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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 16

अध्याय 8 · श्लोक 16

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन । मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते ॥ १६॥

ā-brahma-bhuvanāt lokāḥ punar āvartino 'rjuna | mām upetya tu kaunteya punar janma na vidyate ||16||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

आब्रह्मभुवनात्: up to the world of Brahma; लोकाः: worlds; पुनरावर्तिनः: subject to return; अर्जुन: O Arjuna; माम्: Me; उपेत्य: having attained; तु: but; कौन्तेय: O son of Kunti; पुनः: again; जन्म: birth; न: not; विद्यते: exists.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे अर्जुन! ब्रह्मलोक पर्यन्त सभी लोक पुनरावर्ती (पुनः लौटने वाले) हैं; परन्तु हे कौन्तेय! मुझको प्राप्त करके पुनर्जन्म नहीं होता।

English Translation

O Arjuna, all the worlds up to the realm of Brahma are subject to return (repeated rebirth). But on attaining Me, O son of Kunti, there is no rebirth.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक बताता है कि उच्चतम लोक (ब्रह्मलोक) भी नाशवान और पुनरावृत्ति वाले हैं, जबकि भगवान की प्राप्ति से पूर्ण मुक्ति मिलती है। This verse states that even the highest heavenly realms are impermanent and involve return, whereas attaining the Lord grants complete liberation.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।