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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 13

अध्याय 8 · श्लोक 13

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् । यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ॥ १३॥

om ity ekākṣaraṃ brahma vyāharan mām anusmaran | yaḥ prayāti tyajan dehaṃ sa yāti paramāṃ gatim ||13||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ओम्: Om; इति: thus; एकाक्षरम्: the one-syllabled; ब्रह्म: Brahman; व्याहरन्: uttering; माम्: Me; अनुस्मरन्: remembering; यः: who; प्रयाति: departs; त्यजन्: abandoning; देहम्: the body; सः: he; याति: attains; परमाम्: supreme; गतिम्: goal.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो पुरुष एकाक्षर ब्रह्म ॐ का उच्चारण करता हुआ और मेरा स्मरण करता हुआ शरीर त्यागकर जाता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।

English Translation

He who departs by abandoning the body while uttering the one-syllabled Brahman, Om, and remembering Me, attains the supreme goal.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक ॐ के जप और भगवान के स्मरण के साथ मृत्यु के महत्व को बताता है। ॐ ब्रह्म का वाचक है और इसे जपते हुए मरने वाला परम धाम जाता है। This verse highlights the importance of uttering Om and remembering the Lord at death. Om is the sound representation of Brahman, and one who dies while chanting it attains the supreme abode.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।