Parvati Stotram

भजन - ध्यान करू बजरंग बलि तोरी लिरिक्स इन हिंदी - भक्ति लोक

60 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भजन - ध्यान करू बजरंग बलि तोरी लिरिक्स इन हिंदी सनातन धर्म की अनन्य भक्ति, पूर्ण शरणागति और संकटमोचन हनुमान जी के प्रति अगाध प्रेम का एक अत्यंत पावन और मनमोहक स्त्रोत है। कलियुग में हनुमान जी को अष्टसिद्धि और नौ निधियों के दाता तथा भक्तों के सभी संकटों को हरने वाला प्रत्यक्ष देवता माना गया है। जब एक साधक एकाग्रचित्त होकर संकटमोचन महाबली हनुमान का ध्यान करता है, तो उसके जीवन के समस्त भय, बाधाएं और मानसिक संताप स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी सम्पूर्ण निष्ठा और श्रद्धा के साथ पवनसुत के चरणों में नमन करता है और उनके अलौकिक बल, बुद्धि और विद्या का स्मरण कर अपने अंतर्मन को ऊर्जावान बनाता है। यह भजन साधक के भीतर भक्ति रस का संचार करते हुए उसे धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मुखड़ा):

ध्यान करूँ बजरंग बली तोरी, सुन लो अर्जी हाथ जोड़री।
संकट मोचन नाम तिहारो, भवसागर से पार उतारो॥

अंतरा 1:

अंजनि नंदन पवनकुमारा, महाबली बलधाम अपारा।
सुग्रीव के सचिव महाज्ञानी, रामदूत प्रभु भक्त पुरानी॥

अंतरा 2:

बाएँ कंधे जनूटा साजे, कानन मुकुट सुभग छवि छाजे।
लाल लंगोटा हाथ वज्र धारे, भूत पिशाच निकट नहिं आवे॥

अंतरा 3:

लाय संजीवनी प्राण उबारे, लक्ष्मण प्राण बचैया प्यारे।
अक्षय कुमार को पल में मारा, लंका जरि असुर संहारा॥

अंतरा 4:

बाल समय रवि भयो लहि ताहु, तीन लोक भयभीत किय काहु।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लांघि गए अचरहि नाहीं॥

समापन (अंतिम पद):

जो यह ध्यावे संकट टारे, हनुमान चालीसा सम उर धारे।
दास शरण में आया तिहारी, लाज रखो हे पवनबिहारी॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और आराध्य के बीच के पवित्र संबंध को रेखांकित करता है। 'ध्यान करूँ बजरंग बली तोरी' के माध्यम से भक्त हनुमान जी का आह्वान करता है और उनसे प्रार्थना करता है कि वे उसकी पुकार को सुनें। भजन का केंद्रीय भाव यह है कि जिस प्रकार हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम की सेवा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया और माता सीता की खोज से लेकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाने तक हर संकट का डटकर सामना किया, उसी प्रकार वे अपने भक्तों के भी समस्त कष्टों का निवारण करते हैं। भजन में हनुमान जी के विभिन्न स्वरूपों जैसे अंदुनि नंदन, पवनसुत, वज्रधारी और लंकादहन करने वाले वीर के रूप का सुंदर वर्णन किया गया है। जब साधक इन पंक्तियों का गान करता है, तो उसके भीतर साहस और वीरता का संचार होता है। इस भजन के नियमित स्मरण से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। सनातन परंपरा में संकट मोचन की कृपा पाने के लिए इस प्रकार के संकीर्तन को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। आप अपनी साधना को और अधिक गहन करने के लिए श्री हनुमान चालीसा का संपूर्ण पाठ भी पढ़ सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और गहन भक्ति भाव है। इसे किसी भी आयु वर्ग के लोग आसानी से गा सकते हैं और स्मरण कर सकते हैं। हनुमान जी को चिरंजीवी और कलियुग के जागृत देवता के रूप में पूजा जाता है। इस भजन के गायन से साधक के अंदर आत्मविश्वास, निर्भीकता और सेवाभाव की वृद्धि होती है। मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से इस भजन का संकीर्तन करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह भजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहने की प्रेरणा भी देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन गायन के लिए प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त या संध्याकाल का समय सबसे उत्तम माना जाता है। स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर हनुमान जी के चित्र या विग्रह के समक्ष दीप प्रज्वलित कर इस भजन का पाठ करना चाहिए। मंदिर में होने वाले सत्संग, सुंदरकांड पाठ या मंगलवार के विशेष अनुष्ठानों में इस भजन को सामूहिक रूप से गाने का विशेष महत्व है। सच्चे मन से किया गया यह स्मरण साधक को अलौकिक आनंद की अनुभूति कराता है। इसी प्रकार के अन्य पावन स्तोत्रों के लिए आप शिव तांडव स्तोत्र का भी अध्ययन कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य भगवान श्री हनुमान जी हैं, जिन्हें भगवान शिव का रुद्रावतार भी माना जाता है। हनुमान जी भक्ति, शक्ति, ज्ञान और वैराग्य के सर्वोच्च प्रतीक हैं। संत परंपरा में तुलसीदास जी, समर्थ रामदास जी और नीम करोली बाबा जैसे संतों ने हनुमान भक्ति को जन-जन तक पहुंचाया। यह भजन उसी महान संत परंपरा और लोक-संस्कृति की अमूल्य निधि है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी भक्तों के कंठ से प्रवाहित होती रही है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस प्रकार के पारंपरिक भजन लोक-संस्कृति और संतों की वाणी से उपजे हैं। इनकी रचना का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को सहज रूप से भगवान की महिमा से जोड़ना था। लोकभाषा में रचे जाने के कारण ये भजन सीधे हृदय को स्पर्श करते हैं। इनकी पृष्ठभूमि में भारतीय सनातन संस्कृति की वह अटूट आस्था है जिसमें संकट के समय ईश्वर या उनके दूतों का स्मरण करने मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल अवधी, ब्रज और हिंदी का सुंदर मिश्रण है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। काव्य शैली इतनी प्रवाहमयी है कि एक बार गाने के बाद इसके बोल स्वतः ही स्मरण हो जाते हैं। शब्दों का चयन भक्ति रस से ओतप्रोत है जो श्रोता के मन में सकारात्मक भाव उत्पन्न करता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधाएं क्यों न आएं, यदि ईश्वर पर अटूट विश्वास और समर्पण है, तो हर संकट को पार किया जा सकता है। हनुमान जी का चरित्र हमें विनम्रता, शक्ति का सदुपयोग, निष्काम सेवा और स्वामी भक्ति का पाठ पढ़ाता है। साधक को यह सीख मिलती है कि अहंकार को त्याग कर प्रभु के चरणों में शरण लेने से ही परम शांति की प्राप्ति होती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

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शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ संदर्भ
बजरंग बलीजिनका शरीर वज्र के समान मजबूत हो (हनुमान जी)आराध्य देव के लिए संबोधन
संकट मोचनसमस्त संकटों को हरने वालेहनुमान जी का विशेष गुण
भवसागरयह संसार रूपी दुखद सागरसंसारिक मोह-माया
पवनकुमारापवन देव के पुत्रजन्म परिचय
संजीवनीमृत्युतुल्य कष्टों को दूर करने वाली बूटीलक्ष्मण जी के प्राण रक्षा प्रसंग

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की पहली पंक्ति 'ध्यान करूँ बजरंग बली तोरी' में भक्त अपनी संपूर्ण चेतना को हनुमान जी के चरणों में समर्पित करता है। 'संकट मोचन नाम तिहारो' यह विश्वास दिलाता है कि हनुमान जी का नाम ही सारे दुखों का नाश करने वाला है। अंतराओं में उनके जन्म, उनके पराक्रम, लंका दहन और लक्ष्मण जी की प्राण रक्षा जैसी ऐतिहासिक घटनाओं का स्मरण कर उनकी महानता को वंदन किया गया है। अंतिम पंक्तियों में दास रूप में भक्त अपनी रक्षा की गुहार लगाता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥ इस प्रसिद्ध श्लोक के साथ इस भजन का स्मरण करने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है। हनुमान जी के बीज मंत्र 'ॐ हां हनुमते नमः' का जाप भी इस भजन के साथ अत्यंत लाभकारी होता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

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बिंदु विवरण
भजन का नामभजन - ध्यान करू बजरंग बलि तोरी लिरिक्स इन हिंदी
आराध्य देवसंकटमोचन श्री हनुमान जी
रचनाकार / परंपरापारंपरिक लोक भक्ति भजन
भाषासरल हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित
मुख्य थीमभक्ति, शरणागति और संकट निवारण
प्रमुख भावअनन्य प्रेम, विनय और समर्पण
उपयुक्त अवसरमंगलवार, शनिवार, संकट काल, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'भजन - ध्यान करू बजरंग बलि तोरी' किस देवता को समर्पित है?

यह भजन भगवान श्री संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित है।

इस भजन का पाठ किस दिन करना सबसे उत्तम होता है?

मंगलवार और शनिवार के दिन इस भजन का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को घर पर व्यक्तिगत रूप से या परिवार के साथ सामूहिक रूप से दोनों प्रकार से गाया जा सकता है।

हनुमान जी के स्मरण से जीवन में क्या लाभ मिलता है?

हनुमान जी के स्मरण से निर्भीकता, मानसिक बल, संकटों से मुक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

क्या इस भजन के साथ हनुमान चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं?

अवश्य, इस भजन के साथ हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से साधना और अधिक प्रबल होती है।

इस भजन की भाषा कौन सी है?

यह भजन सरल हिंदी और लोकभाषा के संकोच से युक्त है जो हर भक्त को आसानी से समझ आ जाता है।

क्या बच्चों को यह भजन सिखाया जा सकता है?

हाँ, बच्चों में संस्कार और धार्मिक चेतना जागृत करने के लिए यह भजन बहुत उपयुक्त है।

क्या इस भजन के गायन के लिए कोई विशेष नियम हैं?

सामान्यतः स्वच्छता और पवित्र भाव का ध्यान रखना आवश्यक है, बाकी सच्ची श्रद्धा ही सबसे बड़ा नियम है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में हनुमान भक्ति की परंपरा, लोक-संस्कृति के स्रोतों और प्रामाणिक धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखते हुए संपूर्ण विवरण प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठकों को सटीक और उपयोगी सामग्री मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

सनातन धार्मिक ग्रंथ, रामचरितमानस, हनुमान चालिसा परंपरा, और पारंपरिक लोक संकीर्तन संग्रह से संकलित एवं संपादित।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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