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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 17

अध्याय 8 · श्लोक 17

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो विदुः । रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः ॥ १७॥

sahasra-yuga-paryantam ahar yad brahmaṇo viduḥ | rātriṃ yuga-sahasrāntāṃ te 'ho-rātra-vido janāḥ ||17||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सहस्रयुगपर्यन्तम्: lasting a thousand yugas; अहः: day; यत्: which; ब्रह्मणः: of Brahma; विदुः: know; रात्रिम्: night; युगसहस्रान्ताम्: ending after a thousand yugas; ते: they; अहोरात्रविदः: knowers of day and night; जनाः: persons.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो पुरुष ब्रह्मा के दिन को (जो) हजार युगों का (है) और रात्रि को भी हजार युगों की अवधि वाली जानते हैं, वे मनुष्य अहोरात्र (समय) के ज्ञाता हैं।

English Translation

Those who know the day of Brahma, which lasts a thousand yugas, and the night of Brahma, which also lasts a thousand yugas, are the knowers of day and night.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक ब्रह्मा के समय-चक्र का वर्णन करता है: उनका एक दिन 1000 महायुगों का होता है, और रात भी उतनी ही। यह काल की विशालता को दर्शाता है। This verse describes the time cycle of Brahma: his day lasts a thousand yugas, and his night also a thousand yugas. It shows the vastness of cosmic time.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।