आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 19

अध्याय 8 · श्लोक 19

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

भूतग्रामः स एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते । रात्र्यागमेऽवशः पार्थ प्रभवत्यहरागमे ॥ १९॥

bhūta-grāmaḥ sa evāyaṃ bhūtvā bhūtvā pralīyate | rātry-āgame 'vaśaḥ pārtha prabhavaty ahar-āgame ||19||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

भूतग्रामः: multitude of beings; सः: that; एव: indeed; अयम्: this; भूत्वा भूत्वा: being born repeatedly; प्रलीयते: dissolves; रात्रिआगमे: at the coming of night; अवशः: helpless; पार्थ: O Partha; प्रभवति: come forth; अहःआगमे: at the coming of day.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! प्राणियों का यह समूह (रात्रि के आने पर) बार-बार उत्पन्न होकर विवश भाव से लीन हो जाता है और (दिन के आने पर) फिर प्रकट होता है।

English Translation

O Partha, this multitude of beings, being born again and again, helplessly dissolves at the coming of (Brahma's) night, and comes forth at the coming of day.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक बताता है कि सभी प्राणी सृष्टि-प्रलय के चक्र में बंधे हैं, विवश होकर बार-बार जन्मते और मरते हैं। This verse states that all beings are bound in the cycle of creation and dissolution, helplessly being born and dying again and again.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।