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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 18

अध्याय 8 · श्लोक 18

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे । रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके ॥ १८॥

avyaktād vyaktayaḥ sarvāḥ prabhavanty ahar-āgame | rātry-āgame pralīyante tatraivāvyakta-saṃjñake ||18||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अव्यक्तात्: from the unmanifest; व्यक्तयः: manifestations; सर्वाः: all; प्रभवन्ति: come forth; अहःआगमे: at the coming of day; रात्रिआगमे: at the coming of night; प्रलीयन्ते: dissolve; तत्र: in that; एव: indeed; अव्यक्तसंज्ञके: called the unmanifest.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

ब्रह्मा के दिन के आरम्भ में सभी व्यक्त (प्रकट) पदार्थ अव्यक्त (अप्रकट) से उत्पन्न होते हैं; और रात्रि के आरम्भ में उसी अव्यक्त (नाम वाले) में लीन हो जाते हैं।

English Translation

At the approach of (Brahma's) day, all manifestations come forth from the unmanifest; at the approach of night, they dissolve into that same unmanifest, called the avyakta.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक सृष्टि और प्रलय के चक्र को बताता है: ब्रह्मा के दिन में अव्यक्त से सृष्टि होती है, और रात में वापस अव्यक्त में लय हो जाती है। This verse describes the cycle of creation and dissolution: during Brahma's day, the manifest emerges from the unmanifest, and at night it dissolves back into it.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।