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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 9

अध्याय 7 · श्लोक 9

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

पुण्यो गन्धः पृथिव्यां च तेजश्चास्मि विभावसौ । जीवनं सर्वभूतेषु तपश्चास्मि तपस्विषु ॥ ९॥

puṇyo gandhaḥ pṛthivyāṃ ca tejaś cāsmi vibhāvasau | jīvanaṃ sarva-bhūteṣu tapaś cāsmi tapasviṣu ||9||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

पुण्यः: पवित्र; गन्धः: गन्ध; पृथिव्याम्: पृथ्वी में; च: और; तेजः: तेज; च: भी; अस्मि: हूँ; विभावसौ: अग्नि में; जीवनम्: जीवन; सर्वभूतेषु: समस्त प्राणियों में; तपः: तप; च: भी; अस्मि: हूँ; तपस्विषु: तपस्वियों में।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मैं पृथ्वी में पुण्य गन्ध हूँ और अग्नि में तेज हूँ; समस्त प्राणियों में जीवन हूँ और तपस्वियों में तप हूँ।

English Translation

I am the sacred fragrance in the earth, and the brilliance in fire; I am the life in all beings, and the austerity in ascetics.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

ईश्वर का अंश हर जगह है – सुगन्ध, तेज, जीवनशक्ति और तप में।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।