Parvati Stotram

भजन - गजानन राखो लाज हमारी लिरिक्स इन हिंदी - भक्ति लोक

67 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

भगवान श्री गणेश, जो विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव हैं, उनकी महिमा अपरंपार है। "गजानन राखो लाज हमारी" भजन भक्तों की उस पुकार का प्रतीक है, जिसमें वे अपने आराध्य से जीवन के संकटों को दूर करने और मर्यादा की रक्षा करने की प्रार्थना करते हैं। यह भजन न केवल एक प्रार्थना है, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच के उस अटूट विश्वास का सेतु है, जहाँ भक्त अपने समस्त कार्यों का भार गणेश जी के चरणों में समर्पित कर देता है। गणेश जी, जो बुद्धि, विवेक और शुभता के अधिष्ठाता हैं, इस भजन के माध्यम से भक्तों को यह संदेश देते हैं कि जो भी व्यक्ति पूर्ण समर्पण के साथ उनकी शरण में आता है, उसके मार्ग की सभी बाधाएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं। यह भजन विशेष रूप से किसी भी मांगलिक कार्य, पूजा-अनुष्ठान या गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

गजानन राखो लाज हमारी,
राखो लाज हमारी, गजानन राखो लाज हमारी।

प्रथम निमंत्रण आपको देवा, सब देवों में आप महान,
रिद्धि-सिद्धि के आप स्वामी, आप ही हो सुख के खान।
गजानन राखो लाज हमारी...

मूषक वाहन सोहे प्यारे, गजमुख सुंदर रूप विशाल,
लंबोदर तुम विघ्न विनाशक, संकट हरो हे दीनदयाल।
गजानन राखो लाज हमारी...

मोदक भोग आपको भावे, दूर्वा दल से आप प्रसन्न,
भक्तों की तुम पीर मिटाओ, कर दो सब पर कृपा सघन।
गजानन राखो लाज हमारी...

भक्ति लोक में गूंजे जयकारा, गणेश जी की महिमा अपार,
शरण पड़े की रक्षा करना, हे प्रभु कर दो भव से पार।
गजानन राखो लाज हमारी...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त यहाँ गणेश जी को 'गजानन' कहकर संबोधित करता है और उनसे अपनी 'लाज' (मर्यादा और सम्मान) की रक्षा करने की विनती करता है। प्रथम निमंत्रण का अर्थ है कि हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी के पूजन से होती है। भक्त कहता है कि हे प्रभु, आप सभी देवताओं में सर्वश्रेष्ठ हैं और रिद्धि-सिद्धि के स्वामी हैं। आप ही सुखों के भंडार हैं, अतः मेरे जीवन के दुखों को दूर करें। भजन में गणेश जी के स्वरूप—मूषक वाहन, गजमुख और लंबोदर—का वर्णन करते हुए उनकी शक्ति का स्मरण किया गया है। भक्त प्रार्थना करता है कि जिस प्रकार आप विघ्न विनाशक हैं, उसी प्रकार मेरे जीवन के संकटों को भी नष्ट करें। अंत में, भक्त अपनी भक्ति को समर्पित करते हुए मोक्ष की कामना करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन गणेश जी की स्तुति का एक सरल और प्रभावशाली माध्यम है। इसका मुख्य महत्व यह है कि यह भक्त के मन में आत्मविश्वास जगाता है। जब हम गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' के रूप में स्मरण करते हैं, तो हमारे भीतर की नकारात्मकता समाप्त होती है। यह भजन घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु बुधवार के दिन या गणेश चतुर्थी के दौरान इसका विशेष महत्व है। सुबह की पूजा या संध्या आरती के समय इसे गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और गणेश जी के स्वरूप का ध्यान रखना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ
गजानन गज (हाथी) के मुख वाले
विघ्नहर्ता बाधाओं को दूर करने वाले
लंबोदर लंबे पेट वाले
रिद्धि-सिद्धि सफलता और समृद्धि
दूर्वा गणेश जी को प्रिय एक प्रकार की घास

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: गजानन राखो लाज हमारी भजन कब गाना चाहिए?
    उत्तर: इसे किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में या बुधवार को गाना अत्यंत फलदायी है।
  • प्रश्न: गणेश जी को कौन सा भोग प्रिय है?
    उत्तर: गणेश जी को मोदक और लड्डू अत्यंत प्रिय हैं।
  • प्रश्न: क्या इस भजन को सुनने से बाधाएं दूर होती हैं?
    उत्तर: हाँ, गणेश जी विघ्नहर्ता हैं, उनकी स्तुति से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
  • प्रश्न: गणेश जी का वाहन क्या है?
    उत्तर: गणेश जी का वाहन मूषक (चूहा) है।
  • प्रश्न: प्रथम पूज्य क्यों कहा जाता है?
    उत्तर: शिव-पार्वती द्वारा उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय होने का वरदान प्राप्त है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्ति लोक के विद्वानों द्वारा गणेश पुराण और पारंपरिक स्तुति ग्रंथों के आधार पर तैयार की गई है। यह भजन गणेश जी की कृपा प्राप्ति का एक सरल मार्ग है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

संबंधित भजन एवं लेख

श्री गणेश जी की आरती | संकट नाशन गणेश स्तोत्र | ओम जय जगदीश हरे आरती

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!