आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 15

अध्याय 8 · श्लोक 15

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् । नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः ॥ १५॥

mām upetya punar janma duḥkhālayam aśāśvatam | nāpnuvanti mahātmānaḥ saṃsiddhiṃ paramāṃ gatāḥ ||15||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

माम्: Me; उपेत्य: having attained; पुनः: again; जन्म: birth; दुःखालयम्: abode of sorrow; अशाश्वतम्: impermanent; न: not; आप्नुवन्ति: obtain; महात्मानः: great souls; संसिद्धिम्: perfection; परमाम्: supreme; गताः: attained.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मुझको प्राप्त करके वे महात्मा पुनः दुःखरूपी आलय और नाशवान संसार में जन्म नहीं पाते, क्योंकि वे परम सिद्धि को प्राप्त हो चुके होते हैं।

English Translation

Having attained Me, these great souls do not take birth again in this impermanent abode of sorrow, for they have attained the supreme perfection.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक मुक्त आत्माओं की स्थिति बताता है: भगवान को प्राप्त कर लेने पर वे पुनः जन्म-मृत्यु के चक्र में नहीं लौटते। This verse describes the state of liberated souls: having attained the Lord, they do not return to the cycle of birth and death.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।