आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 14

अध्याय 8 · श्लोक 14

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः । तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः ॥ १४॥

ananya-cetāḥ satataṃ yo māṃ smarati nityaśaḥ | tasyāhaṃ sulabhaḥ pārtha nitya-yuktasya yoginaḥ ||14||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अनन्यचेताः: with mind fixed on Me alone; सततम्: constantly; यः: who; माम्: Me; स्मरति: remembers; नित्यशः: always; तस्य: to him; अहम्: I; सुलभः: easily attainable; पार्थ: O Partha; नित्ययुक्तस्य: ever-steadfast; योगिनः: of the yogi.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! जो योगी अनन्यचित्त होकर निरन्तर मेरा स्मरण करता है, उस नित्ययुक्त योगी के लिए मैं सुलभ हूँ।

English Translation

O Partha, for that yogi who constantly remembers Me with single-minded devotion, I am easily attainable.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक भक्ति योग के सार को बताता है: अनन्य भाव से निरंतर भगवान का स्मरण करने वाले को भगवान सहज ही प्राप्त हो जाते हैं। This verse states the essence of Bhakti Yoga: one who constantly remembers the Lord with single-minded devotion attains Him easily.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।