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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 10

अध्याय 7 · श्लोक 10

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम् । बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् ॥ १०॥

bījaṃ māṃ sarva-bhūtānāṃ viddhi pārtha sanātanam | buddhir buddhimatām asmi tejas tejasvinām aham ||10||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

बीजम्: बीज; माम्: मुझे; सर्वभूतानाम्: समस्त प्राणियों का; विद्धि: जान; पार्थ: हे पार्थ; सनातनम्: सनातन; बुद्धि: बुद्धि; बुद्धिमताम्: बुद्धिमानों में; अस्मि: हूँ; तेजः: तेज; तेजस्विनाम्: तेजस्वियों में; अहम्: मैं।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! मुझे समस्त प्राणियों का सनातन बीज जान। मैं बुद्धिमानों की बुद्धि हूँ और तेजस्वियों का तेज हूँ।

English Translation

Know Me, O Partha, as the eternal seed of all beings. I am the intelligence of the intelligent, and the splendor of the splendid.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

बीज रूप में ईश्वर सबमें अव्यक्त रूप से विद्यमान है। वह बुद्धि और तेज का भी स्रोत है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।