत का प्रतीक है। 'वक्रतुंड' अर्थात टेढ़े मुख वाले, जो जीवन की वक्रता को सरल बनाने वाले हैं। 'मूषक वाहन' अर्थात चूहे की सवारी करने वाले, जो अहंकार और वासना पर विजय के प्रतीक हैं। 'मोदक प्रियकर' अर्थात मोदक को प्रिय मानने वाले, जो आनंद और मिठास के प्रतीक हैं।

भजन में गणेश जी को 'विघ्न विनाशन' और 'शुभ फल दायक' कहा गया है। यह भाव इस विश्वास को दर्शाता है कि गणेश जी की कृपा से जीवन के समस्त विघ्न दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है। 'ऋद्धि सिद्धि के दाता' और 'बुद्धि विद्या के दाता' कहकर भक्त उनसे समृद्धि और ज्ञान दोनों की याचना करता है। 'भक्त जनों के संकट हारी' पंक्ति यह बताती है कि जो भी भक्त शरण में आता है, उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं। अंत में भक्त कहता है कि जो जन शरण में आता है, वह सब सुख पाता है और उसके दुख नष्ट हो जाते हैं।

इस भजन का भावार्थ यह है कि गणेश जी की शरण में आने से जीवन के सभी विघ्न, दुख और कष्ट दूर होते हैं। वे बुद्धि, विद्या, ऋद्धि और सिद्धि के दाता हैं। भक्त जब पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ उनका स्मरण करता है, तो उसका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाता है। यह भजन भक्त और भगवान के बीच के स्नेह, विश्वास और समर्पण का सुंदर चित्रण है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन अपनी सरल भाषा, मधुर लय और गहन भावार्थ के कारण भक्ति संगीत में विशेष स्थान रखता है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सरल एवं सहज भाषा: भजन की भाषा अत्यंत सरल है, जिसे कोई भी भक्त सहज ही गा सकता है और समझ सकता है।
  • गणेश जी के अनेक नामों का संकीर्तन: भजन में गणेश जी के अनेक दिव्य नामों का स्मरण किया गया है, जो उनके विभिन्न स्वरूपों और गुणों को दर्शाते हैं।
  • विघ्न विनाश का भाव: भजन का मुख्य स्वर विघ्नों के नाश और शुभ फल की प्राप्ति का है।
  • मातृ-पुत्र भाव: 'जननी' शब्द के माध्यम से भजन में माता पार्वती और गणेश जी के पवित्र संबंध का वर्णन है।
  • सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: इसकी लय और पुनरावृत्ति इसे सामूहिक भजन के लिए आदर्श बनाती है।

गणेश पुराण और ब्रह्म पुराण के अनुसार, श्री गणेश जी की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति का वातावरण बनता है। प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए आप गणेश महिमा पढ़ सकते हैं। गणेश जी की आरती और स्तुति के लिए श्री गणेश आरती का पाठ करें।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया और सुना जा सकता है। विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर इसका विशेष महत्व है:

  • गणेश चतुर्थी: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
  • मंगलवार एवं बुधवार: ये दिन गणेश जी की पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं।
  • प्रातःकालीन पूजा: सुबह स्नान के बाद गणेश जी के सामने दीपक जलाकर यह भजन गाना शुभ माना जाता है।
  • संध्या आरती: संध्या के समय आरती के बाद इस भजन का गायन किया जा सकता है।
  • मांगलिक कार्य: विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, अन्नप्राशन आदि शुभ कार्यों में इस भजन का गायन किया जाता है।

गायन विधि: सर्वप्रथम गणेश जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक और धूप जलाएं। फिर पुष्प और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद हाथ जोड़कर भजन का गायन आरंभ करें। भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव रखें। भजन के बाद गणेश जी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "जय जय जननी श्री गणेश की" भजन किसने लिखा है?

उत्तर: यह भजन पारंपरिक भक्ति साहित्य का हिस्सा है और इसके रचयिता के बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा से प्रचलित है और भक्तों के बीच लोकप्रिय है।

प्रश्न 2: इस भजन को गाने का सर्वोत्तम समय क्या है?

उत्तर: प्रातःकाल और संध्या के समय इस भजन का गायन सर्वोत्तम माना जाता है। गणेश चतुर्थी, मंगलवार और बुधवार को इसका विशेष महत्व है।

प्रश्न 3: क्या इस भजन को गाने से विघ्न दूर होते हैं?

उत्तर: भक्ति परंपरा में यह विश्वास है कि गणेश जी की स्तुति और भजन से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है। यह भजन विघ्न विनाशक गणेश जी को समर्पित है।

प्रश्न 4: क्या इस भजन को किसी विशेष विधि से गाना आवश्यक है?

उत्तर: इस भजन को गाने के लिए किसी जटिल विधि की आवश्यकता नहीं है। पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ इसे गाया जा सकता है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर गणेश जी के समक्ष बैठकर गाना उत्तम माना जाता है।

प्रश्न 5: क्या इस भजन का पाठ करते समय किसी मंत्र का जाप भी करना चाहिए?

उत्तर: हाँ, इस भजन के साथ "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप किया जा सकता है। यह मंत्र गणेश जी का मूल मंत्र है और इसके जाप से विशेष लाभ मिलता है।

प्रश्न 6: क्या यह भजन सुनने मात्र से लाभ मिलता है?

उत्तर: भक्ति परंपरा के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ भजन सुनने से भी मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्ति लोक पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें भजन के मूल पाठ, उसके सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, महत्व तथा गायन विधि का विस्तृत विवरण दिया गया है। सामग्री को गणेश पुराण, ब्रह्म पुराण तथा प्रचलित भक्ति परंपरा के आधार पर संकलित किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे भजन के शब्दों को शुद्ध उच्चारण के साथ गाएं और उसके भावार्थ को हृदय में धारण करें।

संदर्भ: गणेश पुराण, ब्रह्म पुराण, भक्ति संगीत परंपरा एवं लोक परंपरा।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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