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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 7

अध्याय 8 · श्लोक 7

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च । मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम् ॥ ७॥

tasmāt sarveṣu kāleṣu mām anusmara yudhya ca | mayy arpita-mano-buddhir mām evaiṣyasy asaṃśayam ||7||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तस्मात्: therefore; सर्वेषु कालेषु: at all times; माम्: Me; अनुस्मर: remember; युध्य: fight; च: and; मयि: in Me; अर्पितमनोबुद्धिः: with mind and intellect fixed; माम्: to Me; एव: certainly; एष्यसि: you shall come; असंशयम्: without doubt.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

इसलिए तू सब समय मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। इस प्रकार मुझमें मन और बुद्धि को अर्पित करने से तू निःसंदेह मुझको ही प्राप्त होगा।

English Translation

Therefore, at all times remember Me and fight. With your mind and intellect fixed on Me, you will certainly come to Me alone, without doubt.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

कृष्ण अर्जुन को सलाह देते हैं कि वह हर समय उनका स्मरण करते हुए अपने कर्तव्य (युद्ध) का पालन करे। यह कर्मयोग और भक्ति का समन्वय है। Krishna advises Arjuna to remember Him at all times while performing his duty (fighting). This is the synthesis of Karma Yoga and Bhakti.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।