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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 8

अध्याय 8 · श्लोक 8

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अभ्यासयोगयुक्तेन चेतसा नान्यगामिना । परमं पुरुषं दिव्यं याति पार्थानुचिन्तयन् ॥ ८॥

abhyāsa-yoga-yuktena cetasā nānya-gāminā | paramaṃ puruṣaṃ divyaṃ yāti pārthānucintayan ||8||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अभ्यासयोगयुक्तेन: by the yoga of constant practice; चेतसा: with the mind; न: not; अन्यगामिना: going elsewhere; परमम्: Supreme; पुरुषम्: Person; दिव्यम्: divine; याति: attains; पार्थ: O Partha; अनुचिन्तयन्: meditating.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! अभ्यासयोग से युक्त तथा अन्य विषयों को न जाने वाले चित्त द्वारा परम दिव्य पुरुष का अनुचिन्तन करता हुआ योगी उन्हें प्राप्त होता है।

English Translation

O Partha, by meditating on the Supreme Divine Person with a mind engaged in the yoga of constant practice and not wandering elsewhere, one attains Him.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक ध्यान की विधि बताता है: निरंतर अभ्यास और एकाग्र मन से परमात्मा का चिंतन करने पर वह प्राप्त होता है। This verse describes the method of meditation: through constant practice and a focused mind, one attains the Supreme.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।